Sep २८, २०२० १०:३५ Asia/Kolkata
  • जंग के मैदान के विजयी ने वार्ता में भी मारी बाज़ी, हमलावर गठबंधन ने माना अंसारुल्लाह का पलड़ा है भारी, मंसूर हादी के भाई और पूर्व रक्षामंत्री को मिलेगी आज़ादी

यमन के जनांदोलन अंसारुल्लाह और हमलावर गठबंधन के बीच बंदियों के आदान प्रदान के लिए होने वाली वार्ता सफल रही।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि यमन पर हमला करने वाला गठबंधन हमेशा से ही अंसारुल्लाह को वैध मानने से अनाकानी करता रहा है और अब मजबूर होकर उसने अंसारुल्लाह से वार्ता की और उसकी मांगों के आगे सिर झुका दिए।

दूसरी ओर मआरिब का मोर्चा गठबंधन के लिए मौत का दलदल बनता जा रहा है और हमलावर गठबंधन पर दिन प्रतिदिन घेरा तंग होता जा रहा है। इसका मतलब अंसारुल्लाह की शक्ति को आधिकारिक रूप से स्वीकार करना है। यहां पर यह कहना ज़रूरी है कि अगर सऊदी गठबंधन यमन युद्ध के भविष्य और अपनी विजय से निराश न होता तो वह अंसारुल्लाह से वार्ता कभी न करता।

यमन का आम जनमत और इस देश आंतरिक स्रोत इस बात को पेश करके कि इस मामले में सऊदी अरब का मक़सद केवल अपने बंदी सैनिकों को आज़ाद कराना था, इस समझौते में सऊदी अरब की उपस्थिति कम महत्व का दिखाने का प्रयास कर रहे हैं।

अंसारुल्लाह ने बंदियों के आदान प्रदान पर सहमति जता दी है और मंसूर हादी के भाई और इसी प्रकार पूर्व रक्षामंत्री सहित चार महत्वपूर्ण हस्तियों की आज़ादी का इशारा दे दिया जिससे पता चलता है कि वार्ता में भी अंसारुल्लाह का पलड़ा भारी रहा है।  

अंसारुल्लाह ने बंदियों के आदान प्रदान का समझौता करके यमन में शांति और स्थिरता की स्थापना की अपनी सद्भावना का प्रदर्शन किया किन्तु साथ ही उसका यह भी मानना है कि इस प्रकार के समझौते महत्वपूर्ण नहीं हैं बल्कि इन समझौतों को लागू करना महत्वपूर्ण है जिसका हमलावर निरंतर उल्लंघन करते रहते हैं। (AK)

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