Sep ३०, २०२० २१:१६ Asia/Kolkata
  • सऊदी अरब का ईरान पर आतंकवाद का आरोप, घिसा-पिटा और मूल्यहीन ड्रामा

सऊदी अरब के अधिकारी हर कुछ दिन बाद ईरान के ख़िलाफ़ निराधार दावे दोहरा कर अपने आपको क्षेत्र को अस्थिर करने वाली कार्यवाहियों और पेट्रो डाॅलर और तकफ़ीरी विचारों से जन्म लेने वाले आतंकवाद से दूर बताने की कोशिश करते हैं।

इसी प्रक्रिया के अंतर्गत सऊदी अरब के अधिकारियों ने सोमवार की रात पहले से तैयार की गई एक साज़िश पर अमल करते हुए अपने देश में आतंकी कार्यवाहियों के आरोप में दस लोगों की गिरफ़्तारी की सूचना दी और बिना कोई प्रमाण व साक्ष्य पेश किए हुए दावा किया कि इनमें से तीन ने ईरान में सैन्य ट्रेनिंग हासिल की है। ईरान के ख़िलाफ़ बे सिर-पैर के दावे करना, तेहरान के विरुद्ध रियाज़ की एक स्थायी नीति में बदल चुकी है। सऊदी अरब के शासक सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ ने भी हाल ही में संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा के 75वें अधिवेशन में ईरान पर तनाव पैदा करने वाली नीतियां अपनाने और आतंकवाद के समर्थन का आरोप लगाया था।

 

ईरान के ख़िलाफ़ यह ड्रामा ऐसी स्थिति में जारी है कि जब पिछले कई दशकों की घटनाओं पर एक नज़र डालने से यह स्पष्ट हो जाता है कि रियाज़ के शासकों ने पश्चिमी एशिया के क्षेत्र में अत्यंत विध्वंसक भूमिका निभाई है और यह सिलसिला अब भी जारी है। सीरिया व इराक़ में दाइश व तहरीरुश्शाम समेत अनेक आतंकी गुटों का समर्थन, पश्चिमी एशिया में सऊदी अरब की विध्वंसक कार्यवाहियों का एक भाग है। ऐसा लगता है कि इस समय ईरान पर आतंकवाद के समर्थन का आरोप लगाने में रियाज़ का एक लक्ष्य, इस्राईल के साथ कुछ अरब देशों के संबंध स्थापित करने के ग़द्दारी भरे क़दम और रियाज़ की ओर से ज़ायोनी शासन के समर्थन की तरफ़ से जनमत का ध्यान हटाना है। अलबत्ता इस तरह की हरकतों से सऊदी अरब, यमन युद्ध में अमानवीय अपराधों, इस्राईल से संबंध स्थापना के समर्थन और फ़िलिस्तीनी काॅज़ से ग़द्दारी जैसे निंदनीय क़दमों से अपने आपको दोषमुक्त नहीं कर पाएगा।

 

सच्चाई यह है कि छद्म युद्ध शुरू करने के लिए सऊदी अरब की ओर से अन्य देशों के मामलों में हस्तक्षेप और गठजोड़ बनाना पूरे इलाक़े में अशांति व अस्थिरता की जड़ है और पश्चिमी एशिया के क्षेत्र की शांति व सुरक्षा के लिए गंभीर ख़तरा है। इस आधार पर ईरान के ख़िलाफ़ सऊदी अरब की ओर से लगाए जाने वाले आरोपों की समीक्षा पूरी तरह से स्पष्ट है। बच्चों की हत्यारी सऊदी सरकार को क्षेत्र में जिन चुनौतियों व समस्याओं का सामना है, उससे वह बौखलाई हुई है और ईरान पर निराधार आरोप लगा कर अपने आपको बचाने की कोशिश कर रही है। यमन में सऊदी अरब के अमानवीय अपराध और उसकी ओर से आतंकी गुटों का समर्थन जगज़ाहिर है और सऊदी अधिकारी इससे अपना दामन किसी भी स्थिति में बचा नहीं सकते। आतंकी गुटों की जन्मभूमि और इसी तहर आतंकियों की आर्थिक व सामरिक मदद करने वाले देश के रूप में सऊदी अरब को अपने अपराधों का जवाब देना ही होगा और वह ईरान पर निराधार आरोप लगा कर इस जवाबदेही से नहीं बच सकता। दूसरी बात यह भी है कि ईरान को ख़तरा बता कर पश्चिमी एशिया के क्षेत्र में शांति, सुरक्षा व स्थिरता स्थापित नहीं हो सकती। (HN)

 

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