Oct २१, २०२० ०९:३७ Asia/Kolkata
  • सीरिया से अचानक क़तर और इमारत के लिए शुरू हो गईं उड़ानें...ट्रम्प ने असद को भेजा हाथ से लिखा ख़त...सीरिया के पटल पर क्या हो रहा है?

तीन महत्वपूर्ण घटनाएं हुई हैं जिनसे लगता है कि सीरिया के ख़िलाफ़ ख़तरनाक मोर्चा खोलने वाले देशों के स्टैंड में बुनियादी बदलाव आ रहा है।

-1 उच्च अमरीकी अधिकारियों ने अगस्त महीने में सीरिया के ख़ुफ़िया दौरे किए। एक दौरा बंधक बनाए गए अमरीकियों के मामलों में अमरीकी राष्ट्रपति के विशेष दूत रोजर कार्सटीन्स ने किया और दूसरा दौरा अमरीकी राष्ट्रपति के सलाहकार काश पटेल ने किया जिन्होंने दमिश्क़ में सीरिया के राष्ट्रीय सुरक्षा विभाग के प्रमुख जनरल अली ममलूक से मुलाक़ात की।

-2 दूसरी घटना क़तर और इमारात के लिए सीरिया की उड़ानों का बहाल होना है जो पिछले लगभग दस साल से बंद थीं।

-3 तीसरी घटना हमा शहर के उपनगरीय इलाक़े में स्थित मूरक छावनी का सीरियाई सेना की ओर से परिवेष्टन कर लिए जाने के बाद इस इलाक़े में तैनात तुर्क सैनिकों का पीछे हट जाना है। तुर्क सेना ने इस इलाक़े से अपने सारे सैनिक और भारी हथियार हटा लिए ताकि सीरियाई सेना से टकराव न हो।

सीरिया को यह सारी सफलताएं तब मिली हैं जब उसने कहीं कोई विशिष्टता किसी को नहीं दी है। सारे पर्यवेक्षकों का मानना है कि सीरियाई सेना का पूरी मज़बूती से डटा रहना कारगर साबित हुआ और दूसरे पक्षों को अपने स्टैंड से पीछे हटना पड़ा।

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने इमारात और बहरैन पर दबाव डालकर उन्हें इस्राईल से समझौता करने पर तैयार कर लिया और जल्द ही शायद सूडान भी इस्राईल से समझौता कर लेगा। दूसरी ओर उन्होंने उत्तरी कोरिया और ईरान में क़ैद अमरीकियों की रिहाई के लिए क़ैदियों का आदान प्रदान किया तो इसके साथ ही उन्होंने अपने दूत दमिश्क़ भेजे ताकि वहां क़ैद में मौजूद छह अमरीकी नागरिकों को रिहा करवा लें और चुनावों में जीत की संभावना बढ़ जाए मगर सीरिया के कठोर स्टैंड के चलते ट्रम्प को सफलता नहीं मिल सकी।

ट्रम्प ने राष्ट्रपति असद को अपने हाथ से लिखा हुआ एक ख़त भेजा जिसमें अमरीकी क़ैदियों की रिहाई की मांग की मगर जब असद सरकार ने यह मांग ठुकरा दी तो ट्रम्प की हताशा बढ़ गई। सीरियाई सूत्र बताते हैं कि पकड़े गए अमरीकियों में एक को स्वतंत्र पत्रकार बताया जाता है मगर दरअस्ल वह अमरीकी इंटेलीजेंस का एजेंट है जिसका नाम ओस्टिन टाइस है।

अमरीकी अख़बार वाल स्ट्रीट जरनल ने जो रिपोर्ट प्रकाशित की उस पर सीरियाई सरकार की ओर से एक भी टिप्पणी नहीं आई बल्कि इस बारे में ग़ैर सरकारी अख़बार अलवतन ने एक जवाबी रिपोर्ट छापी जिसमें अख़बार ने बताया कि सीरियाई सरकार ने अमरीकियों से कहा कि सबसे पहले अमरीका सीरियाई इलाक़ों से अपने सैनिकों को बाहर निकाले उसके बाद ही किसी विषय पर उससे कोई वार्ता हो सकती है।

ट्रम्प प्रशासन ने सीरिया के मामले में स्टिक और कैरट की रणनीति अपनाई। स्टिक के रूप में क़ैसर क़ानून था जिसके ज़रिए सीरिया पर प्रतिबंध कठोर किए गए और कैरट सीरिया के मामलो में अमरीकी दूत जेम्ज़ जेफ़री का बयान था जिसमें उन्होंने कहा कि अमरीका सीरिया में सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि सीरियाई सरकार के रवैए में परिवर्तन चाहता है। मगर न तो अमरीकी स्टिक से सीरियाई सरकार विचलित हुई और न ही अमरीकी कैरट उसे लुभा सकी।

ट्रम्प ने अगर अपने दो दूत दमिश्क भेजे तो अमरीकी नियमों में यह अपवाद है। जब दुशमन देश से अमरीका को वार्ता करनी होती है तो वह किसी तीसरे निष्पक्ष देश का चयन करता है। अगर अमरीकी दूत डायरेक्ट दमिश्क़ पहुंचे हैं तो इसका मतलब यह है कि ट्रम्प प्रशासन बहुत जल्दबाज़ी में था और वह किसी भी तरह अमरीकी क़ैदियों को रिहा करवाने की कोशिश कर रहा था।

ट्रम्प ने ख़ुद अपने हाथ से सीरियाई राष्ट्रपति को पत्र लिखा उसके बाद अमरीका के दो दूत दमिश्क़ गए और यह दोनों दूत अमरीकी विदेश मंत्रालय नहीं वाइट हाउस के अधिकारी थे तो इससे यह पता चलता है कि सीरिया में सत्ता बदलने की योजना फ़ेल हो जाने के बाद अब अमरीकी सरकार सीरिया की असद सरकार को मान्यता देने पर मजबूर है। यही बात उन देशों के बारे में भी लागू होती है जिन्होंने दस साल तक अपने एयरपोर्ट सीरिया के लिए बंद करने के बाद अब अपने दरवाज़े खोल दिए हैं।

राष्ट्रपति बश्शार असद का एक वाक्य बहुत मशहूर है कि समर्पण की स्थिति में जो क़ीमत चुकानी पड़ती है वह प्रतिरोध की स्थिति में अदा की जाने वाली क़ीमत से कहीं ज़्यादा होती है। हमने जिन तीन घटनाओं का उल्लेख किया उनसे तो राष्ट्रपति असद की यह बात बिल्कुल सही प्रतीत होती है। यह तो शुरुआती सफलताएं हैं, आने वाले महीनों में अभी और भी चौंका देने वाली घटनाएं देखने को मिलेंगी।

स्रोतः रायुल यौम

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