Oct २१, २०२० २२:२३ Asia/Kolkata
  • अरबों के लिए इस्राईली जाल, ईरान को चिंता, क्या इस्राईल में ईरान से भिड़ने की हिम्मत है?  रूसी न्यूज़ एजेन्सी की यह रिपोर्ट पढ़ें।

रूस के स्पूतनिक न्यूज़ एजेन्सी की परशियन सेवा ने क्षेत्रीय हालात और ईरान की भूमिका पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जो कई सच्चाइयों से पर्दा हटाती है।

हालिया दिनों में इस्राईल और यूएई व बहरैन के बीच संबंध सामान्य करने के समझौते पर हस्ताक्षर के बाद इस विषय पर विशेषज्ञों ने चर्चा आरंभ कर दी है।

ईरान के रक्षा मंत्री अमीर हातेमी ने अलजज़ीरा टीवी चैनल से एक वार्ता में कहा कि "  यूएई और बहरैन के इस्राईल के साथ संबंध से फार्स की खाड़ी की शांति व सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है, लेकिन हम अपने इलाक़े के लिए पैदा होने वाले हर खतरा का करारा जवाब देंगें। "

उन्होंने इसके साथ ही यह भी कहा कि ईरान, फार्स की खाड़ी के अरब देशों के साथ परशियन गल्फ की सुरक्षा के लिए सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर के लिए तैयार है।

अब सवाल यह है कि इस्राईल के लिए ट्रम्प के दामाद कुशनर की योजनाओं और ईरान पर लगे अमरीकी प्रतिबंधों के साथ, परशियन गल्फ का कौन सा देश, ईरान के साथ इस प्रकार का समझौता कर सकता है?

 

अलवेफ़ाक़ समाचार पत्र के संपादक मुसीब नईमी ने स्पूतनिक से इस बारे में एक वार्ता में, ईरान की चिंता की वजह बताते  हुए कहते हैं कि इस्राईलियों ने और इसी तरह अबूधाबी और बहरैन के कुछ अधिकारियों ने खुल कर कहा है कि उनके बीच सहयोग की वजह ईरान का खतरा है जिससे यह पता चलता है कि पर्दे के पीछे किसी साज़िश के ताने बाने बुने जा रहे हैं। अब बात यह है कि अगर इस्राईल, अपने इलाक़े में अपनी नाकामियों  की वजह से तनाव और संकट को स्वंय से दूर और परशियन गल्फ तक फैलाना चाहे तो क्या होगा? जैसा कि हम देख रहे हैं कि उसने कफक़ाज और मध्यएशिया के संकट में दखल देने की कोशिश की है और इस इलाक़े के संकट की आग में घी डाल रहा है। अतीत में भी इस्राईल यह सब कर चुका है और उसने अकारण ही इराक़ में दखल दिया और वहां बमबारी तक की इसी तरह सीरिया संकट में भी उसने भूमिका निभाई है। यही वजह है कि इलाक़े में इस्राईल का आगमन, ईरान की नज़र में एक खतरा है। परशियन गल्फ में सब से अधिक तट ईरान के हैं और इसी लिए ईरान इस पूरे मामले में फूंक फूंक कर क़दम रखेगा और अगर वह इस इलाक़े से इस्राईल को खदेड़ना चाहेगा तो इसके लिए पहले वह मज़बूत रणनीति बनाएगा फिर कोई क़दम उठाएगा। इसकी वजह भी यह है कि इस्राईल तो यही चाहता है कि इस इलाक़े में अशांति फैले क्योंकि परशियन गल्फ में शांति की ज़िम्मेदारी ईरान की है। इसी लिए ईरान के लिए फार्स की खाड़ी को शांति बनाए रखना भी ज़रूरी है और इस्राईल को खदेड़ना और नाकाम बनाना भी आवश्यक है। इन सब पर एक साथ अगर नज़र डाली जाए तो पूरी बात समझ में आ सकती है।

 

परशियन गल्फ के तट पर बसे अन्य देश यहां तक कि इराक़ व कुवैत व ओमान तक से ईरान के अच्छे संबंध हैं और उन्हें भी इस्राईल की उपस्थिति से चिंता है। वैसे इन देशों पर अमरीका का दबाव भी बहुत अधिक है। अमरीकियों ने ट्रम्प काल में बहुत से देशों पर इस्राईल के लिए रास्ता खोलने के लिए भारी दबाव डाला है। ट्रम्प से इसी लिए अमरीका की यहूदी लाबी को उम्मीद भी थी। यही वजह है कि ईरान, धैर्य व संयम के उन देशों पर नज़र रखे है जो इस्राईल से संबंध बना रहे हैं और उन्हें चेतावनी भी दे चुका है और इसके साथ ही मैदान में खुद भी डटा हुआ है। लेकिन यह बात भी साफ है कि ईरान को इस्राईल की ओर से यह चिंता है कि कहीं वह पश्चिमी एशिया में हालात खराब न करे वर्ना अपने लिए ईरान इस्राईल को कोई खतरा नहीं समझता क्योंकि इस्राईल को अच्छी तरह से मालूम है कि किसी प्रकार की कार्यवाही का बहुत करारा जवाब मिलेगा।

इस्राईल तो फिलिस्तीन की सीमाओं के निकट भी ईरान के टकराने की हिम्मत नहीं कर पा रहा है, फार्स की खाड़ी में तो सवाल ही नहीं। इस लिए ईरान ने इस्राईल की उपस्थिति की ओर से जो चिंता जतायी है उसकी अस्ल वजह, वह खतरे हैं जो ईरान के पड़ोसी देशों को इस्राईल की ओर से हो सकते हैं।

 

लेकिन क्या परशियन गल्फ के देश ईरान से हाथ मिलाएंगे?

ईरान की एक स्थायी रणनीति है और वह पड़ोसी देशों के साथ अच्छे  और सार्थक संबंधों पर आधारित है। विशेष कर फार्स की खाड़ी में ईरान अपनी इस नीति पर विशेष ध्यान देता है क्योंकि यह इलाक़ा, आर्थिक और ऊर्जा क्षेत्र में बेहद महत्वपूर्ण है। इस लिए ईरान को इन देशों की ज़रूरत नहीं, इन देशों को ईरान की ज़रूरत है और इसी लिए ईरान ने यह चेतावनी दी है कि अगर वह ईरान से दूर हुए और इस्राईल के जाल में फंस गये तो फिर वह एक बेहद खतरनाक खेल का हिस्सा बन सकते हैं। यही वजह है कि ईरान ने हमेशा अपने पड़ोसी देशों का खास ख्याल रखा है और अमरीका के साथ संबंध होने की वजह से हालांकि सऊदी अरब,बहरैन और कभी कभी यूएई ने ईरान के बारे में गलत रवैया अपना लेकिन उसके बावजूद ईरान ने बेहद तार्किक रुख अपनाते हुए मामले  को हल कर लिया। हमने अतीत में भी देखा है कि अमरीका के भड़काने के बाद इन देशों ने कुछ हंगामे  शुरु किये लेकिन फिर वह पीछे हटने पर मजबूर हो गये। ईरान ने हमेशा इन देशों को इस प्रकार के व्यवहार के खतरों से अवगत कराया है और वैसे भी, यह तो साफ है कि परशियन गल्फ के यह देश, अकेले ही ईरान के साथ खतरनाक खेल शुरु करने की हिम्मत रखते यही वजह है कि ईरान यह नहीं चाहता कि उसके पड़ोसी किसी एसी शक्ति के हितों की बलि चढ़ें जो पूरे इलाक़े में आग लगाने की इच्छुक है। Q.A.

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