Oct २४, २०२० १६:४० Asia/Kolkata
  • यमन, ईरान ने अपना राजदूत भेज दिया, सऊदी अरब अपना राष्ट्रपति नहीं भेज पाया! ईरानी राजदूत कौन से रास्ते से गये?  लेबनानी समाचार पत्र का रोचक जायज़ा

ईरान के राजदूत हसन ईरलू पिछले हफ्ते, सनआ पहुंच गये और उन्होंने ईरान व यमन के बीच संबंधो में विस्तार पर बल दिया। ईरान ने पिछले साल तेहरान में यमन के राजदूत इब्राहीम अद्दीलमी को स्वीकार करके अपने इरादे का एलान कर दिया था।

ईरान ने  स्पष्ट कर दिया था कि वह यमन के साथ मिल कर अमरीकी व इस्राईली साज़िश का मुक़ाबला करने का मज़बूत संकल्प रखता है।सऊदी अरब ने ईरान के साथ संबंध रखने के आरोप में यमन के खिलाफ एसा युद्ध शुरु किया जो अब तक जारी है। इस युद्ध का दूसरा बहाना, अब्द मंसूर हादी की सरकार को क़ानूनी दर्शाना था। युद्ध आरंभ हुए 6 साल का समय बीत चुका है लेकिन राजनीतिक समाधान अब भी काफी  दूर है और खत्म होने की कोई उम्मीद नहीं है।

सब से अहम बात यह है कि सऊदी अरब का दावा है कि यमन के 85 प्रतिशत भाग पर उसका और उसके घटकों का अधिकार है लेकिन यमन में सऊदी राजदूत, रियाज़ में बैठ कर अपनी ज़िम्मेदारी निभाते हैं जबकि  यमन में ईरानी राजदूत, सीधे सीधे यमन की राजधानी सनआ में बैठ कर अपने कर्तव्यों  का पालन कर रहे हैं इस तरह से हम देख रहे हैं कि ईरान ने सऊदी अरब और यूएई को कैसी चोट पहुंचायी है।

 

यमन पहुंचने वाले ईरानी राजदूत ने कौन सा रास्ता अपनाया इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं, क्या सऊदी अरब के किसी दोस्त ने धोखा देकर ईरान का साथ दिया है ? आखिर सऊदी अरब इतना कमज़ोर कैसे हो गया कि यमन की वायु सीमा पर कड़े पहरे के बावजूद ईरान के राजदूत को रोक  नहीं पाया? कुछ लोग इस मामले में क़तर पर आरोप लगा रहे हैं और उनका कहना है कि यह क़तर की मदद से वास्तव में एक बड़े समझौते की ओर क़दम है। इसके  लिए यह लोग, बंदियों के तबादले का उदाहरण देते हैं। 

दूसरी बात यह है कि सऊदी अरब ने सनआ में क़ानूनी सरकार लाने के दावे के साथ इस देश के खिलाफ युद्ध शुरु किया था लेकिन वह मंसूर हादी को अदन नहीं भेज पा रहा है यहां तक कि सऊदी अरब यमन के अपने निंयत्रण वाले प्रान्तों को भी निचले स्तर पर भी नहीं संभाल पा रहा है। जैसा कि वह अदन में सुरक्षा स्थापना में बुरी तरह नाकाम रहा है।

 

इसी मध्य यमन की नेश्नल साल्वेशन गर्वमेंट के विदेशमंत्री हेशाम शरफ ने ईरानी राजदूत के सनआ पहुंचने के बारे में कहा कि इस का क्षेत्रीय झगड़ों से कोई संबंध नहीं है और यह तैनाती ईरान द्वारा यमन के साथ दोस्ती के एलान के लिए है। यह यात्रा इस बताने के लिए है कि यमन है और दुनिया में अब भी उसके दोस्त मौजूद हैं।

दूसरी तरफ, ईरानी राजदूत के सअना पहुंचने को विशेषज्ञ, यमन के खिलाफ सऊदी अरब के 6 बरसों से जारी युद्ध और घेराबंदी की विफलता का एक प्रमाण कह रहे हैं। सऊदी अरब, यमन की सरकार की रियाज़ में मेज़बानी कर रहा है जबकि यमन की नेश्नल साल्वेशन सरकार, ने देश में सभी सरकारी ढांचे और संस्थाओं को सुरक्षित रखा है और सुचारू रूप से सरकार चल रही है बस विश्व के देशों द्वारा उसे औपचारिक रूप से स्वीकार किये जाने की ज़रूरत है जैसा कि ईरान अपना राजदूत भेज कर किया है।

ईरान के कुद्स समाचार पत्र ने लिखा है कि ईरान का यह क़दम दर अस्ल यमन की सरकार को कानूनी रूप से औपचारिकता दिलाने की दिशा में एक बड़ा क़दम है। सच्चाई यह है कि यमन में अब सब कुछ असांरुल्लाह के हाथ में है। आज, अमरीका, इस्राईल और सऊदी अरब की संयुक्त साज़िशों के बावजूद यमन में अंसारुल्लाह बेहद मज़बूत पोज़ीशन में है और वह यमन के विभाजन की हर कोशिश को नाकाम बना रहा है। इसके साथ ही असांरुल्लाह ने रक्षा पोज़ीशन के साथ ही साथ आप आक्रमण की पोज़ीशन अपना ली है और सऊदी गठजोड़ के मुक़ाबले में बड़ी बड़ी सफलताएं भी  अर्जित की हैं। ईरान ने यमन में अपना राजदूत तैनात करके यह संदेश दिया है कि यमन में अंसारुल्लाह एक एसी सच्चाई है जिसे इलाक़े के मंच से हटाया नहीं जा सकता। ईरान के इस फैसले का इलाक़े पर तो असर होगा ही इसके साथ स्वंय यमन में भी इस का प्रभाव पड़ेगा। यह वास्तव में सऊदी अरब के लिए एक कड़ा संदेश है जो मसूंर हादी की गैर कानूनी सरकार को कानूनी दर्शाने की पूरी कोशिश कर रहा है। Q.A.

ताज़ातरीन ख़बरों, समीक्षाओं और आर्टिकल्ज़ के लिए हमारा फ़ेसबुक पेज लाइक कीजिए!

हमारा व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए क्लिक कीजिए

हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!

इंस्टाग्राम पर हमें फ़ालो कीजिए

 

 

 

टैग्स

कमेंट्स