Oct २७, २०२० २२:५८ Asia/Kolkata
  • इराक़ में प्रदर्शनों की नई लहर, खिलाड़ी कौन हैं और लक्ष्य क्या हैं?

इराक़ में एक बार फिर जन प्रदर्शन शुरू हो गए हैं जिन्होंने कुछ स्थानों पर हिंसक रूप धारण कर लिया जिसमें दसियों सुरक्षाकर्मी और आम नागरिक घायल हो गए।

इराक़ में 25 अक्तूबर सन 2019 को शुरू हुए जन प्रदर्शनों की पहली वर्षगांठ के अवसर पर पिछले दो दिन से प्रदर्शन हो रहे हैं। पिछले साल हुए प्रदर्शनों के कारण आदिल अब्दुल महदी को प्रधानमंत्री के पद से त्यागपत्र देना पड़ा था जिसके बाद नई सरकार का गठन हुआ। अलबत्ता इस बार जो प्रदर्शन हो रहे हैं उनमें और पिछले साल के प्रदर्शनों में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहे हैं। एक अंतर तो यह है कि इस बार प्रदर्शनकारियों की संख्या उतनी नहीं है जितनी पिछले साल थी। कहा जा सकता है कि कोरोना के फैलाव की ओर से लोगों की चिंता इसका एक कारण है। इसके अलावा आपत्तियों के प्रभाव की ओर से लोगों की निराशा भी विभिन्न क्षेत्रों में होने वाले प्रदर्शनों में लोगों की संख्या में कमी का एक कारण है।

 

एक राजनैतिक दल के प्रवक्ता ने कहा कि 25 अक्तूबर 2019 और 25 अक्तूबर 2020 के प्रदर्शनों की तुलना करने पर पता चलता है कि इस साल अधिकतर जवानों ने प्रदर्शन में भाग नहीं लिया। वे उन लोगों की ओर से निराश हो चुके हैं जिन्होंने उनसे वादे किए थे। न तो हत्यारों का पता चला और न ही भ्रष्ट लोगों को गिरफ़्तार किया गया। दोनों प्रदर्शनों के दौरान एक और अंतर हिंसा के अनुपात का है। पिछले साल के प्रदर्शनों में व्यापक स्तर पर हिंसा हुई थी और दसियों लोग हताहत और सात हज़ार से ज़्यादा लोग घायल हो गए थे जबकि इस बार के प्रदर्शन में दसियों लोग घायल हुए हैं और किसी भी व्यक्ति के मरने के बारे में कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई है।

 

इराक़ में होने वाले प्रदर्शनों के मुख्य खिलाड़ियों के बारे में कहा जा सकता है कि इन प्रदर्शनों में भाग लेने वाले कुछ लोग तो वही हैं जो पिछले साल के प्रदर्शनों में थे। खिलाड़ियों का एक भाग तो जनता पर आधारित है जो अपनी आर्थिक स्थिति, कोरोना के फैलाव और इसी तरह भ्रष्टाचार से निपटने के ढांचे की अक्षमता पर आपत्ति स्वरूप प्रदर्शन में भाग ले रही है। खिलाड़ियों का दूसरा हिस्सा उन लोगों का है जो इराक़ में हिंसा पैदा करने में अपना फ़ायदा समझते हैं और बुनियादी तौर पर उन्हें देश की वर्तमान आर्थिक व्यवस्था से समस्या है। बास पार्टी के बचे खुचे तत्व और इस पार्टी के समर्थक और इसी तरह कुछ प्रतिबंधित धड़ों के समर्थक इन लोगो में शामिल हैं। इराक़ की सशस्त्र सेना के कमांडर इनचीफ़ के प्रवक्ता यहया रसूल ने हालिया प्रदर्शनों के बारे में कहा कि हमने एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया है जिसके पास सुरक्षा बलों पर हमले करने के लिए 61 पेट्रोल बम थे।

 

पिछले साल के प्रदर्शनों के खिलाड़ियों और इस साल के प्रदर्शन के खिलाड़ियों में जो अंतर है वह यह है कि सरकार विरोधी संगठित गुट इस साल के प्रदर्शनों में शामिल नहीं थे। पिछले साल अक्बूतर में हुए प्रदर्शनों में इस प्रकार के गुट भी थे जिन्हें विदेशी शक्तियों का समर्थन हासिल था और उनका लक्ष्य आदिल अब्दुल महदी की सरकार को गिराना था लेकिन पिछले दो दिन में हुए प्रदर्शनों में इस तरह के गुट उपस्थित नहीं थे क्योंकि विदेशी शक्तियों का लक्ष्य इराक़ में मुस्तफ़ा अलकाज़ेमी की सरकार को बाक़ी रखना है। इस आधार पर पिछले दो दिनों में जो प्रदर्शन हुए हैं उनकी बुनियादी मांग, सरकार को हटाना नहीं थी। प्रतीत होता है कि कुछ आंतरिक धड़े जो पिछले साल प्रदर्शनों यहां तक कि हिंसा का समर्थन कर रहे थे और आदिल अब्दुल महदी की सरकार को गिराना चाहते थे, अब अगले साल के संसदीय चुनावों के बारे में सोच रहे हैं और प्रदर्शनों व हिंसा को अपने हितों के अनुकूल नहीं देख रहे हैं। (HN)

 

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