Oct २९, २०२० १६:३३ Asia/Kolkata
  • बाइडन ईरान की गोद में बैठें... अमरीका को सऊदी अरब की धमकी... अगर ईरान से संबंध ठीक हुए तो ... क्या क्या कर सकता है सऊदी अरब?  सऊदी समाचार पत्र का जायज़ा

लंदन से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र अलअरब ने बाइडन की जीत के बाद के हालात का जायज़ा लिया है। अलअरब को सऊदी अरब से आर्थिक मदद मिलती है और इसे सऊदी अरब के शाही परिवार का निकट समाचार पत्र समझा जाता है। इस लेख में ईरान और अमरीका के बीच विवाद खत्म होने से सऊदी अरब के डर को देखा जा सकता है।  

लदंन से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र अलअरब में अली सर्राफ ने लिखा है  कि संभावित रूप से अमरीका के अगले राष्ट्रपति जो बाइडन, सऊदी अरब के प्रति शत्रुतापूर्ण रवैया रखेंगे तो इन हालात में रियाज़ क्या करेगा? और उसके पास बचाव का क्या रास्ता है?

    

     अगर जो बाइडन अमरीका के राष्ट्रपति बनते हैं तो सऊदी अरब पर दो तरह के दबाव डाले जा सकते हैं। एक तो मानवाधिकार, खाशुकजी की हत्या और यमन का मुद्दा है, लेकिन यह चीज़ें अमरीका और सऊदी अरब के गठबंधन को खत्म नहीं करेंगी बल्कि यह हो सकता है कि सऊदी अरब से अपनी सदभावना साबित करने के लिए कहा जाए और उससे कुछ मांग की जाए।

     इस सच्चाई की अनदेखी नहीं की जा सकती कि अमरीका के साथ सऊदी अरब और यूएई का  जो एक  संयुक्त आर्थिक व राजनीतिक शक्ति हैं, सालाना व्यापारिक लेन-देन 65 अरब डॉलर से अधिक  का है और यही चीज़ एक मज़बूत ढाल की तरह सऊदी अरब और अमरीका के संबंधों की सुरक्षा कर सकती है क्योंकि  सऊदी अरब अपनी पुंजी अमरीका से निकाल कर किसी अन्य देश में रख सकता है जिसके बाद अमरीका को पता चल जाएगस कि आर्थिक क्षेत्र में उस पर अविश्वास का उसे क्या परिणाम भुगतना पड़ सकता है।

 

     सऊदी अरब के साथ  अगर अमरीका दुश्मनी करेगा तो फिर इसका मतलब, परशियन गल्फ के अन्य देशों के साथ भी दुश्मनी करना होगा और यह सारे देश अमरीका में निवेश करते हैं। हां बाइडन सऊदी अरब की आलोचना कर सकते हैं लेकिन एसा नहीं लगता कि वह सऊदी अरब से दुश्मनी की मूर्खता करेंगे क्योंकि उन्हें मालूम है कि इस दशा में अमरीकी अर्थ व्यवस्था को भारी क़ीमत  चुकानी पड़ेगी।

     निश्चित रूप से अगर बाइडन ने सऊदी अरब के प्रति गलत नीति  अपनायी तो रियाज़ अधिक ठोस क़दम भी उठा सकता है और अगर बाइडन भी ओबामा की ही राह पर आगे बढ़ना चाहेंगे तो उन्हें यह समझना चाहिए कि ईरान की मदद करने से इलाक़े में वह एक त्रासदी को जन्म देंगे और इस राह में निश्चित रूप से उन्हें सऊदी अरब का सहयोग नहीं मिलेगा।

     सऊदी अरब पर दबाव के लिए बाइडन दूसरा काम यह कर सकते हैं कि ईरान की ओर से क्षेत्रीय देशों के खिलाफ शत्रुतापूर्ण रवैया न अपनाने और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को रोकने के बारे में कोई गारंटी लिये बिना ही वह ईरान के परमाणु समझौते में वापस हो जाएं। अगर बाइडन ने यह काम किया तो निश्चित रूप से सऊदी अरब, अमरीका के साथ अपने संबंधों पर पुनर्विचार करेगा। सऊदी अरब जो कुछ कर सकता उनमें से कुछ काम यह हैः

  •      सऊदी अरब अमरीका से अपना निवेश निकाल कर किसी अन्य देश में ले जा सकता है।
  •      अमरीकी सैनिकों को इलाक़े से बाहर निकालने की मांग कि जिनकी परशियन गल्फ में उपस्थिति  का कोई फायदा नहीं है।
  •      विश्व की अन्य शक्तियों  से अधिक गहरे संबंध बनाएगा।
  •      सऊदी अरब स्वदेशी सैन्य क्षमता को बढ़ाएगा।
  •      सऊदी अरब एक ऐसे समाज की रचना करेगा जो पारंपरिक मूल्य और आधुनिकता का संगम होगा।
  •      उन शक्तियों से दूर रह कर आतंकवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ युद्ध करेगा जो बात की गहरायी को नहीं समझतीं और ईरान को आतंकवाद का समर्थन नहीं मानतीं।

          हम खुल कर कह रहे हैं बाइडन समझ लें कि नौका में सूराख किये बिना ही और संयुक्त हितों के आधार पर राजनीतिक समाधान तक पहुंच सकते हैं लेकिन अगर ईरान से दबाव हटाया गया तो शायद सऊदी अरब और परशियन गल्फ के अन्य देशों के लिए यही सही होगा कि वह ईरान की गोद में बैठ जाएं।

     सऊदी अरब, अपनी सुरक्षा खुद कर सकता है और उसे अमरीका की ओर से खर्चीली मदद की ज़रूरत नहीं लेकिन सऊदी अरब का समर्थन गंवा देना, अमरीका के लिए काफी महंगा साबित हो सकता है। अब अगर ईरान के बारे में क्षेत्रीय देशों के रुख को बाइडन समझ पाते हैं या नहीं तो यह उनकी समस्या है, न कि हमारी। लेकिन इस बीच सऊदी अरब का ठोस रुख, सभी विकल्पों को मेज़ पर रख सकता है और ईरान के प्रति अगर बाइडन नरमी दिखाते हैं  तो  यही सऊदी अरब की ओर से जवाब होगा।

     बाइडन ईरान की गोद में बैठ सकते हैं और जो चाहें फायदा उठा सकते हैं, लेकिन उसका नुक़सान इलाक़े की सरकारों और जनता को नहीं होना चाहिए। इस दशा में हम अमरीका और ईरान से कहतें, संबंध मुबारक हो, और इसके साथ ही उन्हें उपहार भी देंगे।

     लेकिन अगर अमरीका, ईरान के साथ सांठगांठ की ओर बढ़ता है तो फिर इलाक़े और परशियन गल्फ से अमरीकी सैनिकों को बाहर निकालना एक कानूनी मांग होगी। Q.A.


ताज़ातरीन ख़बरों, समीक्षाओं और आर्टिकल्ज़ के लिए हमारा फ़ेसबुक पेज लाइक कीजिए!

हमारा व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए क्लिक कीजिए

हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!

इंस्टाग्राम पर हमें फ़ालो कीजिए

 

टैग्स

कमेंट्स