Oct ३०, २०२० ०८:५८ Asia/Kolkata
  • सऊदी अरब के लेबर क़ानून में बड़ा बदलाव, कफ़ालह व्यवस्था ख़त्म करने का फ़ैसला

सऊदी अरब ने कफ़ालह के नाम से मशहूर विदेशी कामगारों की स्पांसरशिप की व्यवस्था को ख़त्म करने का फ़ैसला किया है और इसकी जगह अब मालिक और कामगार के बीच नए प्रकार का कांट्रैक्ट सिस्टम लाया जा रहा है।

मआल नामक अरबी अख़बार के हवाले से सामने आने वाली रिपोर्ट के अनुसार देश में पिछले 70 साल से जारी कफ़ालह क़ानून आम तौर पर विदेशी कामगार को किसी एक स्पांसर से बांध देता है, अब जो नया सिस्टम लाया जा रहा है उसके बारे में सऊदी अधिकारियों का कहना है कि यह कामगार और मालिक को उस कांट्रैक्ट से जोड़ेगा जो दोनों पक्षों के अधिकारों और दायित्वों को स्पष्ट करेगा।

मानवाधिकार संगठनों ने नए सिस्टम की आलोचना की है और कहा है कि इससे कामगारों और मज़दूरों का शोषण होगा।

फ़रवरी में सऊदी गज़ट की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि कफ़ालह सिस्टम को ख़त्म करने का फ़ैसला सऊदी अरब की ओर से किए जा रहे आर्थिक सुधारों का हिस्सा है जो सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान के 2030 के नाम से मशहूर विजन के तहत किए जा रहे हैं।

नए सिस्टम के तहत प्रवासी मज़दूरों को किसी भी कंपनी से बाहर जाने और दोबारा प्रवेश के बारे में वीज़े की आज़ादी होगी, वह ख़ुद से आख़िरी एक्ज़िट हासिल करने के साथ साथ किसी भी रुकावट के बिना नौकरी हासिल कर सकेंगे।

सऊदी अरब में सात दशकों से लागू कफ़ालह क़ानून विदेशी कामगारों और मालिक के बीच संबंधों को कंट्रोल करता है, व्यवस्था के तहत मज़दूर देश में पहुंचने के बाद अपने कफ़ील के लिए काम करता है और कफ़ील की अनुमति के बग़ैर किसी और के लिए काम करने का हक़दार नहीं रहता।

कफ़ालह सिस्टम के कारण विश्व स्तर पर सऊदी अरब की बदनामी हो रही थी क्योंकि कुछ स्पांसरों ने इसका प्रयोग करते हुए कामगारों का शोषण किया।

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