Oct ३०, २०२० १७:०६ Asia/Kolkata
  • अगर अमरीका इस्राईली अर्थ व्यवस्था को सहारा न दे ? इस्राईल की तरक्की का प्रचार करने वाले ज़रूर पढ़ें...

अलअरबी अल जदीद समाचार पत्र ने इस्राईली अर्थ व्यवस्था की सच्चाई से पर्दा हटाया और यह बताया है कि किस तरह  से इस्राईली अर्थ व्यवस्था को अमरीका घसीट रहा है।

अन्तवान शलहत ने अलअरबी अलजदीद में लिखा है कि दुनिया में जब भी आर्थिक संकट पैदा होता है तो बहुत से सवाल उठते हैं जिनमें यह सवाल भी बहुत अधिक पूछा जाता है कि क्या इस्राईली अर्थ व्यवस्था अपने पैरों पर खड़ी है? और वह किस सीमा तक अमरीका पर निर्भर है?

दुनिया में बहुत से लोगों का यह मानना है कि इस्राईल की अर्थ  व्यवस्था, काफी मज़बूत है और अगले कुछ वर्षों में दुनिया की विकसित अर्थ व्यवस्थाओं में उसका शुमार किया जाने लगेगा। इन लोगों का कहना है कि इस तरह की तरक्की की वजह इस्राईल का सरकारी ढांचा है लेकिन कुछ दूसरे लोगों का यह मानना है कि इस्राईल आर्थिक क्षेत्र में अभी तक अपने पैरों पर खड़ा होने में सफल नहीं हो पाया।

इस सिलसिले में नेतेन्याहू का मानना है कि वर्तमान काल में कि जो भूमंडलीकरण का दौर है, दुनिया में कोई भी सरकार एसी नहीं है जिसे हम अर्थ व्यवस्था के क्षेत्र में पूरी तरह से स्वाधीन समझ सकें और यह  चीज़ इस्राईल के लिए भी है।

नेतेन्याहू के विपरीत बहुत से टीककारों का मानना है कि इस्राईल की स्वाधीनता हर साल बढ़ रही है और सैन्य दृष्टि से वह अमरीका पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है। हालांकि कहा जाता है कि अब वह दौर नहीं रहा जब इस्राईल अमरीकी मदद के बिना अपना सैनिक बजट पूरा नहीं कर पाता था। अब भी अगर अमरीकी मदद न मिले तो इस्राईल को बहुत बड़ा नुक़सान होगा लेकिन वह यह नुक़सान सहन कर सकता है और बाकी रह सकता है।

 

    लेकिन दक्षिणपंथी धड़े के विरोधियों का कहना है कि इस्राईल को हमेशा विभिन्न क्षेत्रों में युद्ध के परिणाम में अपने अस्तित्व का खतरा रहा है और इसी लिए उसे अपना अस्तित्व बचाने के लिए हमेशा अमरीकी मदद की ज़रूरत पड़ती है। इस लिए इस्राईल आर्थिक क्षेत्र में हमेशा अमरीका का मोहताज रहेगा।

    कुछ बरसों  पहले एक प्रसिद्ध अर्थ शास्त्री ने कहा था कि अमरीका के लिए इस्राईल के महत्व की एक वजह यह है कि इस्राईल, मध्य पूर्व में अमरीकी युद्धपोत के कप्तान की हैसियत रखता है लेकिन वाशिंग्टन जब चाहे इस्राईल को इस पद से हटा दे और अपने जहाज़ का कोई और कप्तान चुन ले लेकिन इस्राईल, अमरीका के बिना अपना अस्तित्व बचा ही नहीं पाएगा।

    अगर केवल अर्थ व्यवस्था पर ही नज़र रखी जाए तो भी यह एक सच्चाई है कि इस्राईल की पूरी अर्थ व्यवस्था, निर्यात पर निर्भर है और इसी लिए अगर उसका निर्यात रुक गया तो उसकी पूरी अर्थ व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी लेकिन अब तक, अमरीका के वीटो की वजह से इस्राईल का निर्यात रुक नहीं पाया।

    यही वजह है कि इस्राईल के विरोधी खुल कर कहते हैं कि कोई भी अमरीकी राष्ट्रपति बस यह कह दे कि वह इस्राईल के साथ संबंधों पर पुनर्विचार करना चाहता है फिर देखें क्या होता है? इस तरह के बयान के तत्काल बाद इस्राईल में शेयर बाज़ार में भूंचाल आ जाएगा और इस्राईल में डालर का मूल्य बढ़ जाएगा। इन हालात में दुनिया के सभी बैंक, इस्राईल से संपर्क से परहेज़ करने लगेंगे  और सुरक्षा परिषद अमरीकी वीटो  से निश्चिंत होकर इस्राईल के खिलाफ प्रतिबंध लगा देगी जिसके बाद इस्राईल की अर्थ व्यवस्था बिखर जाएगी। इस दशा में इस्राईल की सारी आर्थिक उपलब्धियां मिट्टी में मिल जाएंगी और उसका पूरा अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। मतलब  यह कि अगर अमरीकी राष्ट्रपति चाह ले तो इस्राईल का टाइटनिक जहाज़, ग्लेशर से टकरा का चूर चूर हो जाएगा। यह है इस्राईल की हैसियत! Q.A.

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