Oct ३१, २०२० ०९:१५ Asia/Kolkata
  • मुसलमान अपने पैग़म्बर का अनादर बर्दाश्त नहीं करेंगे, पश्चिम तकफ़ीरी गुटों का समर्थन बंद करेः हसन नसरुल्लाह

लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन के महासचिव ने कहा है कि तकफ़ीरी गुट जो अपराध कर रहे हैं, उनका पैग़म्बर व इस्लामी समुदाय से कोई लेना-देना नहीं है और पश्चिमी देशों को तकफ़ीरी गुटों का समर्थन बंद करना चाहिए।

सैयद हसन नसरुल्लाह ने शुक्रवार की रात हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम के शुभ जन्म दिवस के उपलक्ष्य में भाषण करते हुए गुरुवार को फ़्रान्स के नीस शहर में हुए हमले की निंदा की और कहा कि इस्लाम और इस्लामी गुट इस तरह के हमलों की निंदा करते हैं चाहे वे अतीत में हुए हों या भविष्य में हों। उन्होंने कहा फ़्रान्स के अधिकारियों को इस बात का हक़ नहीं है कि एक व्यक्ति द्वारा किए गए अपराध को पूरे इस्लाम व मुसलमानों से जोड़ दें। उन्होंने कहा कि अगर एक ईसाई व्यक्ति कोई अपराध करता है तो यह सही नहीं है कि हम ईसाइयों और ईसाई धर्म को इसके लिए ज़िम्मेदार मानें।

 

लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन के महासचिव ने इस्लाम व मुसलमानों के बारे में फ़्रान्स के राष्ट्रपति एमानोएल मैक्रां के हालिया बयानों की आलोचना करते हुए कहा कि इस्लामी आतंकवाद व फ़ाशिज़म की बात सही नहीं है। सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि अमरीका व यूरोप ने अलजीरिया, लीबिया और अफ़ग़ानिस्तान में जो अपराध किए हैं उन्हें किसी भी मुसलमान ने ईसाई आतंकवाद नहीं कहा है। उन्होंने मैक्रां समेत पश्चिमी नेताओं को नसीहत की कि एक धर्म के रूप में इस्लाम के सम्मान के लिए इस्लामी आतंकवाद व इस्लामी फ़ाशिज़म जैसे शब्दों के इस्तेमाल से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि फ़्रान्स के अधिकारियों को परिणामों पर काम करने के बजाए इस संकट के कारणों को खोजना चाहिए और दुनिया भर के मुसलमानों को विश्वास दिलाना चाहिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रा के समर्थन के बारे में उनका दावा एक मज़बूत दावा है।

 

लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन के महासचिव ने इस बात की तरफ़ इशारा करते हुए कि जिन लोगों ने होलोकाॅस्ट के बारे में बात की उन्हें जेलों में डाल दिया गया, कहा कि फ़्रान्स और यूरोप में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पूरी तरह से खुली हुई नहीं है बल्कि वे राजनैतिक व सुरक्षा के बंधनों में जकड़ी हुई है। हसन नसरुल्लाह ने यह पूछते हुए कि यहूदियों के जनसंहार के बारे में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता क्यों नहीं है? आशा जताई कि पश्चिमी देश अभिव्यक्ति की आज़ादी के अर्थ पर पुनर्विचार करेंगे। उन्होंने कहा कि फ़्रान्सीसी अधिकारियों को आतंकवाद के सामने घुटने टेकने के बजाए समस्याओं का समूल समाधान करना चाहिए। हसन नसरुल्लाह ने कहा कि दुनिया का कोई भी मुसलमान अपने पैग़म्बर का अनादार बर्दाश्त नहीं करेगा कहा कि जैसा कि मिस्र की अलअज़हर यूनिवर्सिटी के चांसलर ने प्रस्ताव दिया है, पैग़म्बरों व पवित्र धार्मिक हस्तियों के अनादर को विश्व स्तपर पर अपराध माना जाए। (HN)

 

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