Nov २५, २०२० १४:५६ Asia/Kolkata
  • सीरिया पर इस्राईल के हमले में तेज़ी की अस्ल वजह?

मंगलवार की रात सीरिया के क़ुनैतरा व दमिश्क़ के कुछ दक्षिणी इलाक़ों पर इस्राईल ने हवाई हमला किया। पिछले हफ़्ते भी ज़ायोनी शासन ने कई बार सीरिया के कुछ इलाक़ों पर हमले किए थे। इस बीच सीरिया के कुछ सरकार विरोधी सूत्रों ने झूठा दावा करते हुए कहा है कि अलबूकमाल में ईरान के कुछ ठिकानों पर इस्राईल ने हमले किए हैं। इस दावे की किसी भी विश्वस्त सूत्र ने पुष्टि नहीं की है।

सीरिया पर ज़ायोनी शासन के हमले दोबारा शुरू करने और उनमें तेज़ी लाने के लिए इस्राईल के पास वही पुराना और घिसा-पिटा बहाना है कि वह ईरान को सीरिया से दूर करना चाहता है। ज़ाहिर सी बात है कि सीरिया पर इस तरह के अंधाधुंध हमलों का फ़ायदा सिर्फ़ और सिर्फ़ ज़ायोनी शासन को हो रहा है और वह अपने विचार में ईरान को क्षेत्र के लिए ख़तरा दर्शाने की कोशिश कर रहा है। ज़मीनी वास्तविकता यह है कि इस्राईल के इस तरह के अधिकतर हमलों को बिना किसी विशेष परिणाम के विफल बना दिया जाता है। इस्राईल ने लगभग एक साल पहले एक झूठा और पूरी तरह से निराधार दावा करते हुए कहा था कि उसने ईरान के ठिकानों पर 200 हवाई और मीज़ाइली हमले किए हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि पिछले 9 साल में सीरिया में इस्राईल के हमलों में कुछ 8 ईरानी शहीद हुए हैं। इसी के साथ यह घोषणा भी की गई है कि इस्राईल के हर हमले के बाद उससे बढ़ कर जवाबी हमला किया गया है।

 

ऐसा लगता है कि वर्तमान हालात में सीरिया पर इस्राईल के हमलों का दोबारा शुरू होना और उनमें वृद्धि का लक्ष्य यह है कि ज़ायोनी शासन, सीरिया के ख़िलाफ़ अमरीका द्वारा लागू किए गए प्रतिबंधों को प्रभावी बनाने में अपनी अधिकतम भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है जबकि सच्चाई यह है कि ट्रम्प की सत्ता को दो महीने से भी कम का समय बचा है और स्पष्ट नहीं है कि सीरिया के ख़िलाफ़ इस अमानवीय क़ानून का भविष्य क्या होगा?

 

इसी तरह यह भी महसूस होता है कि सीरिया पर इस्राईल के इन हमलों और इस अवैध शासन से संबंध स्थापित करने की कुछ अरब देशों की कोशिशों के बीच सीधा संबंध है। इस्राईल के कुछ वरिष्ठ अधिकारी, कुछ ही दिन पहले इमारात में थे और इसी तरह इस्राईली मीडिया ने यह ख़बर भी लीक की है कि ज़ायोनी प्रधानमंत्री नेतनयाहू ने सऊदी अरब की यात्रा करके इस देश के युवराज मुहम्मद बिन सलमान से मुलाक़ात की है। यह समाचार भी समाने आ रहा है कि नेतनयाहू अगले हफ़्ते बहरैन का दौरा करने वाले हैं। इसी तरह की कुछ और रिपोर्टें भी हैं जिन पर ग़ौर करने से पता चलता है कि सीरिया पर फिर से हमले शुरू करके नेतनयाहू प्रतिरोध के मोर्चे के सामने अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना चाहते हैं।

 

बहरहाल ज़मीनी सच्चाई यह है कि नेतनयाहू, इस्राईल के अंदर अपने ख़िलाफ़ तैयार हो रहे माहौल से बहुत अधिक चिंतित हैं और किसी भी तरह से अपनी कुर्सी सुरक्षित रखना चाहते हैं और साथ ही भ्रष्ट्राचार के केसों से भी अपने को बचाना चाहते हैं। नेतनयाहू अब तक अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के सहारे सीरिया पर हमले कर रहे थे और क्षेत्र में भी अपनी विस्तारवादी नीतियों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे, अब ट्रम्प वाइट हाउस से अपना बोरिया बिस्तर समेट रहे हैं, इस लिए आने वाला समय ही बताएगा कि नेतनयाहू का ऊंट किर करवट बैठेगा? (HN)

 

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