Nov २६, २०२० १३:२० Asia/Kolkata
  • इस्राईल से दोस्ती अपना रंग दिखाने लगी, यूएई ने 13 मुस्लिम देशों के लिए वीज़े पर लगाया प्रतिबंध!

संयुक्त अरब इमारात ने पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और अन्य कई मुस्लिम देशों के नागरिकों के लिए नया वीज़ा जारी करने पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है।  वहीं इस्राईल के नागरिकों को जमकर स्वागत किया जा रहा है।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, संयुक्त अरब इमारात ने 13 मुस्लिम देशों के नागरिकों के लिए नए वीज़े पर लगाए प्रतिबंध का कारण सुरक्षा लेकर बताया है। हालांकि ये नहीं बताया गया है कि किस तरह की सुरक्षा चिंता है। पिछले हफ़्ते पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी इसकी पुष्टि की थी कि यूएई ने पाकिस्तानियों के लिए वीज़ा पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने इसे कोरोना वायरस से जोड़ा था लेकिन बाद में पाकिस्तान में सवाल उठने लगा कि पाकिस्तान की तुलना में भारत कोरोना की चपेट में ज़्यादा है लेकिन भारत के नागरिकों के लिए इस तरह की रोक यूएई ने नहीं लगाई है। पाकिस्तान ने कहा था कि यूएई की तरफ़ से इसे लेकर कोई ठोस कारण नहीं बताया गया है।

संयुक्त अरब इमारात की तरफ़ से जारी दस्तावेज़ों के अनुसार 13 देशों के नागरिकों को नया वीज़ा देने पर यूएई ने अस्थायी रूप से रोक लगाई है। इनमें पाकिस्तान के अलावा तुर्की, ईरान, सीरिया और सोमालिया भी हैं। इससे जुड़े दस्तावेज़ को यूएई की सरकारी बिज़नेस पार्क ने जारी किया था, जो 18 नवंबर से लागू हो गया है। दस्तावेज़ में कहा गया है कि नई नौकरी के लिए आवेदन और वीज़ा 13 देशों के नागरिकों के लिए निलंबित कर दिया गया है। जिन देशों के नागरिकों यूएई का नया वीज़ा अभी नहीं मिलेगा, वे देश, लीबिया, यमन, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, तुर्की, ईरान, इराक़, कीनिया, सोमालिया, इराक़, लेबनान और ट्यूनीशिया हैं। हाल के दिनों में पाकिस्तान और यूएई के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से ख़राब हुए हैं और भारत के साथ अच्छे हुए हैं। पाकिस्तान चाहता था कि यूएई कश्मीर के मुद्दे पर भारत के ख़िलाफ़ उसका समर्थन करे। लेकिन सऊदी और यूएई दोनों ने ऐसा नहीं किया था। इसकी प्रतिक्रिया में पाकिस्तान तुर्की और मलेशिया के क़रीब गया। लेकिन तुर्की और मलेशिया से यूएई और सऊदी दोनों के रिश्ते ठीक नहीं हैं। यूएई में पाकिस्तान के लाखों के लोग काम करते हैं और इस फ़ैसले से लोग बुरी तरह से प्रभावित होंगे।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में संयुक्त अरब इमारात ने फ़िलिस्तीनी राष्ट्र को अन्देखा करते हुए अवैध ज़ायोनी शासन को मान्यता दी थी और सामान्य राजनयिक रिश्ते बहाल कर लिए थे। यूएई के अलावा इस्राईस से संबंध सामान्य करने वाले देशों में बहरैन और सूडान भी शामिल हैं। जबकि सऊदी अरब ने अभी आधिकारिक रूप से इसकी घोषणा नहीं की है। माना जा रहा है कि आले सऊद शासन भी जल्दी ही इस्राईल के साथ अपने गुपचुप संबंधों को आधिकारिक रूस से ज़ाहिर कर देगा। इस बीच यूएई की तरफ़ से मुस्लिम देशों के नागरिकों के लिए नए वीज़ा पर लगाए गए प्रतिबंधों के बारे में टीकाकारों का मानना है कि यह इस्राईल से दोस्ती का असर है। टीकाकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस इस दोस्ती के कई और असर देखने को मिलेंगे, जिसके लिए मुस्लिम देशों को तैयार रहना चाहिए। (RZ)

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