Nov २६, २०२० २१:४१ Asia/Kolkata
  • ईरान पर हमले की तैयारी पूरी, इस्राईली सेना अलर्ट, ईरान का तबाही फैलाने वाला संदेश कैसे पहुंचा अमरीका व इस्राईल तक? सऊदी अरब का क्या होगा अजांम?  रायुलयौम का धमाकेदार जायज़ा

लंदन से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र रायुलयौम के मुख्य संपादक और अरब जगत के प्रसिद्ध पत्रकार अब्दुलबारी अतवान ने मौजूदा हालात का डराने वाला जायज़ा पेश किया है।

 अमरीका के हारे हुए राष्ट्रपति ट्रम्प संदेहस्पद  रूप से चुप हैं और हिज़्बुल्लाह और ईरान से बेहद निकट सूत्रों ने बताया है कि ईरान में परमाणु प्रतिष्ठानों सहित महत्वपूर्ण स्थलों पर इस्राईल के संभावित हमले की आशंका में हाई अलर्ट है।

     पिछले कुछ दिनों में तीन ऐसी घटनाएं घटी हैं जिनसे इस संभावना को बल मिलता है।

     पहली घटना तो यह है कि इस्राईल की " इल्लाह" वेबसाइट ने बताया है कि सेना के कमांडरों को आदेश दिया गया है कि वह नयी स्थिति के लिए पूरी तरह से तैयार रहें जो इस बात का इशारा है कि ईरान पर बहुत जल्द हमले की योजना तैयार की जा रही है।

      दूसरी घटनाः अमरीका ने B-52 बमवर्षक विमान इलाक़े में भेजे हैं जो ऐसे बमों से लैस हैं जो भूमिगत ठिकानों को तबाह करते हैं और पहाड़ों में बनाए गये परमाणु प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की क्षमता रखता है जैसा कि कुम नगर के निकट ईरान का फोर्दो परमाणु प्रतिष्ठान है।

     तीसरी घटनाः लाल सागर के तट पर सऊदी अरब के आधुनिक नगर न्यूम में अमरीकी विदेशमंत्री माइक पोम्पियो, इस्राईली प्रधानमंत्री नेतेन्याहू और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस बिन सलमान ने खुफिया भेंट की है। कहते हैं कि इसी भेंट में ईरान के खिलाफ योजना को लागू करने पर सहमति बनी है ताकि ईरान के साथ परमाणु समझौते में अमरीका की वापसी के लिए बाइडन की कोशिश का पहले से ही रास्ता बंद कर दिया जाए क्योंकि इस तिकड़ी को पता चला है कि जो बाइडन की टीम के वरिष्ठ लोगों और ईरान के प्रतिनिधों में बात चीत भी हो गयी है।

 

     जार्ज बुश के काल में अमरीका के उप राष्ट्रपति डिक चिनी ने सन 2007 में बाराक ओबामा की जीत के एलान के बाद वाइट हाउस से जाने से कुछ दिन पहले कहा था कि अमरीका, अपने हितों के लिए सब से बड़े खतरे ईरान पर कभी हमला नहीं करेगा लेकिन इसके साथ ही उन्होंने ईरान और उसके परमाणु प्रतिष्ठानों पर इस्राईल के हमले की संभावना को नहीं नकारा था। इस तरह से अगर इस्राईल हमला करता है और ईरान उसका जवाब देता है तो वह इस्राईल का साथ देगा और हिज़्बुल्लाह से बेहद करीब एक सूत्र ने इस संभावना को खारिज नहीं किया है।

     सऊदी अरब के न्यूम की बैठक में शामिल होने वाले तीनों पक्ष, अर्थात, नेतेन्याहू , बिन सलमान और पोम्पियो, संकटमय समय से गुज़र रहे हैं इस लिए परिस्थितियों को बिगाड़ने और ईरान को झुकाने में नाकामी  पर पर्दा डालने के लिए युद्ध आरंभ कर सकते हैं।

     नेतेन्याहू को आगे आगे भागने में पहले से ही मशहूर हैं, इस वक्त उन्हें एक नयी अपराधिक जांच का सामना है जिसका आदेश उनके प्रतिस्पर्धी गेन्ट्स ने दिया है जो रक्षा मंत्री भी हैं। यह जांच डेढ़ अरब डालर की जर्मन पनडुब्बियों की खरीदारी के मामले के बारे में है। नेतेन्याहू और उनके साथियों पर भारी रिश्वत लेने का आरोप है और इसी तरह कई अन्य मामलों में भी नेतेन्याहू बुरी तरह फंस चुके हैं। सऊदी क्राउन प्रिंस का हाल भी बुरा है। उन्हें यमन के युद्ध  की भारी क़ीमत  अदा करनी पड़ रही है, अमरीका में डेमोक्रेट की सरकार आ रही है तो उनके खिलाफ मानवाधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा उठाएगी, इसी तरह यमन में युद्ध अपराधों पर भी उन्हें कठघरे में खड़ा करेगी।। जहां तक अमरीकी विदेशमंत्री पोम्पियो की बात है तो  वह तो अमरीका के हारे हुए राष्ट्रपति के हरकारे हैं। उन्हें भी मानवाधिकारों के उल्लंघन और जमाल खाशुकजी जैसे मामलों में सहयोग जैसे अपराधों की जांच का सामना करना होगा। वह ट्रम्प की तरफ से हाथ पैर मार रहे हैं और उनकी कोशिश है कि ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ कर ट्रम्प को हीरो बना दें ताकि वह अगले राष्ट्रपति चुनाव में खड़े होने लायक़ रहें।

 

     संक्षेप में हम यह कहेंगे कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस, जैसा कि इस्राईल के समाचार पत्र इस्राईल ह्यूम ने लिखा है, ईरान के खिलाफ इस्राईल के साथ मोर्चा बना रहे हैं जिसे दोनों अपने लिए खतरा समझते हैं। इस लिए यह दोनों ईरान के खिलाफ अमरीकी प्रतिबंधों  को हटाने की हर कोशिश के सामने बाधा पैदा करना चाहते हैं।

     ऐसे हालात में कि जब कफकाज़ और भूमध्य सागर के पूरब में तुर्की भी भूमिका बढ़ रही है और मिस्र धीरे धीरे सऊदी अरब के दूर हो रहा है और ईरान की आलोचना करने से इन्कार कर रहा है तथा इस देश के मीडिया में खुल कर यह मांग की जा रही है कि मिस्र को सऊदी प्रभाव से बाहर निकलना चाहिए, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और शासक बिन सलमान इस निष्कर्ष पर पहुंच गये कि अत्याधुनिक सैन्य साधनों से लैस  ईरान के दुश्मन इस्राईल के साथ संबंध बनाना ही उनके लिए अच्छा विकल्प है जैसा कि युरोप, अमरीका और इस्राईल की रिपोर्टों में भी इसी प्रकार की बातें कही जा रही हैं।

     यह जो उत्तरी यमन के सअदा नगर से मिसाइल फायर किया गया था और जिससे लगभग एक हज़ार किलोमीटर दूर सऊदी अरब के जद्दा नगर में आरामको कंपनी के तेल भंडारों में ऐसी भयानक आग लगी थी कि यमन में सऊदी गठजोड़ के प्रवक्ता को भी इस तबाही को स्वीकार करना पड़ा  क्योंकि  इस तबाही को जद्दा नगर के निवासियों ने भी अपनी आंखों से देखा था, ईरान की ओर से अपने घटकों  की मदद से एक संदेश हो। कुद्स-2 नामक यह मिसाइल बेहद सटीक निशाना लगाता है और उसे राडार पकड़ नहीं पाते। ईरान ने शायद यमन में अपने दोस्तों द्वारा यह संदेश दिया हो कि इस्राईल या अमरीका की ओर से किसी भी प्रकार की कार्यवाही का उत्तर ज़रूर दिया जाएगा और यह मिसाइल, ईरान की जवाबी कार्यवाही का " स्टार्टर" हो सकता है।

     यमन के सअदा नगर के गुफाओं से सऊदी अरब के जद्दा नगर में तबाही मचाने वाले इस मिसाइल का नाम  कुद्स है जो स्वंय एक संदेश लिये हुए है। इस मिसाइल का संदेश है कि उसे फायर करने वाले फिलिस्तीनी मुद्दे से जुड़े हैं जिससे देश एक एक करके दूर हो रहे हैं। इसके साथ ही यह  भी संदेश है कि कुद्स -2 मिसाइल फायर करने वालों ने जिस तरह सऊदी अरब में स्थापित अमरीकी एन्टी मिसाइल सिस्टम पेट्रियाट को चकमा दिया, उसी तरह वह इस्राईल की आयरन डोम एन्टी मिसाइल व्यवस्था को भी नाकाम बनाने की क्षमता रखते हैं और यह भी हमें यकीन है कि उनके पास कुद्स-3 और कुद्स-4 मिसाइल भी होंगे जिसके क्षमता और निवाशलीला का पता अगले युद्ध में चलेगा, हम भी देखेंगे।Q.A.

 लेखक  के विचारों से सहमत होना आवश्यक नहीं।  साभार, रायुल यौम, लंदन

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