Nov २७, २०२० १०:३० Asia/Kolkata
  • हिज़्बुल्लाह और नसरुल्लाह से सीखा कि अवैध क़ब्ज़ा करने वाली सरकार से वार्ता न करूंः 
रिहाई पाने वाला फ़िलिस्तीनी नागरिक

इस्राईल की जेल से गुरुवार को रिहा होने वाले एक फ़िलिस्तीनी नागरिक ने कहा है कि उन्होंने लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन और उसके महासचिव से सीखा कि अपना हक़ नहीं छोड़ना चाहिए और अपनी आज़ादी के लिए अवैध क़ब्ज़ा करने वाली सरकार से वार्ता नहीं करनी चाहिए।

माहिर अलअख़रस ने जो गुरुवार को ज़ायोनी शासन की जेल से रिहा हुए हैं, कहा कि उन्होंने हिज़्बुल्लाह से सीखा कि किस तरह अपने अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए। उन्होंने इसी तरह कहा कि उन्होंने लेबनानी प्रतिरोध और हिज़्बुल्लाह के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह से सीखा कि अपनी आज़ादी और रिहाई के लिए किसी भी स्थिति में इस्राईल की अवैध सरकार से वार्ता नहीं करनी चाहिए।

 

104 दिनों की भूख हड़ताल के बाद इस्राईल की जेल से रिहा होने वाले माहिर अलअख़रस ने कहा कि हम अंतिम विजय तक, अवैध क़ब्ज़ा करने वाली ज़ायोनी सरकार के मुक़ाबले में डटे रहेंगे। उन्होंने कहा कि फ़िलिस्तीन, वार्ता के माध्यम से आज़ाद नहीं होगा क्योंकि वार्ता का मतलब है हीनता और उम्मीद है कि फ़िलिस्तीनी प्रशासन ओसलो समझौते से पीछे हट जाएगा।

 

अलअख़रस ने कहा कि ज़ायोनी शासन का लक्ष्य यह है कि फ़िलिस्तीनी आपस में भिड़ जाएं लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे और विजय मिलने तक डटे रहेंगे। इस्राईली जेल से रिहा होने वाले इस फ़िलिस्तीनी नागरिक ने कहा कि उनकी भूख हड़ताल फ़िलिस्तीनी जनता के नाम है और मैं अपनी जीत को फ़िलिस्तीन के लोगों को समर्पित करता हूं। (HN)

 

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