Nov २८, २०२० १७:५७ Asia/Kolkata
  • क्या ईरान अपने वैज्ञानिक की हत्या का बदला लेने के लिए इस्राईल पर मिसाइल से हमला करेगा? इस्राईली मीडिया की यह रिपोर्ट पढ़ें

लंदन से प्रकाशित होने वाले समाचारपत्र रायुलयौम ने ईरान के वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिक की हत्या पर इस्राईली मीडिया के रुख का जायज़ा लिया है।

इस्राईली मीडिया, ईरान के वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिक प्रोफेसर मोहसिन फख्रीज़ादे की हत्या की खबरों से भरा हुआ है लेकिन इस्राईल इस हत्याकांड की ज़िम्मेदारी स्वीकार नहीं कर रहा है। इन हालात में आम तौर पर वह जैसा करता है उसी तरह उसने सरकारी हितों  की रक्षा करने वाले संचार माध्यमों ने विदेशी सूत्रों के हवाले से इस बारे में रिपोर्ट दी है और विश्लेषण प्रकाशित किये जा रहे हैं जिसमें सब के सब इस हमले और हमले का निशाना बनने वाले ईरानी वैज्ञानिक के महत्व पर बल दे रहे हैं लेकिन हारित्ज़ के टीकाकार, यूसी मीलमान का कहा है कि फख्रीज़ादे की हत्या से ईरान का परमाणु कार्यक्रम रुकने वाला नहीं है क्योंकि ईरान के पास अपने हर परमाणु वैज्ञानिक का एक विकल्प मौजूद है।

     मीलमान, इस्राईल की सुरक्षा एजेन्सियों से जुड़े हैं और मोसाद से उनका विशेष प्रकार से संबंध है। मीलमान का कहना है कि फख्रीज़ादे की मौत से ईरान के परमाणु विज्ञान में कोई कमी नहीं पैदा होगी क्योंकि ईरान के पास परमाणु क्षेत्र में बहुत अधिक जानकारी है जिसकी मदद से वह परमाणु बम भी बना सकता है लेकिन फख्रीज़ादे की हत्या ईरान के लिए एक मानसिक अघात है।

     इसी मध्य इस्राईल के चैनल-12 के रिपोर्टर ने टार्गेट किलिंग का इतिहास पेश किया और बताया है कि हालिया वर्षों में ईरान के 10 परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या की जा चुकी है और फख्रीज़ादे की हत्या कई बरसों से जारी अभियान का परिणाम है लेकिन उन्हें भी पुराने तरीक़े से ही मारा गया, मोटरसाइकिल पर सवार हमलावरों द्वारा।

 

     इस्राईली टीवी के रिपोर्टर डीफोरी ने बताया है कि तेल अबीव ने हत्या की ज़िम्मेदारी नहीं ली है लेकिन एसा लगता है कि अमरीका के विदेशमंत्री माइक पोम्पियो और इस्राईली अधिकारियों की हालिया भेंट के दौरान संभावित रूप से इस हमले की भूमिका तैयार की गयी हो और जिन लोगों ने यह हमला अंजाम दिया है उन्हें फख्रीज़ादे की गतिविधियों का पता था और उन्होंने बहुत देर तक इंतेज़ार किया यहां तक  कि फख्रीज़ादे हमले की जगह पर पहुंच गये।

     इस्राईली रिपोर्टर ने डीफोरी ने इसी तरह बताया है कि फख्रीज़ादे को भी यह बहुत अच्छी तरह से मालूम था कि  विदेशी खुफिया एजेन्सियां उन पर हमले की योजना रखती हैं इसी लिए वह अपनी यात्राओं को खुफिया रखते थे और बहुत सतर्कता करते थे मगर फिर भी वह जाल में फंस गये और डीफोरी के शब्दों  में  ईरान के परमाणु बम के गॉड फादर की हत्या कर दी गयी।

     ईरान के परमाणु वैज्ञानिक की हत्या पर इस्राईल में जारी खुशी के सिलसिले में इस्राईली वेबसाइट " वाल्ला" ने बताया है कि इस्राईल ने हालिया दिनों में अमरीका के नव निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन को कई संदेश भेजे और यह कहा कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए वह अपनी योजना को लागू करेगा और उसके लिए यह महत्वपूर्ण नहीं है कि अमरीका में कौन राष्ट्रपति बनता है।

     इस्राईली वेबसाइट वाल्ला ने लिखा है कि  फख्रीज़ादे की हत्या, जनरल सुलैमानी की हत्या के लगभग एक साल बाद हुई है जिसके बाद ईरान और अमरीका में सैन्य टकराव की हद तक तनाव बढ़ गया था लेकिन अब जो कुछ मध्यपूर्व में हो रहा है कि उससे ईरान के साथ समझौता करने की अमरीका के नये राष्ट्रपति का कार्यक्रम, अंसभव नहीं तो कठिन ज़रूर हो जाएगा।

     इसी संदर्भ में वाल्ला वेबसाइट पर सैन्य मामलों के इस्राईली टीकाकार एमीर बुहबूत ने कहा है कि ईरान  इस कार्यवाही से जाल में फंस गया है लेकिन इस बात की बहुत संभावना है कि वह अपने " एजेन्टों" द्वारा इसका बदला ले। इस इस्राईली टीकाकार ने लिखा है कि इस्राईल के सुरक्षा अधिकारियों ने इस घटना पर चुप्पी साध रखी है लेकिन कुछ हफ्ते पहले इस्राईली वायु सेना ने ऐसा युद्धाभ्यास किया है जिसमें ईरान के प्रभाव वाले इलाकों अर्थात, इराक, लेबनान और सीरिया से इस्राईल पर मिसाइल हमले को रोकने का अभ्यास किया गया।

      इस्राईली मीडिया, न्यूयार्क टाइम्ज़ की उस रिपोर्ट का भी हवाला दे रहा है जिसमें कहा गया है कि ईरानी परमाणु वैज्ञानिक फख्रीज़ादे की हत्या के पीछे इस्राईल का हाथ है। न्यूयार्क टाइम्ज़ ने यह भी लिखा है कि वाइट हाउस ने फख्रीज़ादे की हत्या पर टिप्पणी करने से इन्कार किया है इसी तरह पेंटागोन ने भी इस हत्या पर कुछ बोलने से इन्कार किया है।

     इस्राईल के मआरियो समाचार पत्र ने भी फख्रीज़ादे की हत्या के जश्न में भाग लेते हुए लिखा है कि यह हत्या, बैतुलमुक़द्दस में इस्राईल और बहरैन के विदेशमंत्री की भेंट के एक हफ्ते बाद हुई है जिसके दौरान इलाक़े में ईरान के बढ़ते प्रभाव को रोकने पर चर्चा की गयी थी।

     अंत में यह बताना भी ज़रूरी है कि इस्राईली मीडिया, ईरान के संगठनों में घुसपैठ और ईरानी हस्तियों पर नियंत्रण की बात नहीं कर रहा है बल्कि वह हत्या की शैली और मोसाद की दक्षता की बात कर रहा है।Q.A.

 साभार, रायुलयौम, लंदन।  

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