Nov ३०, २०२० १६:१९ Asia/Kolkata
  • इमारात ने वीज़ा पर लगाई पाबंदी तो बिफर गई इराक़ी संसद...सरकार से कहा फ़ौरन दो जैसे को तैसा जवाब

संयुक्त इमरात ने कई अरब और इस्लामी देशों के नागरिकों के प्रवेश पर रोक लगा दी है जिनमें इराक़ का नाम भी शामिल है। इस पर इराक़ी संसद में ख़ासा आक्रोश देखने में आ रहा है।

सांसदों ने कहा है कि सरकार इस मामले पर कठोर कार्यवाही करे और इमारात के राजदूत को विदेश मंत्रालय में तलब करके आपत्ति जताए। सांसदों का कहना है कि अगर ज़रूरत पड़े तो इमारात से संबंध पूरी तरह समाप्त कर दिए जाएं।

गत बुधवार को इमारात ने 13 देशों के नागरिकों को वीज़ा जारी किए जाने पर रोक लगा दी जिनमें अधिकतर मुस्लिम और अरब देश हैं।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया में इराक़ के विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम कूटनैतिक चैनल से इस मामले पर बात करेंगे क्योंकि इमारात ने इस बारे में हमें पहले से सूचित नहीं किया था।

इराक़ी संसद में विदेशी मामलों की समिति के सदस्य आमिर अलफ़ायज़ ने कहा कि इमारात वैसे तो यह ज़ाहिर करने की कोशिश कर रहा है कि उसने कोरोना वायरस का प्रसार रोकने के लिए यह फ़ैसला किया है मगर जिन देशों के नागरिकों पर प्रतिबंध लगाया गया है उनमें अधिकतर वह देश हैं जिन्होंने इस्राईल से समझौता करने से इंकार कर दिया है और जो फ़िलिस्तीन का समर्थन करते हैं।

फ़ायज़ ने कहा कि साफ़ नज़र आ रहा है कि यह फ़ैसला इस्राईल के साथ शांति समझौते के विषय से जुड़ा हुआ है इसलिए हम अपनी सरकार से मांग करते हैं कि इस फ़ैसले को ख़ारिज करे क्योंकि यह इराकियों का अपमान है।

इराक़ में स्टेट आफ़ ला नामक पार्टी के सांसद मंसूर बईजी ने कहा कि इमारात का फ़ैसला इराक़ी संप्रभुता पर हमला है इराक़ी सरकार इस पर ख़ामोश न बैठे बल्कि इमारात से सारे संबंध तोड़ ले।

अलफ़त्ह एलायंस के सांसद करीम अलयवी ने कहा कि सरकार को चाहिए कि इमरात के इस फ़ैसले के बारे में बहुत ठोस कार्यवाही करे।

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