Dec ०१, २०२० १४:२४ Asia/Kolkata
  • फिर होने जा रही है खतरनाक मीटिंग, क्या ईरान पर हमले का किया जाएगा फैसला? बेहद खतरनाक स्थिति, रायुलयौम का चिंता बढ़ाने वाला लेख

लंदन से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र रायुल यौम ने अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प के दामाद कुशनर की आगामी यात्रा का जायज़ा लिया है, कुछ बातें चौंकाने वाली हैं।

अमरीका में हालिया राष्ट्रपति चुनाव में जो बाइडन की जीत और ट्रम्प की हार की एक बड़ी उपलब्धि यह है कि हम अब कम से कम अगले 4 वर्षों तक जेयर्ड कुशनर की शक्ल देखने पर मजबूर नहीं होंगे। नेतेन्याहू के शिष्य, इस्राईल से अरब देशों के संबंध सामान्य बनाने बनाने की रेल के ड्राइवर और अरबों को दुहने वाले ट्रम्प के दामाद कुशनर गुम हो जांएगे भले ही उनकी जगह पर कोई और आ जाए।

 

    अरब जगत और मध्य पूर्व में  ज़ायोनियों के अपराधों और युद्धों का सब से अधिक समर्थन करने वाले और मुसलमानों और अरबों  से दुश्मनी में मशहूर ट्रम्प के यह दामाद सऊदी अरब और क़तर की यात्रा करने वाले हैं । इस यात्रा का बहाना, सऊदी अरब और क़तर के संबंधों को बहाल करने की कोशिश है।

   हमें बिल्कुल ही यक़ीन नहीं है कि ट्रम्प का यह दामाद अपनी अंतिम यात्रा में अरबों के फायदे का कोई काम कर सकता है क्योंकि कुशनर का अस्ल मक़सद, इस्राईल को एकांत से निकालना, अरब राष्ट्रों में उसके नेतृत्व को मज़बूत करना, फिलिस्तीनी मुद्दे को खत्म करना, फिलिस्तीनियों के लिए घृणा बढ़ाना और जहां तक संभव हो अरब देशों को इस्राईल के साथ संबंध बनाने पर तैयार करना है। अरबों से बेहद घृणा करने वाले दो लोगों की उनके प्रतिनिधिमंडल में उपस्थिति इस बात का प्रमाण है।

 

    यह जो ईरान के परमाणु वैज्ञानिक मोहसिन फख्रीज़ादे की मोसाद के एजेन्टों के हाथों हत्या के एक हफ्ते बाद यह यात्रा हो रही है तो वह इस लिए है क्योंकि इसका मक़सद, अरब देशों के साथ इस्राईल के गठबंधन को फैलाना  तथा ईरान और प्रतिरोध मोर्चे के सदस्यों  के खिलाफ युद्ध और आतंकवादी कार्यवाहियों के लिए उन्हें जमा करना है। कुशनर इस यात्रा में इस्राईल के जिस बड़े मक़सद को पूरा करना चाहते हैं वह, बाइडन के सत्ता में पहुंचने से पहले ईरान और उसके परमाणु प्रतिष्ठानों को तबाह करना है।

    वॉल स्ट्रीट जरनल सहित जितने भी अमरीकी समाचारपत्रों ने  कुशनर और उनके साथियों की इस यात्रा का उद्देश्य, सऊदी अरब और क़तर के बीच सुलह की कोशिश बताया है उन सब ने खुला हुआ झूठ बोला है ताकि इस यात्रा के मुख्य उद्देश्य को छुपाया जा सके जो वास्तव में अगले कुछ ही हफ्तों में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्यवाही है। उसकी कुछ वजहें हैः

  • कुश्नर और उनके ससुर 4 सालों से वाइट हाउस में मौजूद हैं तो अब तक उन्होंने क़तर और सऊदी अरब में मेल कराने की कोशिश क्यों नहीं की? वाइट हाउस से निकलने से मात्र 6 हफ्ते पहले यह काम कैसे याद आ गया?
  •  अगर इस यात्रा का मक़सद मेल करना ही है तो फिर सऊदी अरब के साथ ही साथ कतर से दूर होने वाले तीन अन्य देशों यानि मिस्र, यूएई और बहरैन की यात्रा भी क्यों नहीं की जा रही है ?
  • क़तर के खिलाफ मोर्चे में मौजूद तीन देशों को छोड़ कर सिर्फ सऊदी अरब और क़तर के बीच मेल कराने की कोशिश का मतलब क़तर के खिलाफ बनने वाले चार देशों के इस मोर्चे में फूट डालना है या फिर यह हो कि कुशनर को यह पता चला हो कि सऊदी अरब यूएई, मिस्र और शायद बहरैन से गठबंधन तोड़ कर क़तर और तुर्की के मोर्चे में जाना चाह रहा है या यह कि वह खुद ही सऊदी अरब को उस तरफ ढकेलना चाह रहे हों लेकिन इस की संभावना है ही नहीं।
  • आजकल मध्य पूर्व और गल्फ के इलाक़े में जो मुख्य मुद्दा है वह सऊदी अरब और क़तर में मेल कराना नहीं बल्कि, ईरान के खिलाफ इस्राईल का अतिक्रमण और ईरान की ओर से उसके जवाब की संभावना और उसके परिणाम में पैदा होने वाले तनाव है जो विश्व युद्ध की फलीता सुलगा सकता है इस लिए ऐस समय में जब अमरीका का विमान वाहक युद्धपोत इलाक़े की तरफ बढ़ रहा हो और B-52 विमान इलाक़े में पहुंच चुके हों, सऊदी अरब और कतर में मन मुटाव दूर करने की कोशिश की बात करना भी मूर्खता है।
  • यह भी हो सकता है कि कुशनर ने सऊदी अरब और क़तर की ही यात्रा  इस लिए करने का फैसला किया हो क्योंकि इन्ही दोनों देशों में अमरीका की सब से बड़ी छावनियां हैं। हो सकता है यह यात्रा इन छावनियों से ईरान के खिलाफ कार्यवाही के बारे में जानकारी देने के लिए की जा रही हो।

फिलहाल तो सऊदी अरब के न्यूम नगर में बिन सलमान और कुशनर के बीच होने वाली आगामी भेंट पर नज़र गाड़ देने की ज़रूरत है। क्या यह भेंट, कुश्नर और बिन सलमान तथा उनके प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों तक ही सीमित रहेगी? या फिर इस्राईली प्रधानमंत्री नेतेन्याहू और मोसाद के प्रमुख यूसी कोहन भी शामिल होंगे जैसा कि इसी जगह माइक पोम्पियो के साथ होने वाली खतरनाक भेंट में दोनों उपस्थित थे? इस मीटिंग के बारे में कहा जाता है कि इसी में ईरान के परमाणु वैज्ञानिक की हत्या और ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले की योजना बनायी गयी ताकि ईरान जवाबी कार्यवाही करे जिसके बाद वह तबाही के उनके जाल में फंस जाए।

शहीद फख्रीज़ादे

 

    संक्षेप में यह कि कुश्नर अपने भविष्य संवारने और इस्राईल के साथ अरबों के संबंध सुधारने के अभियान का इनाम लेने इस इलाके में आये हैं और इसके अलावा जो भी कहा जा रहा है वह ज़मीनी सच्चाई के विपरीत है और फिर यह भी है कि सऊदी अरब और क़तर के शासक, 6 हफ्ते बाद सत्ता से हटने वाले नाकाम अमरीकी राष्ट्रपति के दामाद के दबाव में क्यों आएंगे? जबकि यह लोग कुवैत के दिवंगत नरेश के सामने नहीं नहीं झुके हालांकि उन्होंने इस विवाद को खत्म करने के लिए निंरतरता से तीन बरसों तक मेहनत की और कहा जाता है कि इस विवाद की जटिलता भी उनकी बीमारी की एक वजह थी जो उनकी मौत का कारण बनी।

    कुशनर और उनकी सेंचुरी डील और इस्राईल के फायदे के लिए उन्होंने अरबों से इस्राईल के संबंध बनाने की जो योजना तैयार की है वह अस्ल में परशियन गल्फ के उनके  घटकों के गले का खतरनाक फंदा है जिसका असर अगले कुछ महीनों और बरसों में सामने आना शुरु हो जाएगा। Q.A.  साभार, रायुलय यौम

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