Dec ०१, २०२० २२:४८ Asia/Kolkata
  • इस्राईल ने शहीद फ़ख़्रीज़ादे की हत्या में अपना हाथ होने की बात मान ली!

शहीद फ़ख़्रीज़ादे की हत्या के नतीजों के मद्देनज़र इस्राईल की ओर से उनकी हत्या में अपना हाथ होने की बात मानने से तेल अवीव के बेलगाम होने का ही पता चलता है।

पूरे संसार यहां तक कि इस्राईल के पश्चिमी व क्षेत्रीय घटकों तक की ओर से ईरान के वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिक शहीद डाॅक्टर मोहसिन फ़ख़्रीज़ादे की हत्या की निंदा किए जाने के बावजूद एक ज़ायोनी अधिकारी ने इस आतंकी कार्यवाही में इस्राईल का हाथ होने की बात स्वीकार कर ली है। अलमयादीन टीवी चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक़ इस्राईल के एक गुप्तचर अधिकारी ने अमरीकी समाचारपत्र न्यूयाॅर्क टाइम्स से कहा है कि दुनिया को फ़ख़्रीज़ादे की हत्या के लिए तेल अवीव का शुक्रिया अदा करना चाहिए और अगर ज़रूरत पड़ी तो इस्राईल ईरान के परमाणु कार्यक्रम के ख़िलाफ़ और अधिक कार्यवाहियां करेगा।

 

न्यूयाॅर्क टाइम्स ने इसी तरह अमरीका के एक पूर्व गुप्तचर अधिकारी ब्रूस रीडल के हवाले से बताया है कि इस्राईल ने आज़रबाइजान जैसे ईरान के पड़ोसी देशों के साथ अपने मज़बूत संबंधों को ईरान पर नज़र रखने और भाड़े के टट्टू ख़रीदने के लिए इस्तेमाल किया है। अलजज़ीरा ने भी रिपोर्ट दी है कि अमरीका के पूर्व सेनाध्यक्ष माइक मूलन ने एमबीसी टीवी चैनल से बात करते हुए शहीद फ़ख़्रीज़ादे की हत्या में इस्राईल की भूमिका को स्वीकार किया है और कहा है कि इस हत्या के बाद इलाक़े में तनाव बढ़ जाएगा।

 

इस्राईल के आर्मी चीफ़ आवयो कोख़ावी ने सीरिया से मिलने वाली ज़ायोनी शासन की सीमा के निरीक्षण के दौरान ज़ायोनी सैनिकों से कहा है कि हमारी ज़िम्मेदारी स्पष्ट है। हम पूरी शक्ति के साथ सीरिया में ईरानी बलों की तैनाती और उन्हें सीरिया में निशाना बनाने की कोशिश करते रहेंगे। ज़ायोनी शासन की ओर से शहीद फ़ख़्रीज़ादे की हत्या के अपराध को मानने और भविष्य में भी इस तरह की कार्यवाहियां करने का इरादा ऐसी स्थिति में है कि संयुक्त राष्ट्र संघ और ज़ायोनी शासन के घटकों तक ने इस आतंकी कार्यवाही की निंदा की है। यहां तक कि संयुक्त अरब इमारात ने भी जो ज़ायोनी शासन के साथ संबंध स्थापित करने में सबसे आगे रहा है, शहीद डाॅक्टर मोहसिन फ़ख़्रीज़ादे की हत्या को शर्मनाक अपराध बताया है और उसकी निंदा की है।

 

इस बीच ज़ायोनी मीडिया ने बताया है कि इस्राईल की सुरक्षा एजेंसियां ईरान के संभावित जवाब से बहुत अधिक डरी हुई हैं और उन्हें बहरैन व इमारात की यात्रा करने वाले इस्राईलियों को निशाना बनाए जाने की तरफ़ से गहरी चिंता है। समाचारपत्र यदीऊत अहारनूत ने इस संबंध में रिपोर्ट दी है कि अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन के 50 हज़ार से ज़्यादा लोगों ने दुबई में "हनूका" नामक पर्व मनाने के लिए इमारात का वीज़ा ले रखा है लेकिन उनमें से बहुत से लोगों ने इस यात्रा के ख़तरों के बारे में टूरिस्ट कंपनियों से चिंता जताई है। पत्र के अनुसार इस्राईल से इमारात की यात्रा रोक दिए जाने की संभावना बहुत अधिक हो गई है।

 

एक ओर इस्राईली अधिकारियों ने शहीद फ़ख़्रीज़ादे की हत्या में ज़ायोनी शासन का हाथ होने की बात मान ली है और दूसरी तरफ़ ईरान की संभावित जवाबी कार्यवाही से तेल अवीव में हड़कंप मचा हुआ है। क्या ये बातें ज़ायोनी शासन के अधिकारियों के पगलाहट भरे रवैये को नहीं दर्शाती हैं? क्या अब समय नहीं आ गया है कि दुनिया इस बेलगाम सरकार के बारे में गंभीरता से कुछ सोचे? बहरहाल वर्तमान समय में इस्राईल के इस बेलगाम रवैये की मुख्य वजह या तो नेतनयाहू सरकार की जर्जर व संकटमयी स्थिति है या फिर इलाक़े और दुनिया में उसके पूरी तरह से टूट जाने से पहले की स्थिति है। (HN)

 

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