Dec ०१, २०२० २३:२२ Asia/Kolkata
  • ईरानी वैज्ञानिक की हत्या के मामले में सऊदी अरब ने भी इस्राईल का साथ छोड़ा!

संयुक्त राष्ट्र संघ में सऊदी अरब के स्थायी प्रतिनिधि अब्दुल्लाह मुअल्लेमी ने अपने एक इंटरव्यू में ईरान के परमाणु वैज्ञानिक शहीद फ़ख़्रीज़ादे की हत्या को इस्लामी जगत का नुक़सान बताया है।

ऐसी हालत में जब फ़ार्स की खाड़ी के इलाक़े के अन्य देशों के विपरीत सऊदी अरब ने ईरानी वैज्ञानिक की हत्या की निंदा में कोई बयान जारी नहीं है, राष्ट्र संघ में सऊदी अरब के दूत ने रूस के आरटी टीवी से बात करते हुए उनकी शहादत को इस्लामी जगत के लिए एक नुक़सान बताया है। इस मामले में सऊदी अरब के अकेल पड़ जाने और आतंकवाद का समर्थन करने में उसका नाम इस्राईल के साथ लिए जाने की वजह से ही शायद अब्दुल्लाह मुअल्लेमी ने ईरानी वैज्ञानिक की हत्या पर इस तरह का बयान दिया है।

 

सऊदी अरब का यह क़दम शायद इस लक्ष्य के अंतर्गत हो कि वह जल्द से जल्द अपने आपको इस्राईली अधिकारियों व मीडिया के हाथों दूषित होने से बचा ले। ईरान के वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिक की हत्या से पहले इस्राईली मीडिया ने ज़ायोनी प्रधानमंत्री नेतनयाहू की सऊदी अरब की यात्रा और बिन सलमान से उनकी बातचीत की रिपोर्टें दी थीं। इस तरह की रिपोर्टें इतनी अधिक संख्या में सामने आईं कि सऊदी विदेश मंत्री की ओर से इस मुलाक़ात के खंडन के बाद भी विश्व जनमत को उनकी बात पर भरोसा नहीं हुआ।

 

जैसे जैसे ट्रम्प के वाइट हाउस से जाने के दिन क़रीब आ रहे हैं, वैसे वैसे सऊदी अधिकारी फ़ैसला करने के संकट में अधिक फंसते चले जा रहे हैं। तुर्की और क़तर से संबंध बेहतर बनाने की सऊदी अरब की कोशिश इसका स्पष्ट उदाहरण है। सऊदी अरब के विदेश मंत्री अपने तुर्क समकक्ष से मिलने के लिए दौड़े चले जाते हैं और सऊदी अधिकारी और संचार माध्यम निरंतर यह कहते हैं कि क़तर के साथ समस्याओं के समाधान के लिए 24 घंटे से भी कम समय की ज़रूरत है, इससे पता चल जाता है कि सऊदी अरब के शासक वर्तमान समय में सही फ़ैसले करने में असहाय हो गए हैं। इस स्थिति में यह बात बहुत अप्रत्याशित नहीं है कि सऊदी अधिकारी ईरान से दुश्मनी कम करने को प्राथमिकता दें।

 

यद्यपि मुअल्लेमी का बयान, ईरान के संबंध में सऊदी अरब के रवैये में परिवर्तन का सकारात्मक चिन्ह हो सकता है लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि तेहरान के साथ रियाज़ के सामान्य संबंधों तक पहुंचने में अब भी अर्थपूर्ण फ़ास्ला है और इस फ़ास्ले को कम करने के लिए पहला क़दम यह है कि सऊदी अरब इस बात की कोशिश करे कि अपने आपको पश्चिमी-इस्राईली-अरबी त्रिकोण से दूर करने की कोशिश करे। (HN)

 

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