Dec ०३, २०२० १८:५४ Asia/Kolkata
  • दूसरों के लिए गड्ढा खोद रहे नेतनयाहू ख़ुद ही उसमें गिर पड़े! इस्राईल में राजनीतिक उथल-पुथल, दो वर्षों में चौथी बार चुनाव!

एक बहुत ही पुरानी कहावत है कि जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है वह ख़ुद ही उसमें गिर जाता है। पश्चिमी एशिया में अमेरिका और यूरोपीय देशों की मदद से जब से अवैध ज़ायोनी शासन अस्तित्व में आया है तब से इस पूरे क्षेत्र में अशांति और असुरक्षा की स्थिति पैदा हो गई है। साथ ही यह अवैध शासन हमेशा अमेरिका की मदद से इस प्रयास में रहता है कि पश्चिमी एशियाई देशों में कभी भी राजनीतिक स्थिरता न होने पाए। लेकिन इधर दो वर्षों से स्वयं इस्राईल में सबसे ज़्यादा राजनीतिक अस्थिरता देखी जा रही है।

इस्राइल में भ्रष्टाचार के आरोपों को सामना कर रहे ज़ायोनी शासन के प्रधानमंत्री बिनयामिल नेतनयाहू की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। बुधवार को इस्राइल के सांसदों ने संसद भंग करने के प्रस्ताव को प्राथमिक वोट के ज़रिये पारित कर दिया। इसके साथ ही अवैध ज़ायोनी शासन, दो साल से भी कम समय में चौथी बार आम चुनाव के क़रीब पहुंच गया है। संसद भंग होने के साथ ही नेतनयाहू की सत्ताधारी लिकुड पार्टी और बेनी गेन्टज़ की ब्लू एंड व्हाइट पार्टी के बीच असंतुलित गठबंधन भी लगभग ख़त्म हो गया है। नेतनयाहू और गेन्टज़ की पार्टी के बीच तीन चुनावों में कांटे की हुई टक्कर के बाद गंठबंधन बना था, लेकिन आख़िकार इस गठबंधन में भी अपना दम तोड़ दिया। इस गठबंधन के टूटने की मुख्य वजह इस्राईली जनता का नेतनयाहू के ख़िलाफ़ बढ़ता आक्रोश बताया जा रहा है। ज़ायोनी शासन की जनता कोरोना महामारी से मुक़ाबले में नाकाम रहे नेतनयाहू और साथ ही उनपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों और उनके झूठे दावों और वादों से बहुत ज़्यादा नाराज़ है। दो महीनों से अधिक समय से तेलअवीव की सड़कों पर नेतनयाहू के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रही इस्राईली जनता का कहना है कि जबतक नेतनयाहू अपने पद से इस्तीफ़ा नहीं दे देते तबतक वह अपने विरोध-प्रदर्शनों को यू हीं जारी रखेगी।

इस बीच ज़ायोनी सेना के पूर्व प्रमुख और इस्राईल के युद्ध मंत्री गेन्टज़ का कहना है कि नेतनयाहू ने प्रस्तावित बजट के समर्थन से इंकार करके यह दर्शा दिया है कि वह स्वयं ज़ायोनी शासन को एक और चुनाव की ओर ढकेल रहे हैं। यही कारण है कि उनकी ब्लू एंड व्हाइट पार्टी ने संसद भंग करने के लिए हुई वोटिंग में उसके समर्थन वोट किया है। उन्होंने कहा कि इस्राईल में दो वर्षों के दौरान चौथी बार होने वाले चुनाव को केवल नेतनयाहू ही रोक सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, इसलिए ज़ायोनी शासन पर चुनाव का पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ के लिए अगर कोई व्यक्ति ज़िम्मेदार है तो वह केवल और केवल नेतनयाहू हैं। याद रहे कि, नेतनयाहू की लिकुड पार्टी और गेन्टज़ की ब्लू एंड व्हाइट पार्टी ने सात महीने पहले कोरोना वायरस संकट के समय राष्ट्रीय एकता दिखाने के लिए आपस में गठबंधन कर सरकार बनाई थी। 36 मंत्रियों व 16 उपमंत्रियों की मौजूदगी के साथ यह ज़ायोनी शासन के इतिहास की सबसे बड़ी सरकार थी।

नेसेट (इस्राइली संसद) भंग करने का प्रस्ताव विपक्ष की तरफ़ से पेश किया गया, जिसको नेतनयाहू सरकार में शामिल ब्लू एंड व्हाइट पार्टी के सांसदों का समर्थन मिलने के कारण 120 सदस्यों वाले सदन में 54 के मुक़ाबले में 61 वोट के साथ पारित हो गया। अब इस प्रस्ताव को ज़ायोनी शासन की विधान समिति के सामने रखा जाएगा, जहां अगले सप्ताह तक इस पर फ़ैसला होने की संभावना है। इस बीच गेन्टज़ और नेतन्याहू के बीच आपसी मतभेदों को सुलझाने के लिए बातचीत जारी रखने की संभावना है। इस प्रस्ताव पर वोटिंग इस्राईल के युद्ध मंत्री का पद संभाल रहे बेनी गेन्टज़ के बयान के एक दिन बाद कराई गई है, जिसमें गेन्टज़ ने कहा था कि उनकी ब्लू एंड व्हाइट पार्टी इस प्रस्ताव के समर्थन में वोट देगी। समझौते के तहत जल्द प्रधानमंत्री पद संभालने के दावेदार गेन्टज़ ने नेतनयाहू पर अपना राजनीतिक हित साधने के लिए लगातार बजट के मुद्दे पर जनता को मूर्ख बनाने का आरोप भी लगाया था। गेन्टज़ ने अपने बयान में कहा है कि उन्होंने चुनाव से बचने का मौका भी नेतनयाहू को दिया है। उन्होंने दोनों पार्टियों के बीच हुए समझौते की शर्तों के मुताबिक़ दो वर्षीय बजट मंज़ूर करने की अपील नेतनयाहू से की है। गेन्टज़ ने कहा, यदि नेतनयाहू 23 दिसंबर तक बजट को मंज़ूरी दे देते हैं तो सबकुछ ठीक हो जाएगा।

इस बीच जानकारों का मानना है कि इस्राईल में जिस तरह दो वर्षों से राजनीतिक उठा-पटक जारी है उसके लिए पूरी तरह नेतनयाहू ज़िम्मेदार हैं। वहीं तेलअवीव की सड़कें दो महीनों से नेतनयाहू के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों की गवाह बनी हुईं हैं। इन सबको देखकर यह कहा जा सकता है कि नेतनयाहू की राजनीतिक यात्रा अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। वह दिन दूर नहीं है कि जब नेतनयाहू इस्राईल के राजनीतिक इतिहास के अतीत बन जाएंगे। साथ ही जानकारों का मानना है कि नेतनयाहू पर जिस तरह के भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं उसको देखते हुए इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि नेतनयाहू जैसे ही प्रधानमंत्री पद से हटेंगे वैसे ही उनका दूसरा ठिकाना जेल होगा। इस बीच टीकाकारों का यह भी कहना है कि नेतनयाहू पश्चिमी एशिया के अरब देशों के साथ मिलकर एक गठबंधन बनाने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं ताकि वह उस कथित गठबंधन के नेता बनने सकें, लेकिन उनका यह सपना भी उनके राजनीतिक सफर के अंत के साथ ही चकनाचूर हो जाएगा। (RZ)

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