Dec ०३, २०२० २२:०८ Asia/Kolkata
  • पोम्पियो के बाद कूश्नर का इलाक़े का दौरा! ट्रम्प के शासन के बाक़ी बचे दिनों में वाॅशिंग्टन क्षेत्र में क्या करना चाह रहा है?

अमरीका, इस्राईल और सऊदी अरब का दुष्ट त्रिकोण इन दिनों जिस तरह की गतिविधियां दिखा रहा है, उससे सिर्फ़ यही लगता है कि क्षेत्र में प्रतिरोध के मोर्चे के ख़िलाफ़ एक नई साज़िश तैयार हो चुकी है।

ईरान के वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिक शहीद डाॅक्टर मोहसिन फ़ख़्रीज़ादे की हत्या, अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो की मध्यपूर्व की यात्रा और नेतनयाहू व बिन सलमान से उनकी मुलाक़ात के ठीक बाद हुई। अब कुछ रिपोर्टों के मुताबिक़ अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के दामाद और उनके सलाहकार जेरेड कूश्नर भी इसी हफ़्ते पश्चिमी एशिया के इलाक़े का दौरा करने वाले हैं। क्या इस दौरे के पीछे भी, जैसा कि कुछ विश्लेषकों का कहना है, इस्लामी गणतंत्र ईरान और क्षेत्र में इस्लामी प्रतिरोध के ख़िलाफ़ कोई साज़िश है? या यह दिखाने की कोशिश की जाएगी कि इस तरह की कोई साज़िश है?

 

अमरीकी पत्रिका फ़ाॅरेन पालिसी ने अपनी वेबसाइट पर लिखा है कि ईरान के परमाणु वैज्ञानिक मोहसिन फ़ख़्रीज़ादे की हत्या के बाद, जिनके बारे में यह कहा जा रहा है कि उन्हें इस्राईल के एजेंटों ने मारा है, अमरीकी राष्ट्रपति के सलाहकार जेरेड कूश्नर इस हफ़्ते मध्यपूर्व की यात्रा करने वाले हैं। पत्रिका का कहना है कि जब से जो बाइडन अमरीका के राष्ट्रपति निर्वाचित हुए हैं, तब से लेकर अब तक यह ट्रम्प सरकार के दूसरे सदस्य की क्षेत्र की यात्रा होगी। पोम्पियो की मुलाक़ात की तरह, जो इस्राईली संचार माध्यमों के अनुसार सऊदी अरब व इस्राईल के उच्चाधिकारियों की उपस्थिति में हुई, कूश्नर की मुलाक़ातों में भी चर्चा के विषय स्पष्ट नहीं हैं और उनकी मुलाक़ातें भी बंद दरवाज़ों के पीछे ही होंगी।

 

कहा जा रहा है कि जेरेड कूश्नर सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान और क़तर नरेश तमीम बिन हमद अस्सानी से मुलाक़ातें करेंगे। कूश्नर चाहते हैं कि ट्रम्प का सत्ताकाल समाप्त होने से पहले, ज़ायोनी शासन के साथ अधिक से अधिक अरब देशों के संबंध स्थापित करवा दें। अलबत्ता पोम्पियो, नेतनयाहू और बिन सलमान की मुलाक़ात के बारे में यही बात कही जा रही थी कि इसका उद्देश्य इस्राईल से अरब देशों के संबंध स्थापित कराने में मदद की जाए। अलबत्ता उसके बाद कुछ टीकाकारों का कहना था कि शहीद फ़ख़्रीज़ादे की हत्या, सऊदी अरब में इस तिकड़ी की मुलाक़ात का नतीजा था।

 

अब सवाल यह है कि क्या कूश्नर के सऊदी अरब के दौरे का उद्देश्य भी इलाक़े में इस्लामी प्रतिरोध के ख़िलाफ़ आतंकी व विध्वंसक कार्यवाहियां कराना है? इस सवाल के जवाब में कुछ टीकाकारों का कहना है अमरीकी संचार माध्यमों की यह रिपोर्टें पूरी तहर से निराधार और झूठ हैं कि कूश्नर सऊदी अरब और क़तर के बीच दोस्ती कराने के लिए आ रहे हैं बल्कि इस दौरे का वास्तविक उद्देश्य अरब देशों और इस्राईल के गठजोड़ का दायरा बढ़ाना और उन्हें अगले हफ़्तों में ईरान और प्रतिरोध के मोर्चे में शामिल देशों व गुटों के ख़िलाफ़ किसी भी प्रकार के युद्ध या आतंकी कार्यवाही के लिए एकजुट करना है।

 

हालांकि ईरान और इस्लामी प्रतिरोध को इस तरह की किसी भी साज़िश का मुक़ाबला करने के लिए तैयार रहना चाहिए लेकिन यह बात बहुत ही अप्रत्याशित है कि अमरीका, ज़ायोनी शासन और सऊदी अरब किसी अन्य साज़िश का दुस्साहस कर पाएंगे। इस लिए ऐसा लगता है कि कूश्नर के पश्चिमी एशिया के दौरे का लक्ष्य सिर्फ़ यह ज़ाहिर करना है कि ईरान और इस्लामी प्रतिरोध के ख़िलाफ़ इस तरह की साज़िश मौजूद है ताकि शायद अमरीकी-इस्राईली-सऊदी गठजोड़ की कूटनीति को सक्रिय व आक्रामक दिखाए दे और ईरान व प्रतिरोध का मोर्चा भयभीत हो जाए। (HN)

 

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