Dec १०, २०२० १५:२४ Asia/Kolkata
  • इस्राईली मीडिया में सैयद हसन नसरुल्लाह की टारगेट किलिंग की योजना की ख़बरों की अचानक भरमार क्यों हो गई? क्या डराना मक़सद है या गहरी चिंता का चिन्ह? बड़े पश्चिमी राजनेता ने क्या ख़ुलासा किया?

आजकल कोई दिन ऐसा नहीं गुज़रता जब हिज़्बुल्लाह आंदोलन के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह की तसवीर इस्राईली मीडिया में चर्चा का मुद्दा न बने।

कभी कोई विशेष रिपोर्ट, कभी कोई बड़ा ख़ुलासा तो कभी स्ट्रैटेजिक डिबेट ज़रूर इस बारे में होती है कि सैयद हसन नसरुल्लाह की टारगेट किलिंग की योजना थी या बनाई जा रही है आदि। या यह कि ईरान के परमाणु वैज्ञानिक मोहसिन फ़ख़्रीज़ादे की हत्या के बाद अब सैयद हसन नसरुल्लाह को निशाना बनाया जा सकता है। कभी हिज़्बुल्लाह के साथ इस्राईल के संभावित युद्ध के बारे में कोई रिपोर्ट होती है कि अगर युद्ध हुआ तो क्या हालात पैदा हो सकते हैं।

सैयद हसन नसरुल्लाह के बाद राजनैतिक और प्रचारिक गलियारों में इतनी ज़्यादा बहस से यह लगता है कि हिज़्बुल्लाह और उसके नेतृत्व का ख़ौफ़ इस्राईल पर बुरी तरह छाया हुआ है क्योंकि कई मोर्चों पर टकराव की संभावना बढ़ती जा रही है।

हमने एक पश्चिमी देश के एक बड़े नेता से इस बारे में बात की तो उनका कहना था कि इस्राईल के राजनेताओं और सैनिक नेतृत्व को सबसे ज़्यादा डर उन नेताओं से रहता है जो युद्ध का फ़ैसला करने में पूरी तरह आज़ाद हैं और सैयद हसन नसरुल्लाह इस सूचि में काफ़ी ऊपर हैं क्योंकि उन्होंने और उनके संगठन ने दो बार इस्राईल से युद्ध का फ़ैसला कर लिया। पहला फ़ैसला तब किया जब 1982 में पैलेस्टाइन लिब्रेशन आर्गनाइज़ेशन लेबनान से निकली तो उसकी ख़ाली जगह भरने के लिए हिज़्बुल्लाह ने ख़ुद को संगठित कर लिया। इतना ही नहीं यह संगठन धीरे धीरे एक बड़ी क्षेत्रीय ताक़त में बदल गया।

दूसरी बार युद्ध का फ़ैसला 2006 में किया जब इस्राईल के दो सैनिकों को बंधक बना लिया और 33 दिन चलने वाले युद्ध में अपने एतिहासिक प्रतिरोध से इस्राईल के दांत खट्टे कर दिए। पूरे इलाक़े में इस्राईल की सैनिक ताक़त की पोल खुल गई, तत्कालीन इस्राईली प्रधानमंत्री ओलमर्ट का राजनैतिक कैरियर तबाह हो गया और इस्राईली सैनिक अफ़सरों की बुरी तरह किरकिरी हुई।

तेल अबीब युनिवर्सिटी से जुड़े इस्राईली राष्ट्रीय सुरक्षा केन्द्र ने कुछ दिन पहले 73 पृष्ठों का एक शोध जारी किया है जिसमें इस्राईल और हिज़्बुल्लाह के बीच युद्ध छिड़ जाने की स्थिति में पैदा होने वाले संभावित हालात का आंकलन किया गया है। इसमें कहा गया है कि युद्ध हुआ तो इस्राईली बस्तियों पर दक्षिणी लेबनान से हज़ारों और सीरिया और इराक़ से भी हज़ारों मिसाइल रोज़ाना गिरेंगे जबकि सैकड़ों की संख्या में ड्रोन विमान एक साथ हमले कर सकते हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि हिज़्बुल्लाह और उसके घटक संगठनों के संघर्ष कर्ता इस्राईली बस्तियों पर क़ब्ज़ा भी कर सकते हैं। इस्राईली नेतृत्व यह कहता है कि अगर फ़ख़्रीज़ादे की तरह सैयद हसन नसरुल्लाह पर भी हमला कर दिया जाए तो अफ़रा तफ़री की स्थिति पैदा हो जाएगी।

इस सेंटर का महत्व इसलिए है कि इससे रिटायर्ड जनरल आमोस येदलिन और इस्राईली सैनिक इंटैलीजेन्स एजेंसी अमान में उनके साथ काम कर चुके जनरल जुड़े हुए हैं। यानी उनके पास इस्राईली इंटैलीजेन्स के काम के तरीक़े की पूरी जानकारी है।

लेबनान से आने वाली सूचनाएं बताती हैं कि हिज़्बुल्लाह इस समय हाई एलर्ट की स्थिति में है।  अब तक सैयद हसन नसरुल्लाह को निशाना बनाने की कई बार कोशिश हो चुकी है मगर हर बार इस्राईल को बुरी तरह नाकामी का मुंह देखना पड़ा। इसका कारण यह है कि हिज़्बुल्लाह के अंदर मौजूद अलग अलग युनिटें इस विषय पर हमेशा बड़ी गहरी नज़र रखती हैं।

यह तय है कि सैयद हसन नसरुल्लाह का ख़ौफ़ इस्राईल पर छाया रहेगा। यह स्थिति तब है जब हिज़्बुल्लाह ने अभी इस्राईल पर कोई हमला नहीं किया है तो उस समय क्या हालत होगी जब हिज़्बुल्लाह के मिसाइलों की बौछार इस्राईल को अपनी चपेट में ले लेगी।

स्रोतः रायुल यौम

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