Jan २३, २०२१ ०८:४५ Asia/Kolkata
  • पार्स टूडे की ख़बर हुई सच, सऊदी अरब ने मारी पलटी, सऊदी विदेशमंत्री का बड़ा बयान, युद्ध ख़त्म करना चाहते हैं लेकिन ...

यमन युद्ध के बारे में सऊदी अरब के लहजे में काफ़ी बदलाव देखने को मिल रहा है।

सऊदी अरब के विदेशमंत्री ने दावा किया है कि उनका देश यमन में व्यापक युद्ध विराम की कोशिश कर रहा है और इस मुद्दे पर अमरीका की नई सरकार से समन्वय हो सकता है।

फ़ार्स न्यूज़ एजेन्सी की रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब के विदेशमंत्री फ़ैसल बिन फ़रहान ने सऊदी मीडिया से बात करते हुए दावा किया कि सऊदी अरब यमन के विरुद्ध छेड़े गये युद्ध को ख़त्म करना चाहता है।

उन्होंने अलअरबिया टीवी चैनल से बात करते हुए, जो शुक्रवार की रात प्रसारित हुआ, दावा किया कि सऊदी अरब के नेतृत्व में यमन पर हमला करने वाले देशों का गठबंधन, यमन में युद्ध विराम में रुकावट नहीं है बल्कि अंसारुल्लाह आंदोलन, इस युद्धग्रस्त देश में युद्ध विराम में सबसे बड़ी रुकावट है।

ट्रम्प प्रशासन के समय की तुलना में नर्म लहजा अपनाते हुए सऊदी विदेशमंत्री ने यमन युद्ध के बारे में अमरीका की नई सरकार की नीतियों के संबंध में कहा कि हम समझते हैं कि अगर बाइडन सरकार ने यमन युद्ध के मुद्दे का जाएज़ा लिया तो उसे पता चलेगा कि सऊदी प्रशासन और यमन के विरुद्ध जंग करने वाले गठबंधन का लक्ष्य, इस मामले में बाइडन सरकार के लक्ष्यों के अनुरूप है।

बिन फ़रहान ने दावा किया कि हम सभी, यमन में युद्ध विराम और फिर राजनैतिक प्रक्रिया को शुरू करने का प्रयास कर रहे हैं, सऊदी गठबंधन मुख्य रुकावट नहीं बल्कि अलहूसी ग्रुप रुकावट है।

उन्होंने अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के आख़िरी दिनों में यमन के जनांदोलन अंसारुल्लाह को आतंकवादी गुट घोषित किए जाने के फ़ैसले की सराहना करते हुए कहा कि यह गुट इस प्रकार की कार्यवाही का हक़दार था। बिन फ़रहान ने आशा जताई कि इस प्रकार की कार्यवाही और फ़ैसले, अंसारुल्लाह को राजनैतिक वार्ता में शामिल होने पर मजबूर कर सकते हैं।

सऊदी विदेशमंत्री ने एक बार फिर यमन में युद्ध विराम के लिए सऊदी अरब के पूर्व शर्तों का एलान करते हुए कहा कि यमनियों को इस बात को व्यवहारिक बनाने के लिए तर्कसंगत शर्तों के साथ संयुक्त राष्ट्र संघ की मधस्थता को स्वीकार करना होगा।

ज्ञात रहे कि पार्स टूडे ने कल कोलंबिया विश्व विद्यालय के प्रोफ़ेसर और जेराल्ड फ़ोर्ड, जिमी कार्टर और रोनाल्ड रीगन की सरकार में अमरीका की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सदस्य गैरी सिक के हवाले से एक रिपोर्ट दी थी जिसमें उन्होंने कहा था कि पश्चिमी एशिया के बारे में जो बाइडन की राजनैतिक प्राथमिकता यमन युद्ध को समाप्त कराना है।

उन्होंने यमन के बारे में नई सरकार की नीतियों के बारे में पूछे गये एक सवाल के जवाब में कहा कि जो बाइडन यमन के विरुद्ध युद्ध की योजना का बहुत अधिक विरोधी थे और कांग्रेस भी यमन युद्ध में हस्तक्षेप के लिए तैयार नहीं थी, उनका कहना था कि बाइडन इस बारे में सऊदी नरेश सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ और क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान से अमरीका की भूमिका और यमन युद्ध के राजनैतिक समाधान के लिए गंभीर वार्ता करेंगे।

अमरीका के इस पूर्व अधिकारी का कहना था कि सऊदी अरब ने यमन में बहुत अधिक पूंजीनिवेश किया और वह इस देश से कभी भी पीछे नहीं हटेगा इसीलिए उसने बाइडन सरकार के साथ वार्ता के लिए ख़ुद को तैयार कर रखा है।

उनका कहना था कि अगर अमरीका, ब्रिटेन और फ़्रांस सऊदी अरब के लिए अपनी सामरिक मदद बंद कर दें तो यह देश सैन्य उपकरणों और युद्धक विमानों का ख़याल रखने की क्षमता खो देगा और उनके लिए मामला कठिन हो जाएगा और वह ज़्यादा दिन तक नहीं चल सकेगा।

कोलंबिया विश्व विद्यालय के प्रोफ़ेसर का कहना था कि अमरीकी अधिकारी शायद सऊदी अरब से कहें कि हम तुम्हारी वार्ता में तुम्हारा समर्थन करने को तैयार हैं और अगर तुमने सद्भावना से वार्ता नहीं की तो हम भी तुम्हारा साथ नहीं दे सकेंगे। (AK)

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