Jan २६, २०२१ १०:४५ Asia/Kolkata
  • सऊदी अरब की राजधानी पर फिर क्यों गरजने लगे मिसाइल? हमला इराक़ से हुआ या यमन से? हमले की ज़िम्मेदारी ग़ैर मशहूर संगठन के लेने का क्या अर्थ है?

ट्रम्प अमरीका की सत्ता से बहुत बेइज्ज़त होकर बाहर निकले और उनका स्थान बाइडन ने लिया तो इस बड़े बदलाव के असर भी अब विश्व स्तर पर नज़र आने लगे हैं। विशेष रूप से पश्चिम एशिया के इलाक़े में यह बदलाव साफ़ नज़र आ रहा है जहां पहले से तनाव मौजूद है।

शनिवार की रात सऊदी राजधानी रियाज़ पर होने वाले मिसाइल हमले को हम इसी दायरे में देखते हैं जिसने कई अरब देशों की राजधानियों में चिंता की लहर पैदा कर दी है। इसीलिए अमरीकी विदेश मंत्रालय ने तत्काल इस हमले की  निंदा की और हमलों को रोकने के लिए सऊदी अरब को हर तरह की मदद देने का वादा किया।

जब एक साथ वाशिंग्टन, लंदन, पेरिस और बर्लिन इस हमले की निंदा कर रहे हैं और दूसरी ओर क़तर सहित अरब देशों की ओर से भी निंदा के बयान आ रहे हैं तो इसका साफ़ मतलब यह है कि यह हमला मामूली नहीं बल्कि काफ़ी बड़ा था और सऊदी मीडिया के दावे के विपरीत इस हमले से अच्छा ख़ासा नुक़सान पहुंचा है।

इस हमले के पहलुओं को समझने के लिए कुछ बिंदुओं पर ध्यान देना ज़रूरी होगा।

1 यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन ने जिसे सऊदी प्रशासन ने इस हमले का ज़िम्मेदार ठहराया इस हमले में अपना हाथ होने का खंडन किया है। अंसारुल्लाह आंदोलन ने कहा कि अगर यह हमला उसने किया होता तो इसकी ज़िम्मेदारी लेने में उसे गर्व होता क्योंकि सऊदी युद्धक विमान आए दिन यमन पर बमबारी करते हैं और इंतेक़ाम लेना उसका हक़ है।

2 अमरीका ने इस हमले की निंदा करते हुए कहा कि यह आम नागरिकों को निशाना बनाने की कोशिश है। यानी शायद अमरीका के पास इस हमले के बारे में कुछ जानकारियां हैं।

3 वअदुल हक़ नाम के संगठन ने अपने टेलीग्राम एकाउंट पर बयान जारी करके हमले की ज़िम्मेदारी ली है । उसने कहा कि सऊदी अरब के भीतर से ही उसने ड्रोन विमान उड़ाकर रियाज़ के यमामा महल पर राकेट फ़ायर किया है।

4 यह हमला उस समय किया गया है जब बग़दाद में दाइश ने आत्मघाती हमला किया और यह इशारे मिले कि हमला सऊदी अरब ने करवाया है।

हमें अब सऊदी अरब और ईरान की प्राक्सी वार की झलकियां दिखाई दे रही हैं। यह युद्ध आगे चलकर और भी बढ़ेगा। वैसे ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने कहा कि हमारा कोई प्राक्सी नहीं है हां हमारे घटक ज़रूर हैं। इस बीच यह भी नज़र आ रहा है कि इस्राईल अरब देशों में अपने मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम लगाने की कोशिश में है।

इस हमले से एक दिन पहले सऊदी प्रशासन ने कहा कि उसने यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के ड्रोन विमानों और युद्धक नौकाओं के हमले को नाकाम बनाया है। इससे पहले जिद्दा की बंदरगाह पर आयल टैंकर पर हमला हो चुका है।

हमें नहीं मालूम  की इस हमले में कौन लिप्त है मगर सऊदी अरब पर अब तक जो कई बड़े हमले हुए हैं उनके बारे में कुछ इंटेलीजेन्स रिपोर्टें कहती हैं कि इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि यह हमले सऊदी अरब के भीतर से ही किए गए हों।

अधिक चिंता का विषय यह है कि इस संगठन ने अपने अगले हमले में दुबई को  निशाना बनाने की धमकी दी है। इसका मतलब यह है कि यमन युद्ध में हमेशा सुरक्षित रहने वाला इमारात भी अब सुरक्षित नहीं है।

आने वाले दिनों में चौंका देने वाली कुछ घटनाएं हो सकती हैं और यह घटनाएं शायद उससे कहीं अधिक बड़ी होंगी जो ट्रम्प के ज़माने में हुईं।

स्रोतः रायुल यौम

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