Jan २७, २०२१ १९:१९ Asia/Kolkata
  • इस्राईल के पूर्व संसद सभापतिः मैं अब यहूदी नहीं रहना चाहता

इस्राईल के पूर्व संसद सभापति अब्राहम बर्ग ने इस्राईल से कहा है कि वह अब उन्हें यहूदी न माने। फ़्रांसीसी वेबसाइट मीडिया पार्ट को इंटरव्यू देते हुए अब्राहम बर्ग ने कहा कि वह अब ख़ुद को यहूदी नहीं मानते इसीलिए उन्होंने इस्राईली गृह मंत्रालय के रजिस्टर से यहूदी के रूप में अपना नाम हटाने की मांग की है।

अब्राहम बर्ग लगभग चालीस साल से सांसद चुने जाते रहे हैं और अलग अगल सरकारों में तीन बार मंत्री रह चुके हैं।

अब्राहम बर्ग ने अपनी किताब हिटलर पर विजय में लिखा कि वह ज़ायोनी शिनाख़्त से ख़ुद को अलग कर रहे हैं। उनका कहना था कि इस्राईल का यह मानना कि वह यहूदी सरकार है उसके विनाश की कुंजी है। अब्राहम बर्ग ने इस्राईलियों के बीच तेज़ी से फैल रहे नस्लवाद की निंदा की। उन्होंने वर्ष 2003 में यदीओत अहारोनोत अख़बार में छपे अपने लेख में लिखा था कि ज़ायोनी क्रांति मर चुकी है। अब्राहम बर्ग का कहना है कि ज़ायोनीवाद को इस्राईल की स्थापना के तत्काल बाद ख़त्म कर देना चाहिए था।

कुछ हफ़्ते पहले बर्ग ने बैतुल मुक़द्दस की अदालत से मांग की कि गृह मंत्रालय में यहूदी के रूप में उनके रजिस्ट्रेशन को कैंसल किया जाए क्योंकि अब उन्हें नहीं लगता कि यहूदी नस्ल से किसी तरह का उनका संबंध रह गया है।

अब्राहम बर्ग का कहना है कि पहले यह बात कही जा रही थी कि इस्राईल के भीतर बसने वालों के बीच कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा मगर आज के हालात को देखकर कहा जा सकता है कि यह कदापि अच्छे हालात नहीं हैं। उनका कहना है कि 1948 का घोषणापत्र जिसे इस्राईल के संविधान का महत्व प्राप्त है अच्छा दस्तावेज़ था मगर जुलाई 2018 में जो क़ानून पास हुआ है उसने सारी चीज़ों को बदल दिया। बर्ग का कहना है कि इस समय इस्राईल के नाम से जो चीज़ है वह यहूदियों की कालाबाज़ारी करने के समान है।

अब्राहम बर्ग का कहना है कि मेरी अंतरात्मा कहती है कि यहूदी समुदाय से मैं अपना संबंध पूरी तरह ख़त्म कर लूं।

अब्राहम बर्ग ने कहा कि यहूदी होने का क्या मतलब है? क्या यह कोई धर्म या सभ्यता है? यहूदी होने का मतलब तो यह था कि सब आपस में बराबर रहें मगर देखने में आता है कि यहूदी भी आपस में बराबर नहीं हैं।

बर्ग ने कहा कि इस्राईल में यहूदी बहुसंख्यक रहना चाहते हैं तो इसके लिए वह दूसरों को उनके अधिकारों से वंचित करने के रास्ते पर चल रहे हैं।

बर्ग ने कहा कि मुझे अपनी पुरानी बात याद आ रही है जो मैंने प्रधानमंत्री और उनकी मदद करने वालों से कही थी कि अगर आप ग्रेटर इस्राईल की पूरी धरती पर क़ब्ज़ा करना चाहते हैं तो आपको लोकतंत्र भूल जाना होगा क्योंकि दोनों में से केवल एक ही लक्ष्य पूरा हो सकता है। खेद की बात यह है कि इस्राईलियों ने लोकतंत्र को भुला देने का विकल्प चुना है।

बर्ग का मामला सामने आने के बाद अब कई बुद्धिजीवियों और शिक्षाविदों की आपबीती भी चर्च में आ गई है जो हालिया समय में हालात से परेशान होकर इस्राईल और यहूदियत छोड़ने पर मजबूर हो गए।

स्रोतः अलजज़ीरा

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