Feb ०७, २०२१ १४:५७ Asia/Kolkata
  • लेबनान में हिज़्बुल्लाह  के विरोधी की हत्या से हंगामा, क्या मोसाद है इस हत्या के पीछे? साज़िश का एक भयानक रूप

लंदन से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र रायुलयौम में लेबनान में होने वाली एक रहस्मय हत्या के आयामों का जायज़ा लिया है

इस घटना का उल्लेख इस लिए किया क्योंकि आज कल लेबनान की घटनाओं पर हम नज़र रखे हैं जहां शिया सामाजिक कार्यकर्ता लुक़मान सलीम की पांच गोलियां मार कर हत्या कर दी गयी है।

    लुक़मान सलीम, लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन के बहुत बड़े आलोचक थे और वह हिज़्बुल्लाह के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह की खुल कर बुराई करते थे। हालिया दिनों में सऊदी टीवी पर अपने एक इन्टरव्यू में उन्होंने बैरुत बंदरगाह पर होने वाले धमाकों की ज़िम्मेदारी भी दमिश्क और उसके घटक हिज़्बुल्लाह पर डाली थी। यही वजह है कि उनकी हत्या के बाद सब से पहले हिज़्बुल्लाह को भी बहुत से लोगों ने कटघरे में खड़ा किया। यह आरोप हत्या के कुछ मिनट बाद ही लगा दिया गया जबकि उस समय तक जांच एक क़दम भी आगे नहीं बढ़ी थी।

     हम रायुलयौम के संपादकीय में किसी पक्ष को बरी या किसी को कटघरे में खड़ा करने का इरादा नहीं रखते क्योंकि यह काम लेबनानी सुरक्षा बलों और जांच एजेन्सियों का है। अलबत्ता इस हत्या की कड़े शब्दों में आलोचना करते हैं चाहे जिसने यह हत्या की हो।

इस प्रकार की हत्या हमें लेबनान के सत्तर के दशक की याद दिलाती है जब इस तरह से बहुत से लोगों की हत्या हुई और उसके बाद लेबनान में गृहयुद्ध की आग भड़क गयी जिसमें दसियों हज़ार लोग मारे गये और 15 वर्षों तक चलने वाली इस लड़ाई ने लेबनान को पूरी तरह से तबाह कर दिया।

    इस्राईल, हर रोज़ लेबनान की वायु सीमा का उल्लंघन करता है, उसके युद्धक विमानों ने क़ाना और दक्षिणी ज़ाहिया में लेबनानियों का जनसंहार किया है, सबरा शतीला जनसंहार के पीछे भी उसी का हाथ है और वह लेबनान को पूरी तरह से तबाह करने की धमकी बार बार देता है इसी तरह उसने न जाने कितनी हत्याएं की हैं तो यह क्यों न समझा जाए कि लेबनान में होने वाली इस हत्या के पीछे भी इसी रक्त पिपासु शासन का हाथ है? हमें क्यों न समझें कि यह हत्या मोसाद ने करायी है क्योंकि इस हत्या से लेबनान में गृहयुद्ध छिड़ने का खतरा पैदा हो सकता है।

    हमें ज़रा अतीत पर एक नज़र डालना चाहिए। लेबनान के पूर्व प्रधानमंत्री रफीक़ हरीरी की हत्या के बाद भी इसी तरह से आरोप लगाए गये थे लेकिन अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की जांच में सारे आरोपों को निराधार बताया गया। इस प्रकार के अदालती फैसलों में हमारे लिए पाठ होता है और उनसे हमें सीखना चाहिए। हत्या के तुरंत बाद आरोप लगाना वास्तव में राजनीति से प्रेरित लगता है। Q.A.

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