Mar ०३, २०२१ १६:०२ Asia/Kolkata

लेबनान के वर्तमान इतिहासकार और लेखक दिवंगत सुलैमान कत्तानी का जन्म 1912 में अमरीका में हुआ और उसके दो साल बाद उनके परिजन उत्तरी लेबनान में आ गये

उन्होंने फ़िलोस्फ़ी में ग्रजुएट किया और इसीलिए वह इस्लाम धर्म में रुचि रखने लगे और मुहम्मद शाते व स्सहाब सहित इस्लाम धर्म के बारे में कई पुस्तकें लिखीं.... यहां से मैंने किताबें लिखनी शुरु कीं उसके बाद मैने हज़रत अली, हज़रत फ़ातेमा और अन्य इमामों के बारे में किताबें लिखीं।

स्वर्गीय कत्तानी ने 22 ख़ुरदाद 1374 हिजरी शम्सी को ईरान के सुप्रीम लीडर से मुलाक़ात की और वरिष्ठ नेता ने इस मुलाक़ात के बारे में कहा कि हम बहुत प्रसन्न हैं कि एक अच्छे क़लमकार से मुलाक़ात हुई जिसके बाद इस्लाम का व्यापक ज्ञान है और जिसने इस्लाम की दो मशहूर हस्ती के बारे में बहुत ही बेहतरीन किताबें लिखीं और मैं उनकी संतान होने के नाते आपका शुक्रिया अदा करता हूं।

ईरान के वाणिज्यदूतावास ने लेबनान के इस महान बुद्धिजीवी के स्वर्गवास की 17वीं बरसी के मौक़े पर एक वेबनार का आयोजन किया जिसका शीर्षक था सुलैमान कत्तानी, इमामत और महत्व।

 सुलैमान कत्तानी इस्लाम और ईसाई धर्म के बीच संपर्क का बेहतरीन ज़रिया थे, उन्होंने हज़रत मुहम्मद, हज़रत अली और हज़रत फ़ातेमा के बारे में मूल्यवान किताबें लिखीं जबकि इसके अतिरिक्त 10 अन्य किताबें भी उन्होंने पैग़म्बरे इस्लाम के परिजनों के बारे में लिखी हैं।

 लेबनान के इस ईसाई लेखक व बुद्धिजीवी ने हज़रत अली, इमाम हसन, इमाम हुसैन, इमाम ज़ैनुल आबेदीन, इमाम मुहम्मद बाक़िर, इमाम जाफ़र सादिक़, इमाम मूसा काज़िम और हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा के बारे में जो किताबें लिखी हैं उनका फ़ारसी भाषा में अनुवाद भी हो चुका है।

 सुलैमान कत्तानी ने इस्लाम धर्म, पैग़म्बरे इस्लाम और हज़रत अली अलैहिस्सलाम के बारे में मूल्यवान पुस्तकें लिखी हैं, कत्तानी अपनी किताब में लिखते हैं कि हज़रत अली ने शासकों को एसे पाठ दिए हैं जो दुनिया के किसी भी क़ानून में नहीं मिलते, सुलैमान कत्तानी की किताबें, धार्मिक कट्टरता के सामने डट जाती हैं।लेबनान के इस मशहूर लेखक का 9 इस्फ़ंद 1382 हिजरी शम्सी को 92 साल की उम्र में निधन हो गया, लेबनान के मशहूर लेखक दिवंगत पैग़म्बरे इस्लाम और उनके परिजनों की जीवनी को अपनी किताबों के लिखने का स्रोत समझते थे।

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