Mar ०४, २०२१ १८:४४ Asia/Kolkata
  • ऐनुल असद पर हमला, कारण और परिणाम ...

बुधवार को इराक़ के अलअम्बार प्रांत में स्थित ऐनुल असद छावनी पर हुए राॅकेट हमले में एक अमरीकी सैन्य अधिकारी और दो सैनिकों की मौत हो गई। अमरीकी सरकार ने कहा है कि इस हमले का ठोस जवाब दिया जाएगा लेकिन इसमें जल्दबाज़ी नहीं की जाएगी।

यह पहली बार नहीं है जब इराक़ में किसी अमरीकी सैन्य छावनी पर राॅकेट या मीज़ाइल हमला हुआ हो। ख़ास कर पिछले एक साल में इराक़ में अमरीकी दूतावास और सैन्य केंद्रों पर अनेक हमले हो चुके हैं। इन हमलों के कई कारण बयान किए जा सकते हैं लेकिन चार कारण, अन्य कारणों से ज़्यादा अहम हैंः

  • पहला कारण इराक़ में अमरीका के रवैये से संबंधित है। अमरीकी सैनिकों ने कई बार इराक़ की संप्रभुता का उल्लंघन करते हुए कई इराक़ी सैनिकों और प्रतिरोध के कमांडरों को शहीद किया है जिसका सबसे बड़ा उदाहरण तीन जनवरी 2020 को सामने आया। अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने ख़ुद आईआरजीसी के कमांडर शहीद क़ासिम सुलैमानी और इराक़ी स्वयं सेवी बल के उपकमांडर अबू महदी अलमुहंदिस के ख़िलाफ़ आतंकी कार्यवाही का आदेश दिया था। इस आतंकी कार्यवाही के बाद अनेक टीकाकारों और सरकारी व ग़ैर सरकारी नेताओं ने कहा कि अब इराक़, अमरीकी सैनिकों के लिए सुरक्षित नहीं रहेगा। अमरीकी सैनिक इराक़ की धरती को अन्य देशों में प्रतिरोधकर्ता गुटों पर हमले के लिए इस्तेमाल करते हैं जिसका एक मिसाल पिछले शुक्रवार को सीरिया में प्रतिरोधकर्ता गुटों के ठिकाने पर अमरीकी युद्धक विमानों का हमला है जिसमें एक व्यक्ति शहीद व चार अन्य घायल हो गए।
  • दूसरा कारण इराक़ में मुस्तफ़ा अलकाज़ेमी की सरकार का रवैया है। इस संबंध में इस सरकार पर आपत्तियां की जाती हैं। पहली आपत्ति यह है कि उसने देश से अमरीकी सैनिकों को बाहर निकालने के संसद के 5 जनवरी 2020 के क़ानून को गंभीरता से आगे नहीं बढ़ाया। इस सरकार पर दूसरी आपत्ति यह है कि वह अब तक इराक़ में अमरीका के दूतावास व सैन्य केंद्रों पर हमला करने वालों को पहचानने में नाकाम रही है। इन हमलों के संबंध में इराक़ की वर्तमान सरकार का रुख़, राजनैतिक रहा है और उसने कुछ प्रतिरोधकर्ता गुटों पर आरोप लगाने के अलावा कुछ नहीं किया है।
  • तीसरा कारण इराक़ में अनेक सशस्त्र गुटों की उपस्थिति है। पिछले दो दशकों में या दूसरे शब्दों में सन 2003 में इराक़ पर अमरीका के हमले के बाद से इस देश के ज़्यादातर लोगों ने हथियार ले लिए। अधिकतर लोग हथियारों का इस्तेमाल नहीं करते हैं लेकिन बहुत से लोग सशस्त्र गुट बनाने समेत विभिन्न तरीक़ों से इन हथियारों को इस्तेमाल करते हैं। इस प्रकार से कुछ ऐसे गुट भी बन गए हैं जिन पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है और वे अमरीका के दूतावास या उसके सैन्य केंद्रों पर हमले करते हैं।
  • चौथा कारण उन सशस्त्र गुटों की उपस्थिति है जिनके लिए अमरीकी सैनिकों की उपस्थिति या अनुपस्थिति का कोई महत्व नहीं है बल्कि वे कुछ आंतरिक गुटों या बाहरी देशों के पिट्ठू हैं और इराक़ के प्रतिरोधकर्ता गुटों या इस्लामी गणतंत्र ईरान को इराक़ की सुरक्षा के लिए ख़तरा दर्शाने की कोशिश करते हैं। इन गुटों के विचार में इस लक्ष्य तक पहुंचने का सबसे आसान रास्ता अमरीका के दूतावास या सैन्य केंद्रों पर हमला करना है क्योंकि इसका इल्ज़ाम ईरान या इराक़ के प्रतिरोधकर्ता गुटों पर लगाना बहुत आसान है।

अंतिम बात यह कि अमरीका के दूतावास या उसके सैन्य ठिकानों पर हमला करने वाले या हमलों का आदेश देने वाले लोग कौन हैं इसकी अनदेखी करते हुए इन हमलों का सबसे अहम परिणाम, इराक़ में सरकार की पोज़ीशन की कमज़ोरी है जबकि यह सरकार पहले से ही काफ़ी कमज़ोर है। (HN)

 

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