Mar ०६, २०२१ १४:४१ Asia/Kolkata
  • क्या पोप की इराक़ यात्रा के बाद अमरीका लेगा बदला? मिसाइल वॅार और इराकी मिसाइलों की निर्णायक भूमिका... रायुलयौम का ज़बरदस्त संपादकीय

लंदन से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र रायुल यौम का ईसाई धर्मगुरु पोप फ्रांसिस की इराक़ यात्रा और इराक़ में अमरीकी छावनी पर राकेट हमले का दिलचस्प जायज़ा।

इराक़ में अमरीका की सब से बड़ी सैन्य छावनी " एनुलअसद " पर राकेटों से हमला किया गया लेकिन शायद अमरीका इस हमले का बदला, ईसाईयों के धर्मगुरु पोप फ्रांसिस की इराक़ यात्रा के बाद ले लेकिन यह तो पक्का है कि अमरीका की जवाबी कार्यवाही का भी निश्चित रूप  से जवाब दिया जाएगा और यह भी हो सकता है कि इससे एक एसा युद्ध शुरु हो जाए जो उसी समय खत्म हो जब इराक़ से सारे अमरीकी सैनिक बाहर निकल जाएं या फिर इराक पर पूरी तरह से अमरीका का क़ब्जा हो जाए हालांकि इस की संभावना बहुत कम है क्योंकि इसकी अमरीका को भारी क़ीमत अदा करना होगी। 

अमरीकी अधिकारियों ने इस हमले के ज़िम्मेदारों की खोज शुरु कर दी है और इस खोज में उन्हें इराक़ी सुरक्षा एजेन्सियों  का पूरा सहयोग  प्राप्त है।  फिलहाल को स्वंय सेवी बल और कताएब हिज़्बुल्लाह संगठन की ओर उंगुली उठायी जा रही है जिन्हें ईरान का सहयोग प्राप्त है और जो लेबनान के हिज़्बुल्लाह  आंदोलन के पदचिन्हों पर चलते हैं। 

 

पिछले वर्षों में बगदाद में अमरीकी दूतावास पर राकेटों से हमले होते रहे हैं और उन सब का मक़सद भय व आतंक पैदा करना होता था क्योंकि हमला करने वाले जान बूझ कर इस प्रकार से हमला करते थे जिससे जानी नुक़सान न होने पाए लेकिन अब हालात बदल गये हैं  और अब अमरीकी छावनियों पर राकेट बरस रहे हैं जिसमें जानी नुक़सान भी हो रहा है जैसा कि दो हफ्ते पहले अरबील एयरबेस पर हमले के दौरान हुआ। 

यह निश्चित रूप से अमरीका व ईरान के बीच  एसी वार्ता है जिसमें मिसाइलों की मुख्य भूमिका है जो वास्तव में परमाणु समझौते पर वार्ता का  कारण बनेगी और जिसके बाद या तो प्रतिबंध हट जाएंगे या फिर दोनों के बीच बड़ा युद्ध होगा और इसकी संभावना मौजूद है। 

जो बाइडन सरकार के सामने समझौता करने के अलावा कोई और रास्ता नहीं है वह भी सभी प्रतिबंध खत्म करने की ईरानी शर्त के साथ। शायद इराक़ में ईरान के फंसे अरबों डॅालर से प्रतिबंध हटाने पर सहमति, दक्षिणी कोरिया की ओर से ईरान की रक़म वापस किये जाने पर आपत्ति न करना इस बात का चिन्ह है कि अमरीका, ईरान से दुश्मनी कम कर रहा है और वार्ता की तैयारी कर रहा है क्योंकि इराक़ के स्वंय सेवी बल की मिसाइल फायर करने की शक्ति, यूरेनियम संवर्धन को बढ़ाने और आईएईए के निरीक्षकों के साथ निचली सतह के सहयोग की ईरान की धमकी को व्यवहारिक बनाए जाने का जो दबाव है उसके साथ ईरान से दुश्मनी की जो क़ीमत अमरीका को अदा करना पड़ेगी वह बहुत बड़ी होगी। 

इराक़ के स्वंय सेवी बल के मिसाइल, इस संघर्ष में निर्णायक भूमिका अदा करेंगे और हमले के ज़िम्मेदारों के इस विश्वास को और अधिक मज़बूत करेंगे कि अमरीका इस भाषा के अलावा कोई और ज़बान समझता ही नहीं।  Q.A.

हमारा व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए क्लिक कीजिए

हमारा टेलीग्राम चैनल ज्वाइन कीजिए

हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!

ट्वीटर पर हमें फ़ालो कीजिए

 

टैग्स