Mar ०७, २०२१ १९:०९ Asia/Kolkata
  • इस्राईल कौन से नए परमाणु हथियार बना रहा है, कितने घातक हो सकते हैं यह हथियार

परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए समर्पित एक अंतरराष्ट्रीय एनजीओ ने हाल ही में एक सैटेलाइट तस्वीर जारी की है, जिसमें इस्राईल के परमाणु संयंत्र डिमोना में नए निर्माण कार्यों को देखा जा सकता है।

डिमोना परमाणु रिएक्टर 1960 के दशक से सक्रिय है, जहां इस्राईल के अघोषित सैकड़ों परमाणु बमों के लिए ईंधन के रूप में प्लूटोनियम का उत्पादन किया गया है।

इस रिएक्टर में ताज़ा निर्माण ने दुनिया भर के परमाणु विशेषज्ञों और ख़ुफ़िया एजेंसियों की जिज्ञासा को बढ़ा दिया है।

संभव है कि इस्राईल नए परमाणु हथियारों के निर्माण की कर रहा है। कुछ लोगों का अनुमान है कि मौजूदा रिएक्टर काफ़ी पुराना हो चुका है और उसके एक बड़े भाग ने काम करना बंद कर दिया है।

यहां सवाल यह भी है कि अगर इस्राईल को पुराने रिएक्टर की जगह नए रिएक्टर की ज़रूरत नहीं है, तो यह नया निर्माण क्यों किया जा रहा है?

वाशिंगटन स्थित आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक डेरिल किमबॉल ने हाल ही में एसोशिएटेड प्रेस के साथ इंटरव्यू में परमाणु वारहेड्स को लेकर एक महत्वपूर्ण तत्व की ओर इशारा किया था: ट्रिटियम। यह एक हाइड्रोजन आइसोटोप है, जिसका इस्तेमाल परमाणु वारहेड्स की क्षमता को बढ़ाने के लिए किया जाता है। यह विस्फोटक प्रतिक्रिया को अधिक घातक बनाता है, इसलिए इस्राईल को कम ईंधन की ज़रूरत होगी।

ट्रिटियम से छोटे उपकरणों समेत हथियारों को आधुनिक बनाने में मदद मिलती है, जिनकी विस्फ़ोटक शक्ति को बढ़ाया जा सकता है। इसका इस्तेमाल, न्यूट्रॉन बमों में भी किया जाता है, जिसे ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में इंसानों को मारने के लिए डिज़ाइन किया जाता है, जबकि विस्फोट के क्षेत्र का दायरा छोटा होता है। किमबॉल ने ख़ुलासा किया कि इस्राईल, अधिक ट्रिटियम का उत्पादन करना चाहता है।

प्लूटोनियम और परमाणु हथियारों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले दूसरे पदार्थों की तरह ट्रिटियम का भी परमाणु रिएक्टर में उत्पादन किया जाता है।

जैसा कि प्रमुख परमाणु विशेषज्ञ अवनेर कोहेन ने अनुमान लगाया है, पुराना डिमोना रिएक्टर, रिटायर्ड हो चुका है, इस्राईल को ट्रिटियम के उत्पादन के लिए एक नए रिएक्टर की ज़रूरत है। शायद यह नया रिएक्टर विशेष रूप से इसी उद्देश्य के लिए बनाया जा रहा है।

यहां यह सवाल भी उठता है कि पिछले दो साल से जारी निर्माण की तस्वीरें इस वक़्त क्यों सार्वजनिक की गई हैं?

हो सकता है कि बाइडन प्रशासन मध्यपूर्व और दुनिया को यह बताना चाहता हो कि असली ख़तरा ईरान से नहीं, बल्कि कहीं और से है।

लेकिन सबसे बड़ी विडंबना यह है कि कोई भी इस्राईल के परमाणु हथियारों या उन्हें उन्नत बनाने के अधिकार पर सवाल नहीं उठा रहा है। जबकि अगर ईरान की सरज़मीन पर यूरेनियम का एक भी कण गिरता है तो दुनिया भर में हो-हल्ला मचना शुरू हो जाता है कि तेहरान परमाणु बम बनाने से बस कुछ ही सप्ताह या महीने दूर है।

यह दोहरी नीति क्यों है? यह क्यों मान लिया जाए कि इस्राईल को परमाणु हथियार बनाने का अधिकार है, लेकिन ईरान समेत क्षेत्र के किसी देश को परमाणु तकनीक हासिल करने का भी अधिकार नहीं है। msm

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