Apr २१, २०२१ ११:२१ Asia/Kolkata
  • ख़ान-ए-काबा में वर्दी धारी पहली महिला पुलिस अधिकारी की तैनाती का विरोध क्यों?

सऊदी अरब के गृह मंत्रालय द्वारा इस्लाम के सबसे पवित्र धार्मिक स्थल मस्जिदुल-हराम या ख़ानए काबा में पहली महिला पुलिस अधिकारी की तैनाती की तस्वीरें जारी करने के बाद सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया है।

मंगलवार को अल-क़ुद्स अल-अरबी की रिपोर्ट के मुताबिक़, इन तस्वीरों के जारी होने के बाद, सोशल मीडिया पर सऊदी अरब और विश्व भर के मुसलमान विभिन्न प्रतिक्रियाएं ज़ाहिर कर रहे हैं। कुछ लोग सऊदी शासन के इस क़दम को इस्लामी शरीअत के ख़िलाफ़ क़रार दे रहे हैं तो कुछ लोगों का कहना है कि महिला ज़ायरीन की सुरक्षा के लिए यह एक अच्छा क़दम है।

विरोध करने वालों का कहना है कि काबा इस्लाम का सबसे पवित्र धार्मिक स्थल है, वहां वर्दी में महिलाओं की उपस्थिति ग़ैर ज़रूरी है।

हिना नाम की एक सऊदी महिला ने ट्वीट करके लिखा है कि इससे पहले भी मस्जिदुल हराम में महिला अधिकारियों की तैनाती होती थी, लेकिन वे पूर्ण हिजाब के साथ अपनी ड्यूटी अंजाम देती थीं। हमारा विरोध उस वर्दी पर है, जो इन महिला अधिकारियों ने पहन रखी है और मक्के के सम्मान को नज़र अंदाज़ कर रही हैं।

फ़हद अल-अतीबी नामक एक अन्य ट्वीटर हैंडल पर लिखा गया है कि पूर्व क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन नायफ़ का कहना सही था कि वर्तमान सऊदी शासक महिलाओं की आज़ादी के नाम पर उनका शोषण करना चाहते हैं, जबकि महिलाएं वास्तविक आज़ादी की मांग कर रही हैं। msm

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