May ११, २०२१ १५:३६ Asia/Kolkata
  • हमास ने धमकी दी, उसे पूरा किया, क़ुद्स में इस्राईल से युद्ध अपराध का इंतेक़ाम लिया...अब क्या क्षेत्रीय युद्ध शुरू होने जा रहा है? नेतनयाहू के पास क्या विकल्प हैं?

फ़िलिस्तीन के हमास संगठन और गज़्ज़ा पट्टी में स्थित दूसरे संगठनों की सैनिक शाखाओं ने सोमवार को इस्राईल को शाम छह बजे तक की मोहलत दी कि अगर उसने इस समय तक क़ुद्स में अपनी दमनकारी कार्यवाहियां बंद न कीं तो उसके युद्ध अपराधों का जवाब दिया जाएगा और फिर इस्राईली बस्तियों पर मिसाइल बरसने लगे हैं।

बैतुल मुक़द्दस शहर की ज़ायोनी बस्तियों पर सात मिसाइल गिरे जिनसे पूरा शहर दहल उठा और यहूदी बस्तियों के लोगों को भूमिगत ठिकानों की ओर भागते देखा गया। यह अरब इस्राईल विवाद के पूरे इतिहास की अभूतपूर्व घटना है जो एक क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकती है जिसकी चपेट में पूरा पश्चिमी एशिया का इलाक़ा आ सकता है।

मिसाइलों का यह हमला क़ुद्स नगर में इस्राईल की दमनकारी कार्यवाहियों के जवाब में हो रहा है। इस्राईलियों ने मस्जिदुल अक़सा पर हमला किया, वहां नमाज़ियों को बुरी तरह से बर्बरता का निशाना बनाया, बैतुल मुक़द्दस के शैख़ जर्राह मोहल्ले में स्थित फ़िलिस्तीनियों के घरों पर क़ब्ज़ा कर लिया और रमज़ान के पवित्र महीने में उन्हें सड़कों पर खदेड़ दिया।

इन हालात को देखकर फ़िलिस्तीनी संगठनों का संयम जवाब दे गया और उन्होंने साफ़ कर दिया कि इन युद्ध अपराधों को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फ़िलिस्तीनी संगठनों ने अपने मिसाइलों से इस्राईल को जवाब देने का फ़ैसला कर लिया। हो सकता है कि इस लड़ाई में फ़िलिस्तीनी संगठन ड्रोन विमानों और उन सटीक मिसाइलों को भी इस्तेमाल कर लें जो इससे पहले कभी इस्तेमाल नहीं किए गए। यही वजह है कि इस्राईली सेना ने अपना सैन्य अभ्यास रद्द कर दिया है जिसे शुरू हुए एक ही दिन हुआ था हालांकि यह अभ्यास कई हफ़्तों तक चलने वाला था।

फ़िलिस्तीनी संगठनों ने जब यह क़दम उठा लिया है तो यह भी तय है कि वह हर स्थिति का सामना करने के लिए तैयार हो चुके हैं। वह इस्राईल को अधिक से अधिक नुक़सान पहुंचाने की तैयारी भी कर चुके हैं।

अब इस्राईली नेतृत्व के पास दो ही विकल्प हैं।

पहला विकल्प यह है कि गज़्ज़ा पट्टी पर बमबारी और मिसाइल हमले करते हुए टैंकों के साथ इस इलाक़े में घुस जाए और वहां वर्ष 2014 की तरह फिर युद्ध अपराध करे।

दूसरा विकल्प यह है कि ग़ज़्ज़ा के इलाक़ों पर सीमित हमले करे और तत्काल मिस्र की राजधानी क़ाहेरा पहुंच कर युद्ध विराम की विनती शुरू कर दे।

गज़्ज़ा पर चढ़ाई करने का जहां तक सवाल है तो इसके जवाब में फ़िलिस्तीनी संगठन भी इस्राईली इलाक़ों पर, तेल अबीब, कुद्स, हैफ़ा, असक़लान, उसदूद, बेर सबा और अन्य अन्य शहरों पर मिसाइल बरसाएंगे और हो सकता है कि इंफ़्रास्ट्रक्चर भी इस बार ध्वस्त कर दिया जाए।

ग़ज़्ज़ा पट्टी के एक संगठन के एक कमांडर ने हमसे कहा कि बिन गोरियन एयरपोर्ट हमारी हिट लिस्ट में सबसे ऊपर है और ईंट का जवाब पत्थर से देने की सारी तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं।

हम जल्दबाज़ी में कोई नतीजा नहीं निकालना चाहते लेकिन इतना ज़रूर कह सकते हैं कि शायद बिनयामिन नेतनयाहू से वही भयानक ग़लती हो गई है जो उनके पूर्ववर्ती एहूद ओलमर्ट ने की थी जब उन्होंने दक्षिणी लेबनान में अपनी सेना उतार दी थी। वह समझ रहे थे कि यह जंग उनके लिए तफ़रीह से ज़्यादा कुछ नहीं होगी मगर वहीं उन्हें एतिहासिक शिकस्त का सामना करना पड़ा। उनकी सरकार भी गई, जेल भी जाना पड़ा और इस्राईली सेना का सारा रोब मिट्टी में मिल गया।

इस्राईली हमलों में तीन सौ से अधिक फ़िलिस्तीनियों के घायल होने के जवाब में मिसाइल हमले की ज़िम्मेदारी हमास की ओर से स्वीकार किए जाने का मतलब यह है कि हमास अब हर समझौते से बाहर निकलकर इस्राईल को सबक़ सिखाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

नेतनयाहू को शायद यह पता नहीं कि फ़िलिस्तीनियों के संयम की एक सीमा है, जब बर्दाश्त अपनी हद से गुज़र जाता है तो फिर फ़िलिस्तीनियों को किसी चीज़ का डर नहीं रहता।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार

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