May १५, २०२१ १६:०९ Asia/Kolkata
  • अभी तो हम रॉकेटों का पुराना स्टॉक ख़ाली कर रहे हैं, हमारे तरकश में कई ऐसे नए तीर हैं, जिससे... हमास

6 दिन पहले मुसलमानों के तीसरे सबसे पवित्र धार्मिक स्थल मस्जिदुल अक़सा और बैतुल मुक़द्दस के शेख़ जर्राह इलाक़े में घरों से उजाड़े जाने वाले फ़िलिस्तीनियों की मदद के लिए हमास समेत फ़िलिस्तीन के इस्लामी प्रतिरोधी संगठन आगे आए।

यह वह दिन था, जब रॉकेटों ने पत्थरों की जगह ले ली और पत्थरों के बजाए ज़ायोनियों के सिरों पर रॉकेटों की बारिश होने लगी।

इस बार इस्राईल और उसके समथर्कों के लिए संदेश साफ़ हैः इस सरज़मीन पर कुछ मर्द हैं, जो बैतुल मुक़द्दस की हिफ़ाज़त कर सकते हैं।

हमास के एक सीनियर लीडर ने कहा है कि अगर इस्राईल के हमले जारी रहते हैं और लड़ाई आगे बढ़ती है तो हमारे तरकश में ऐसे तीर हैं, जिससे ज़ायोनी चौंक जायेंगे और उनके पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक जाएगी।

हमास के नेता सालेह अल-अरूरी का कहना है कि हमास ने अभी अपनी असली ताक़त नहीं दिखाई है। हम पुराने रॉकेटों से छुटकारा पाना चाहते हैं, क़स्साम मिसाइलों की नई और आधुनिक खेप का तो हमने अभी तक अनावरण भी नहीं किया है। इस्राईली सेना को अभी हमारे नए हथियारों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

स्वॉर्ड ऑफ़ क़ुद्स की शुरूआत के साथ ही इस्राईल का खोखला और बनावटी भय ख़त्म हो गया और ज़मीन पर स्थित स्वर्ग में रहने का सपना आंखों में सजोए दुनिया भर से फ़िलिस्तीन में आकर बसने वाले ज़ायोनियों के लिए नरक का दरवाज़ा खुल गया।

अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प, उनके ज़ायोनी दामाद जेरेड कोश्नर और ज़ायोनी प्रधान मंत्री बिनयामिन नेतनयाहू कुछ अरब देशों के साथ तथाकथित अब्राहम शांति समझौते पर हस्ताक्षर करके सोच रहे थे कि उन्होंने हमेशा के लिए मैदान मार लिया है, फ़िलिस्तीन का मुद्दा अब इतिहास के पन्नों में दफ़न होकर रह जाएगा। हालांकि वह भूल गए थे कि जिन देशों के साथ इस्राईल का समझौता हुआ है, उनकी फ़िलिस्तीन के मुद्दे में कोई भूमिका नहीं है, और जो देश या प्रतिरोधी संगठन संघर्ष कर रहे हैं, वह कभी पीछे हटने वाले नहीं हैं।

पिछले 7 दशकों में यह साबित हो गया है कि फ़िलिस्तीन का मुद्दा न कभी मरेगा और न ही दफ़न होगा, बल्कि जब तक फ़िलिस्तीनियों की सरज़मीन पर ज़ायोनियों का क़ब्ज़ा ख़त्म नहीं होगा, हमेशा राख से चिंगारी निकलकर ज़ायोनियों और उनके समर्थकों के महलों को भस्म करती रहेगी।

हिज़्बुल्लाह ने भी संकेत दे दिए हैं कि अगर इस्राईल ने अक़्ल के नाख़ून नहीं लिए तो उसे इस बार ऐसा सबक़ सिखाया जाएगा कि ज़ायोनियों को सिर छिपाने के लिए कोई जगह नहीं मिलेगी। msm

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