Mar ०७, २०२० १७:४९ Asia/Kolkata
  • नया सवेराः रूसी युवती Ekaterina Morozova केट्रीना मोरोज़ोवा का कहना है कि मुसलमान होने के बाद मुझको एसा लगा जैसे मैं वर्षों से इस्लाम को पहचानती हूं

"केट्रीना मोरोज़ोवा" का कहना है कि इस्लाम एक परिपूर्ण धर्म है।  इसमें मानव को परिपूर्ण बनाने के लिए बहुत सी शिक्षाएं दी गई हैं।  इस्लाम की एक विशेषता यह है कि वह महिला को पूरा सम्मान देता है जो किसी अन्य धर्म में नहीं दिखाई देता।

वे कहती हैं कि इस्लाम, लोगों को ईश्वर तक पहुंचाने में सहायक का काम करता है।

सच्चाई के खोजियों तक इस्लाम की पहुंच केवल शोध करने तक सीमित नहीं है बल्कि मनुष्य की प्रवृत्ति ही इस ईश्वरीय धर्म की ओर स्वयं खिंचती जाती है।  बहुत से लोग इस्लाम के बारे में गहन खोजबीन करके उसे अपनाते हैं जबकि कुछ अन्य स्वयं ही उस ओर खिंचे चले जाते हैं।  एसा ही कुछ रूसी युवती Ekaterina Morozova केट्रीना मोरोज़ोवा के साथ हुआ।  उन्होंने इस्लाम को संसार के सबसे उत्तम धर्म के रूप में स्वीकार किया है।  वे कहती हैं कि मैं इस्लाम को बहुत पसंद करती हूं और इससे एक मिनट भी दूर नहीं हो सकती।

केट्रीना मोरोज़ोवा

रूसी युवती Ekaterina Morozova केट्रीना मोरोज़ोवा, इस्लाम से इतना अधिक प्रभावित हुईं कि वे इसको न केवल अपनी बल्कि पूरे संसार के लोगों की खोई हुई प्रिय वस्तु समझती हैं।  वर्तमान समय में बहुत से लोग शांति एवं कल्याण की तलाश में रहते हैं और उनको कोई भी साफ और प्रकाशमय मार्ग दिखाई नहीं देता।  हालांकि इस्लाम, उनकी इस आवश्यकता को पूरा कर सकता है।  इसका कारण यह है कि इस्लाम का संबन्ध मनुष्य की प्रवृत्ति से है।  जो भी इस ओर बढ़ता है वह उसकी ओर आकृष्ट अवश्य होता है।  यही कारण है कि केट्रीना मोरोज़ोवा इस्लाम से इतनी अधिक प्रभावित हुईं कि उन्होंने इसे पूरे मन से अपना लिया।  वे कहती हैं कि मुसलमान होने के बाद मुझको एसा लगा जैसे मैं वर्षों से इस्लाम को पहचानती हूं।  यह धर्म इतना सुन्दर और प्यारा है जिसकी वजह से मैं इससे एक मिनट के लिए भी दूर नहीं रहना चाहती हूं।

आइए अब देखते यह है कि वह कौन सी वजह है जिसके कारण केट्रीना मोरोज़ोवा, स्वेच्छा से इस्लाम को अपना कर मुसलमान हो गईं।  इस संबन्ध में पहले वे अपने देश की स्थिति को समझाते हुए कहती हैं कि मेरा संबन्ध रूस से है।  रूस को पहले सोवियत संघ के नाम से जाना जाता था।  वहां पर धार्मिक स्वतंत्रता बिल्कुल नहीं थी।  सोवियत संघ में किसी भी धर्म का अनुसरण करना मना था क्योंकि वहां पर कम्यूनिज़्म का राज था।  किसी भी व्यक्ति को किसी भी धर्म के पालन का कोई अधिकार नहीं था।  केट्रीना का कहना है कि मेरे सारे परिजन ईसाई थे।  सोवियत संघ के काल में हमारे परिवार के लोग छिपकर ईसाई धर्म का अनुसरण किया करते थे।  बाद में सोवियत संघ का विघटन हो गया।  अब वहां पर लोगों को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार मिल चुका है।

सोवियत संघ के विघटन ने यह सिद्ध कर दिया कि भौतिकवादी विचारधराएं किसी भी स्थिति में मनुष्य की आध्यात्मिक आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर सकतीं।  रूस की जनता ने 70 वर्षों से अधिक समय तक कम्यूनिज़्म की छाया में जीवन व्यतीत किया जिसके दौरान उनको धर्म के पालन का बिल्कुल भी अधिकार नहीं था।  वहां के लोगों को बताया गया था कि कम्यूनिज़म का पालन करके लोग सौभाग्यशाली हो सकते हैं किंतु व्यवहारिक रूप में एसा कुछ भी नहीं हुआ।  रूस के रहने वाले, तानाशाही के अन्तर्गत धर्म से तो दूर हुए ही साथ ही उनकी आर्थिक स्थिति भी दिन-प्रतिदिन ख़राब होती गई।  वर्तमान समय में पश्चिम में लिब्रलिज़्म या उदारवाद का भी यही हाल है जो बहुत तेज़ी से पतन की ओर बढ़ता जा रहा है।  इसका मुख्य कारण यह है कि भौतिकवाद कभी भी मनुष्य को शांति नहीं दे सकता और न ही उसकी आध्यात्मिक ज़रूरतों को पूरा करने में सक्षम है।

केट्रीना मोरोज़ोवा के मुसलमान होने में केवल रूस में घटने वाली घटनाएं शामिल नहीं हैं बल्कि उनके भीतर ईरान में रहते हुए जो परिवर्तन हुआ वही इसका मूल कारण है।मोरोज़ोवा के पिता एक व्यापारी थे।  वे व्यापार के संबन्ध में सपरिवार ईरान आए थे।  उन्होंने लगभग दो वर्षों का समय ईरान में व्यतीत किया।  मोरोज़ोवा ने ईरान में अपने प्रवास के दौरान जहां अपनी पढ़ाई जारी रखी वहीं पर फारसी भाषा भी सीखी।  वे तेहरान में रहती थीं।  इस दौरान उन्होंने ईरानी संस्कृति और सभ्यता को निकट से देखा और समझा।

केट्रीना का कहना है कि इस्लाम को स्वीकार करने की घटना वास्तव में एक स्वप्न से शुरू हुई।  इस स्वप्न के बारे में वे कहती हैं कि एक रात मैंने एक ख़्वाब देखा जिसमें मैं एक वाक्य दोहरा रही हूं।  सुबह जब मैंने अपनी माता को इसके बारे में बताया तो उनको वह वाक्य समझ में नहीं आया जिसको मैंने सपने में दोहराया था।  बाद में मैंने उस वाक्य के बारे में खोज शुरू की जिसे मैंने अपने सपने में कई बार सुना और दोहराया था।  काफ़ी खोजबीन के बाद मुझको यह पता चला कि यह वाक्य नहीं बल्कि कलमा है जिसे पढ़ने से मनुष्य मुसलमान हो जाता है।  हालांकि केट्रीना केवल एक सपने के कारण मुसलमान नहीं हुईं बल्कि उन्होंने इस्लाम के बारे में बहुत खोजबीन की किंतु इसका आरंभ उसी सपने से हुआ जिसमें उन्होंने स्वयं को कलमा पढ़ते देखा था।

यह रूसी युवती पहले इस सपने के बारे में एक ईसाई धर्मगुरू से पूछती हैं और उनसे इस्लाम के बारे में जानना चाहती हैं।  उस ईसाई धर्मगुरू ने केट्रीना को बताया कि हमारी पवित्र किताब इंजील के 18वें अध्याय में लिखा है कि मेरे बाद जो आएगा वह ईसाइयत से अधिक परिपूर्ण धर्म लेकर आएगा और मेरे मानने वाले उसकी ओर मुड़ जाएंगे।  इस ईसाई धर्मगुरू ने अन्य ईसाई धर्मगुरूओं के विपरीत इस्लाम के बारे में केट्रीना को वासविकता बताई।  यह एक वास्तविकता है कि फेर-बदल की हुई ईसाई धर्म की पुस्तक इंजीलों में इस्लाम के इस रूप को नहीं बताया गया है।  केवल यूहन्न इंजील में ही इस वास्तविकता का उल्लेख किया गया है कि इस्लाम, ईसाई धर्म से अधिक परिपूर्ण धर्म है और पैग़म्बरे इस्लाम के आगमन की सूचना देता है।

सूरे सफ में एक स्थान पर ईश्वर कहता हैः और जब ईसा इब्ने मरयम ने कहा कि हे बनी इस्राईल, मुझको ईश्वर ने तुम्हारी ओर भेजा है।  मैं अपने से पहले भेजी जाने वाली ईश्वरीय किताब की पुष्टि करता हूं और अपने बाद आने वाले उस ईश्वरीय दूत की खुशखबरी देता हूं जिसका नाम अहमद होगा।  यह वास्तविकता है कि सारे के सारे आसमानी धर्म ईश्वर की ओर से हैं।  उनके कुछ नियम संयुक्त हैं।  परंपरा यह है कि इन आसमानी धर्मों में बाद वाला धर्म, पहले वाले को परिपूर्ण करता है।  जैसे ईसाइयत, यहूदित से परिपूर्ण धर्म है और इस्लाम इन दोनों से अधिक परिपूर्ण और अन्तिम ईश्वरीय धर्म है।

इस्लाम के बारे में ईसाई धर्मगुरू की बात सुनने के बाद केट्रीना मोरोज़ोवा, एक मुसलमान धर्मगुरू के पास गईं।  उन्होंने पूरी बात उन्हें बताई। कैट्रीना की बात सुनने के बाद मुसलमान धर्मगुरू ने उन्हें इस्लाम के बारे में विस्तार से बताया।  कुछ समय के बाद कैटरीना ने स्वेच्छा से मुसलमान होने की घोषणा कर दी।  उनका कहना है कि ईरान में रहकर मुझको सही इस्लाम समझने का उचित अवसर मिला।  कैटरीना का यह भी कहना है कि मेरे माता-पिता ने इस बारे में मेरा कोई विरोध नहीं किया।  वे कहती हैं कि मेरे लिए यह बहुत ही खुशी की बात है कि मेरे माता और पिता दोनो ही मेरी विचारधारा का सम्मान करते हैं और वे कभी भी मेरे मुसलमान होने के मार्ग में बाधा नहीं बने।

हेजाब

 

जो महिलाएं मुसलमान होती हैं उनकी सबसे बड़ी समस्या पर्दे को लेकर होती है हालांकि कैट्रीना को इस बारे में कोई मुश्किल पेश नहीं आई।  इस संबन्ध में वे कहती हैं कि मुसलमान होने से पहले भी मैं स्वयं को ढांक कर रखती थी।  आरंभ से भी मैं दूसरों के सामने ख़ुद को प्रदर्शित करने के पक्ष में नहीं थी।  हालांकि मैं पर्दा तो नहीं करती थी किंतु छोटे कपड़े पहनने से हमेशा बचती थी।  वे कहती हैं कि मेरा आरंभ से यह मानना था कि महिलाओं को अपने शरीर को ढांप कर रखना चाहिए।  क्योंकि मुसलमान होने से पहले मेरी यह सोच थी इसलिए मुसलमान होने के बाद मुझको हिजाब अपनाने में कोई समस्या नहीं हुई बल्कि इससे मुझको खुशी हुई।

حرم حضرت عباس (ع) 

इस्लाम के बारे में केट्रीना मोरोज़ोवा का कहना है कि मेरा मानना है कि इस्लाम एक परिपूर्ण धर्म है।  यह लोगों को इंसान बनाने के पाठ देता है।  इस्लाम में महिलाओं को जितना महत्व दिया गया है उतना किसी अन्य धर्म में नहीं मिलता।  इस्लाम मनुष्य को सीमित नहीं करता बल्कि उसे आज़ादी देता है।  उनका कहना है कि इस्लाम ने शताब्दियों पहले बहुत से वैज्ञानिक विषयों के बारे में बहुत विस्तार से बताया जिनके बारे में आज शोधकर्ताओं ने हमें जानकारियां दीं हैं।  इससे पता चलता है कि इस्लाम को भेजने वाला महाज्ञानी है।  वे यह भी कहती हैं कि ईसाइयों की धार्मिक किताब इंजील में काफ़ी फेर-बदल हुआ है।  इसके कई संस्करण है जिनमें अलग-अलग बातें लिखी हुई हैं जबकि क़ुरआन में कोई फेरबदल दिखाई नहीं देता और वह पूरे संसार में एक ही है।  उनका कहना है कि क़ुरआन पढ़कर मुझको अपने कई स्वालों के जवाब मिल गए।

केट्रीना मोरोज़ोवा कहती हैं कि मेरी हार्दिक इच्छा यह है कि मैं हज करने जाऊं और उसके बाद करबला जाकर इमाम हुसैन और हज़रत अब्बास के रौज़ो की ज़्यारत करूं।  उन्होंने बताया कि मुझको इमाम हुसैन के छोटे भाई हज़रत अब्बास से एक विशेष प्रकार का लगाव है।  मैं उनका बहुत अधिक सम्मान करती हूं।  वे मुसलमानों को संबोधित करते हुए कहती हैं कि जिस प्रकार से इस्लाम सबको सम्मान देता है उसी प्रकार से हमें भी दूसरों का सम्मान करना चाहिए।  हमें इस्लामी शिक्षाओं को दूसरों तक पहुंचाना चाहिए।  हमें यह समझना चाहिए कि वास्तव में वह बहुत ही सौभाग्यशाली है जो मुसलमान है क्योंकि इसके लिए हमारे पवित्र पैग़म्बर ने बहुत कष्ट उठाए और हमतक उसे पहुंचाया।  मेरी ईश्वर से यह प्रार्थना है कि वह हमको मरते समय तक हमारे धर्म पर बाक़ी रखे, आमीन।

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