Mar २८, २०२० १८:५१ Asia/Kolkata
  • नया सवेराः आम लोगों विशेषकर ईसाइयों को इस्लाम इसलिए आकर्षित करता है क्योंकि उसमें एकेश्वरवाद की बात को बहुत ही स्पष्ट ढंग से पेश किया गया है

जब सोवियत संघ का विघटन हुआ तो उसके बाद वहां पर विभिन्न धर्मों के रहने वालों ने अपने धर्म के अनुरूप कार्य करने आरंभ कर दिये।  रूस में सबसे ज़्यादा आर्थोडाक्स ईसाई रहते हैं। 

वहां पर बड़ी संख्या में मुसलमान भी रहते हैं।  रूस की आबादी में 15 प्रतिशत मुसलमान हैं।  वर्तमान समय में रूस में मुसलमानों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है।  अपने तार्किक आदेशों और संदेशों के कारण रूस में इस्लाम बहुत तेज़ी से फैल रहा है।

इस्लाम की तार्किक बातों के कारण बहुत बड़ी संख्या में रूसी मुसलमान हो रहे हैं जिनमें एक  Dmitri Kartashov दिमित्री कार्ताशोव भी हैं।  डिमित्री कार्ताशोव गहन अध्ययन के बाद खुद को इस्लाम को स्वीकार करने से रोक नहीं सके।

दिमित्री कार्ताशोव

 

अपने मुसलमान होने के बारे में दिमित्री कार्ताशोव कहते हैं कि मैंने धर्मों के बारे में बहुत सी किताबें पढ़ी।  मैंने संसार के बहुत से धर्मों के संबन्ध में अध्ययन किया।  वे कहते हैं कि हमारे देश के  लोग अधिकतर ईसाई हैं इसलिए सबसे पहले मैंने ईसाई धर्म को पढ़ा किंतु मैंने देखा कि वहां पर कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिनको स्पष्ट किया जाना चाहिए।  इन्हीं अस्पष्ट बातों के कारण मेरी समझ में आया कि यह परिपूर्ण धर्म नहीं है। 

दिमित्री कहते हैं कि ईसाई धर्म के बाद मैंने इस्लाम के बारे में पढ़ना आरंभ किया क्योंकि हमारे देश में बहुत बड़ी संख्या में मुसलमान रहते हैं।  उनका कहना है कि इस्लाम के बारे में अध्ययन मैंने क़ुरआन से आरंभ किया।  वे कहते हैं कि रूसी भाषा के अनुवाद किये गए क़ुरआन से मैंने इस्लाम को जानने के लिए अधय्यन शुरू किया।  मुझको इसकी बातें आकर्षक लगीं।  क़ुरआन की बातों में मुझको विरोधाभास नहीं दिखाई दिया।  दो वर्षों के गहन अध्ययन के बाद मैंने अंततः इस्लाम को स्वीकार कर लिया।

 

रूसी नागरिक दिमित्री कार्ताशोव कहते हैं कि आम लोगों विशेषकर ईसाइयों को इस्लाम इसलिए आकर्षित करता है क्योंकि उसमें एकेश्वरवाद की बात को बहुत ही स्पष्ट ढंग से पेश किया गया है।  वे कहते हैं कि क़ुरआन का अध्ययन करने के बाद यह बात मेरी समझ में आ गई कि यह ईश्वरीय ग्रंथ, अनेकेश्वरवाद को नकारते हुए एकेश्वरवाद के बारे में तार्किक बातें पेश करता है जो मनुष्य को समझ में आती हैं। 

दिमित्री का कहना है कि ईसाई धर्म का गहराई से अध्ययन करने के बाद भी मेरी समझ में यह नहीं आया कि ईसा मसीह, किस प्रकार से ख़ुदा के बेटे हैं जबकि क़ुरआन स्पष्ट ढंग से बता रहा है कि ईश्वर एक है और उस जैसा कोई दूसरा है ही नहीं।

क़ुरआन के अनुसार एक समय में दो ईश्वर नहीं हो सकते क्योंकि ऐसी स्थिति में दोनों के बीच परस्पर मतभेदों के कारण प्रकृति की व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो सकती है।  दिमित्री कहते हैं कि जिस ढंग से ईश्वर के अस्तित्व को क़ुरआन में बताया गया है उस प्रकार से किसी भी धर्म में ईश्वर को पेश नहीं किया गया है। 

 

अपनी बात की पुष्टि में दिमित्री पवित्र क़ुरआन के सूरे तौहीद को पेश करते हैं जिसमें ईश्वर कहता है किः  हे रसूल, तुम कह दो कि ईश्वर एक है।  वह बरहक़ और बेनियाज़ है।  न तो उसने किसी को जना है और न ही उसको किसी ने जना है।  उसका कोई भी हमतुल्य नहीं है।  दिमित्री का कहना है कि एकेश्वर के बारे में इससे अच्छी कोई दलील हो ही नहीं सकती।

दिमित्री कार्ताशोव ने इस्लाम के अध्ययन के दौरान इसके पंथों का भी गहराई से अध्ययन किया।  इस बारे में उनका कहना है कि मैंने इस्लाम के हर पंथ को अलग-अलग पढ़ा और इसकी हर विचारधारा का अध्ययन किया। 

अंत में मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि इस्लाम में शिया मुसलमानों का जो पंथ है वह सही है और मैंने उसी को अपनाया।  उनका कहना है कि शिया मुसलमानों में इमामत का जो कंसेप्ट या विचार है उससे मुझको लगा कि उनका रास्ता सही है।  दिमित्री के अनुसार पवित्र क़ुरआन के बाद सबसे महत्वपूर्ण स्रोत पैग़म्बरे इस्लाम के कथन हैं।  आपके कथनों में मिलता है कि मेरे बाद मेरे बारह उत्तराधिकारी होंगे।  इस बारे में पैग़म्बरे इस्लाम का कथन है कि मेरे परिजन, धरतीवासियों के लिए उसी प्रकार से सुरक्षा का कारण हैं जिस प्रकार से आसमान के तारे, आसमान वालों के लिए सुरक्षा का कारण हैं।  जब उनसे पूछा गया कि आपके बाद आपके कितने उत्तराधिकारी होंगे तो इसके जवाब में हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ने कहा कि वे बारह हैं जिनमे से नौ,  हुसैन की नस्ल से होंगे जो सबके सब मासूम होंगे।

 

पैग़म्बरे इस्लाम के कुछ कथनों में उनके अन्तिम उत्तराधिकारी का नाम उनके नाम पर ही बताया गया है जो संसार का मुक्तिदाता होगा।  वही धरती पर न्याय स्थापित करेगा।  दिमित्री कहते हैं कि पैग़म्बरे इस्लाम के अन्तिम उत्तराधिकारी के बारे में मैंने पढ़ा है। पैग़म्बरे इस्लाम के अन्तिम उत्तराधिकारी इमाम मेहदी के प्रकट होने के बाद संसार में न्याय स्थापित होगा तथा हर प्रकार का अत्याचार समाप्त हो जाएगा।  वे कहते हैं कि इस्लाम को स्वीकार करने में मैं इमाम मेहदी की अधिक भूमिका मानता हूं क्योंकि वे पैग़म्बरे इस्लाम के सच्चे उत्तराधिकारी हैं और हर प्रकार के पाप से सुरक्षित हैं अर्थात मासूम हैं।  दूसरी बात यह है कि वर्तमान हालात में किसी एसी हस्ती का होना निश्चित रूप में ज़रूरी है जो ज्ञानी होने के साथ ही साथ पवित्र हो और अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाए।

यहां पर इस बात का उल्लेख ज़रूरी है कि संसार के विभिन्न धर्मों में एक ऐसे मोक्षदाता के बारे में बताया गया है जो आख़िरी ज़माने में प्रकट होगा। यह प्रकट होने वाला ईश्वर का प्रतिनिधि होगा और संसार से हर प्रकार के अन्याय को दूर करेगा। शिया मुसलमानों की किताबों के अनुसार आख़िरी ज़माने में पैग़म्बरे इस्लाम के एक पौत्र इमाम मेहदी इस संसार में आएंगे जो यहां पर फैली बुराइयों को दूर करके न्याय स्थापित करेंगे। पैग़म्बरे इस्लाम और उनके ग्यारह उत्तराधिकारियों ने अपने कथनों में बताया है कि उनका अन्तिम उत्तराधिकारी किन परिस्थितियों में इस संसार में आएगा। जब वह यहां पर आएगा तो भ्रष्ट व्यवस्था को बदलकर न्याय पर आधारित नई व्यवस्था स्थापित करेगा।

 

यहां पर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमें इमाम मेहदी के आने की प्रतीक्षा करनी चाहिए। इस संबन्ध में पैग़म्बरे इस्लाम के पौत्र इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम कहते हैं कि जो भी यह चाहता है कि वह इमाम मेहदी का साथ दे उसको उनके आने की प्रतीक्षा करनी चाहिए।  इस प्रकार के लोगों को हर प्रकार के पापों और बुरे कामों से बचना चाहिए। उनको सदैव ईश्वरीय आदेशों का पालन करते रहना चाहिए।  दिमित्री कहते हैं कि जबसे मुझको इमाम मेहदी और उनके प्रकट होने के बारे में पता चला है उस समय से मैने यह संकल्प कर लिया है कि मैं भी पापों से दूरी बनाकर इमाम की प्रतीक्षा करने वालों की सूचि में आ जाऊं। वे कहते हैं कि इसके लिए मैं सबकुछ करने को तैयार हूं।

एक मुसलमान होने के नाते दिमित्री, इस्लाम के संदेश को पूरी दुनिया में फैलाना चाहते हैं। उनका कहना है कि मेरे देश रूस में बहुत से युवा भौतिकवाद और नैतिक भ्रष्टाचार में घिरे हुए हैं। उनका कहना है कि इनमें से कुछ खोजी स्वभाव के हैं जो वास्तविकता को जानना चाहते हैं जिनके भीतर सच्चाई को स्वीकार करने की भावना अभी जागृत है।  दिमित्री का कहना है कि न्याय एक ऐसा मुद्दा है जो लोगों को अपनी ओर खींचता है। वे कहते हैं कि रूस के लोगों में न्याय के प्रति विशेष प्रकार का झुकाव पाया जाता है। इस्लामी शिक्षाओं में न्याय को विशेष महत्व दिया गया है। इस्लामी शिक्षाओं में ही यह बताया गया है कि आख़िरी ज़माने में एक मुक्तिदाता आएगा जो संसार में न्याय स्थापित करेगा। दिमित्री के अनुसार शिया मुसलमानों में पाया जाने वाला "मेहदी मौऊद" का दृष्टिकोण हमारे युवाओं को बहुत तेज़ी से अपनी ओर आकृष्ट कर सकता है। उनका कहना है कि हमको ईश्वरीय मुक्तिदाता इमाम मेहदी के आगमन के बारे में लोगों को बताना होगा।

दिमित्री कार्ताशोव को अपने मिशन में एक मुश्किल का सामना है। उनका कहना है कि काफ़ी अध्ययन करने के बाद मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि इस्लामोफ़ोबिया और सुनियोजित दुष्प्रचारों के कारण रूस में बहुत से लोग इस्लाम को आतंकवाद से जोड़ने लगे हैं। वे कहते हैं कि पिछले कुछ समय में रूस में तकफ़ीरी आतंकवादियों की ओर से की जाने वाली आतंकी कार्यवाहियों के कारण रूसी जनता के मन में यह बात आई है जो वास्तव में सही नहीं है। वे कहते हैं कि मैं स्वयं रूस का रहने वाला हूं और वास्तविकता को अच्छी तरह से समझता हूं किंतु आम लोग दुष्प्रचारों के कारण इस प्रकार की बातें करते हैं। दिमित्री कहते हैं कि मैं अपना काम अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों से आरंभ करूंगा और उनको यह समझाने की कोशिश करूंगा कि तकफ़ीरी आतंकवादियों का कोई भी संबन्ध इस्लाम से नहीं है बल्कि वे इस्लाम विरोधी हैं क्योंकि इस्लाम, शांति का धर्म हैं आतंक का नहीं।

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