Jul २४, २०२१ १५:४७ Asia/Kolkata
  • क्या अमरीका ने फ़ंड देकर चीन के भीतर ख़तरनाक वायरस पर रिसर्च करवाई? छिड़ गई नई बहस

जहां पश्चिमी देशों की ओर से बार बार यह मुद्दा उठाया जा रहा है कि कोरोना वायरस के वर्तमान घातक रूप लेने और दुनिया भर में इसके प्रसार के लिए चीन ज़िम्मेदार हो सकता है वहीं अब यह बहस शुरू हो गई है कि अमरीका ने बजट देकर चीन के भीतर ख़तरनाक वायरस के बारे में शोध करवाया है।

यह मुद्दा विश्व स्तर पर कुछ देशों की ओर से उठाया जाता रहा है कि कोरोना वायरस चीन की लेबार्ट्री से अनजाने में या जानबूझ कर फैलाया गया है, हालांकि इस विचार की अब तक पुष्टि नहीं हुई है।

चीन की वुहान प्रयोगशाला में चमगादड़ों पर होने वाली रिसर्च को आधार बनाकर यह विचार पेश किया गया है।

रिपब्लिकन सेनेटर रेंड पाल ने हाल ही में दावा किया कि चीन में अमरीकी फ़ंडिंग की मदद से कुछ वायरसों के बारे में जिनमें कोरोना वायरस शामिल नहीं है, रिसर्च की गई जो ज़्यादा घातक और ख़तरनाक थे और जिन्हें गीन आफ़ फ़ंकशन कहा जाता है।

मगर अमरीका में वायरोलोजी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डाक्टर एंथोनी फ़ाउची ने इस दावे का खंडन किया है।

डाक्टर फ़ाउची अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडन के सलाहकार होने के अलावा अमरीका में संक्रामक रोग की सरकारी संस्था के डायरेक्टर भी हैं जो नेशनल इंस्टीट्यूट आफ़ हेल्थ से संबद्ध संस्था है।

इस संस्था ने एक एसे संगठन को फ़ंड दिया है जिसने वुहान के वायरोलोजी इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर वायरसों के जीन्ज़ के कोड बदलने से संबंधित रिसर्च पर काम किया। मगर इस रिसर्च के पक्षधरों का कहना है कि यह रिसर्च भविष्य में ख़तरनाक वायरस दुनिया में फैलने की स्थिति से निपटने के लिए पहले ही तैयारी कर लेने के उद्देश्य के तहत की गई।

बहरहाल इस मुद्दे पर अमरीका के भीतर दो विरोधाभासी विचार पाए जाते हैं।

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