Jul २९, २०२१ १३:०७ Asia/Kolkata
  • तालिबान-चीन और भारत-अमरीका एक दूसरे को क्या संदेश देना चाहते हैं?

एक बार फिर काबुल पर शासन का सपना देखने वाले तालिबान चरमपंथियों का एक प्रतिनिधिमंडल चीन की यात्रा पर है।

तालिबान नेता मुल्लाह अब्दुल ग़नी बरादर के नेतृत्व में तालिबान प्रतिनिधिमंडल ने चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाक़ात की है।

बुधवार को तालिबान प्रतिनिधिमंडल ने चीन का दौरा ऐसे वक़्त में किया है, जब एक दिन पहले ही पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी चीन के दौरे से लौटे हैं।

पाकिस्‍तानी अख़बार एक्‍सप्रेस ट्रिब्‍यून के मुताबिक़, चीन के दौरे पर पहुंचे तालिबान नेताओं के सामने बीजिंग ने यह शर्त रखी है कि वे ईस्‍ट तुर्कमेनिस्‍तान इस्‍लामिक मूवमेंट और तहरीके तालिबान पाकिस्‍तान के साथ अपने रिश्‍ते तोड़ लेंगे।

तालिबान का दावा है कि उन्होंने देश के 90 फ़ीसदी भाग पर क़ब्‍जा कर लिया है। हालांकि अफ़ग़ान सरकार ने तालिबान के इस दावे को एक प्रोपैगंडा बताया है।

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने मुल्ला अब्दुल ग़नी बरादर से मुलाकात में तालिबान समूह की प्रशंसा करते हुए अफ़ग़ानिस्तान में उसे अहम सैन्य और राजनीतिक ताक़त क़रार दिया है।

वहीं तालिबान ने कहा है कि वे अफ़ग़ानिस्तान की सरज़मीन को चीन के ख़िलाफ़ इस्तेमाल होने की इजाज़त नहीं देंगे।

इस बीच, गुरुवार को भारत और अमरीका के विदेश मंत्रियों ने नई दिल्ली में मुलाक़ात की है। दोनों नेताओं ने ख़ास तौर पर अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति और चीन को लेकर विचार विमर्श किया है।

सूत्रों का कहना है कि भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमरीकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन की बातचीत में अफ़ग़ानिस्तान की सुरक्षा स्थिति सबसे अहम मुद्दा थी।

ब्लिंकेन ने कहा कि भारत क्षेत्र में अमरीका का भरोसेमंद सहयोगी है और भारत ने अफ़ग़ानिस्तान में स्थिरता और विकास लाने में अहम भूमिका निभाई है और भारत आगे भी यह भूमिका निभाता रहेगा।

भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी अफ़ग़ानिस्तान में लोकतंत्र की स्थिरता और मज़बूती पर ज़ोर दिया। अमरीकी विदेश मंत्री के साथ बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत और अमरीका दोनों ही ये मानते हैं कि अफ़ग़ानिस्तान के संकट का सैन्य समाधान नहीं हो सकता है। msm

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