Jul ३१, २०२१ १५:१७ Asia/Kolkata

जब यह ख़ुलासा हुआ कि इस्राईली स्पाइवेयर के ज़रिए बड़े पैमाने पर कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और यहां तक कि पश्चिमी राजनेताओं को निशाना बनाया गया है, तो अमरीका और यूरोप में 17 संचार माध्यमों ने संक्षिप्त रूप से ही सही इस घटना पर प्रतिक्रिया ज़ाहिर की है। व्हिसिल ब्लोअर एडर्वड स्नोडन का इस बारे में कहना हैः ...

ऐसा नहीं होना चाहिए था, क्योंकि इस्राईली स्पाइवेयर के ख़रीदार मशहूर लोग हैं, इसीलिए मीडिया में इसकी चर्चा हुई। यह कंपनियां वायरस बनाती हैं और उसे फैलाती हैं, और उनकी संख्या भी ज़्यादा है।

अब यह बात स्पष्ट हो गई है कि इस्राईली स्पाइवेयर पेगासस ने एड्रॉयड और एप्पल के आइफ़ोन मोबाइलों को हैक किया है, जिससे कुछ जासूसी एजेंसियों और सरकारों ने अपने लक्ष्यों के मैसेज, तस्वीरों और टेलीफ़ोन कॉल्स तक पहुंच के अलावा माइक्रोफ़ोन को ख़ुफ़िया तौर पर सक्रिया किया और उससे जासूसी की। ...

पेगासस पिछले दशक में विकसित होने वाली तकनीक का प्रयोग करता है, इस इस्राईली स्पाइवेयर के इस्तेमाल से जासूसी एजेंसियां लोगों के फ़ोन हैक करती हैं और उनसे सूचनाएं चुरा लेती हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ता और फ़िलिस्तीनियों के अधिकारों की रक्षा करने वालों को इस स्पाइवेयर से शिकार बनाया गया है। पश्चिमी सरकारों ने इतने बड़े पैमाने पर होने वाली जासूसी के प्रति अपनी आंखें मूंद रखी हैं। ...

एनएसओ के स्पाइवेयर के ज़रिए बड़े पैमाने पर जासूसी के बावजूद, अमरीका और यूरोपीय संघ की प्रतिक्रिया इस बारे में बहुत कमज़ोर थी। अगर इस्राईल के बजाए किसी चीनी कंपनी ने यह जासूसी की होती तो उस कंपनी पर प्रतिबंधों की मांग आसमान को छू रही होती, लेकिन क्योंकि पश्चिम में इस्राईल की आलोचना एक अपराध है, इसलिए इस्राईल पर प्रतिबंध की कोई बात नहीं कर रहा है।

ब्रिटेन में कुछ संचाम माध्यमों ने हाल ही में ख़ुलासा किया है कि देश में 108 पत्रकारों की इस्राईली स्पाइवेयर पेगासस के ज़रिए महीनों से जासूसी हो रही है, जिसे एनएसओ ने कुछ देशों की सरकारों को बेचा था। मुजतबा क़ासिमज़ादे आईआरआईबी, लंदन

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