Aug ०२, २०२१ १८:४३ Asia/Kolkata
  • अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के बढ़ते क़दम से सहमी हुई हैं महिलाएं

अफ़ग़ानिस्तान की कई महिलाओं के दिमाग़ में आज भी दो दशक पुराने तालिबान के शासन की भयानक और ख़तरनाक यादें ज़िंदा हैं, इन महिलाओं को यह चिंता फिर से सताने लगी है कि कहीं काबुल पर तालिबान चरमपंथियों का फिर से क़ब्ज़ा न हो जाए और उनके बुनियादी अधिकारों की बली चढ़ जाए।

पिछले दो महीनों के दौरान तालिबान की प्रगति और हेरात, ग़ज़्नी, क़ंदहार, फ़राह और हेलमंद जैसे शहरों की दहलीज़ पर उनकी धमक ने महिलाओं समेत आम लोगों की चिंता में वृद्धि कर दी है।

यह चिंता उस वक़्त डर में बदल जाती है, जब महिलाओं और अल्पसंख्यकों के जनसंहार की ख़बरें लोगों के कानों तक पहुंचती हैं।

अफ़ग़ानिस्तान में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि पिछले दो दशक के दौरान, तालिबान के विचारों और व्यवहार में कोई बड़ा अंतर नहीं हुआ है, हालांकि तालिबान द्वारा ऐसा प्रोपैगंडा किया जा रहा है कि अब वे नागरिक अधिकारों का पूरा ख़याल रखेंगे। लेकिन अगर सत्ता पर उनका क़ब्ज़ा हो जाता है तो वे महिलाओं की आज़ादी और गतिविधियों पर ज़रूर निंयत्रण करेंगे और मीडिया को सीमित करेंगे।

अफ़ग़ानिस्तान के महिला मामलों के मंत्रालय ने भी कहा है कि तालिबान की विचारधारा में कोई फ़र्क़ नहीं हुआ है, बल्कि कुछ मामलों में तो वह अधिक ख़राब हो गई है। msm

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