Sep ११, २०२१ ११:५१ Asia/Kolkata

ग्यारह सितंबर को किये जाने वाले आतंकवादी हमले की बरसी पर अमरीकी राष्ट्रपति ने अपने संदेश में अमरीकियों से राष्ट्रीय एकता का आह्वान किया है।

जो बाइडेन ने इस संदेश में अमरीका के भीतर राष्ट्रीय एकता और एकजुटता का आह्वान किया है।  अमरीकी राष्ट्रपति का कहना है कि एकता का अर्थ यह नहीं है कि हमसब किसी एक चीज़ को मानें बल्कि हमें एक राष्ट्र के रूप में एक-दूसरे का सम्मान करते हुए उनपर भरोसा करना चाहिए।

ग्यारह सितंबर की घटना की बीसवीं बरसी एसी स्थिति में मनाई जा रही है कि जब अमरीका अब भी इस घटना के दुष्परिणामों में घिरा हुआ है।  यह वह घटना थी जो अन्तर्राष्ट्रीय मामलों में एक नए युग के रूप में आरंभ हुई।

ग्यारह सितंबर की घटना को अमरीका की विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।  अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति जार्ज बुश ने ग्यारह सितंबर की घटना के बाद आतंकवाद से संघर्ष के बहाने आक्रामक नीति अपनाई।  अपनी इसी नीति के अन्तर्गत उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान और इराक़ पर हमले किये।

बुश के इस तथाकथित आतंकवाद विरोधी युद्ध के कारण अफ़ग़ानिस्तान, इराक, सीरिया ,लीबिया और यमन में दस लाख से अधिक लोग मारे गए।  इस बारे में अन्तर्राष्ट्रीय मामलों के जानकार एवं इतिहासकार Charles Strozier कहते हैं कि ग्यारह सितंबर की घटना ने संयुक्त राज्य अमरीका के भीतर अस्तित्व के एक गहरे संकट को जन्म दिया जिसके अन्तर्गत अमरीका ने एक घायल पशु की भांति प्रतिक्रिया दी।  वह युद्धों की एसी दलदल में फंस गया जो इस महाशक्ति के पतन की भूमिका बने।

ग्यारह सितंबर की घटना से संबन्धित एक विषय यह भी है कि बुश से लेकर ट्रम्प प्रशासन तक सभी ने इस घटना में सऊदी अरब की भूमिका को छिपाने के प्रयास किये।  इसके मुख्य कारण अमरीका के आर्थिक हित और पश्चिमी एशिया में रियाज़ की भूमिका है।

हालांकि बाइडेन प्रशासन ने आरंभ में तो सऊदी अरब के बारे में कड़ी नीति अपनाई और इस देश के साथ अमरीका के संबन्धों को फिर से परिभाषित करने की बात कही किंतु बाद में अमरीकी हितों को देखते हुए उन्होंने भी समान व्यापक संबन्ध बनाए।  ग्यारह सितंबर की घटना में मारे जाने वालों के परिजनो के अधिक दबाव के कारण बाइडेन ने मजबूर होकर इस घटना से संबन्धित केस की पुनः समीक्षा करने का आदेश दिया है।

ग्यारह सितंबर की घटना का एक अन्य नकारात्मक प्रभाव अमरीका तथा पश्चिम में इस्मोफोबिया का फैलाव है।  सर्वेक्षणों से पता चलता है कि पिछले 20 वर्षों के दौरान पश्चिम विशेषकर अमरीका में इस्लामोफोबिया बहुत तेज़ी से फैला है।  अमरीका में रहने वाले बहुत से मुसलमानों का कहना है कि उनको उस काम की सज़ा मिल रही है जिसको उन्होंने कभी अंजाम ही नहीं दिया और न ही उसका समर्थन किया।    

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