Sep १६, २०२१ ११:०७ Asia/Kolkata
  • ईरान की जवाबी कार्यवाही के बाद यूरोपीय देश बैकफ़ुट पर, तेहरान से की अपील

तीन यूरोपीय देशों ने ईरान से उच्च स्तरीय यूरेनियम संवर्धन रोकने की मांग की है।

परमाणु समझौते जेसीपीओ में शामिल तीन यूरोपीय देश ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी ने अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेन्सी के बोर्ड आफ़ डायरेक्टर्ज़ की बैठक में संयुक्त बयान जारी किया जिसमें इन देशों ने ईरान से ऊच्चस्तरीय यूरेनियम संवर्धन को तुरंत रोकने की मांग की है।

इन देशों ने अपने बयान में ईरान के शांतिपूर्ण कार्यक्रम के विरुद्ध अपने निराधार दावे दोहराए और इस कार्यक्रम की शांतिपूर्ण प्रवृत्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि ईरान के पास ऐसी गतिविधियां अंजाम देने की ठोस दलील नहीं है कि जिसके परिणाम में उसके पास ऐसी जानकारी आए जिसे परमाणु बम बनाने में प्रयोग किया जाता है।

इन तीन यूरोपीय देशों का कहना है कि ईरान मेटल यूरेनियम का संवर्धन तुरंत रोक दे।  ईरान ने बोर्ड आफ़ डायरेक्टर्ज़ की पिछली बैठक के बाद 20 प्रतिशत से अधिक स्तर के यूरेनियम संवर्धन की मात्रा दुगनी कर दी है।

तीनों यूरोपीय देशों ने अपने बयान में ईरान की परमाणु गतिविधियों पर गहरी चिंता का कारण होने का दावा किया और कहा कि हमें आशा है कि बोर्ड आफ़ डायरेक्टर्ज़ एक ज़बान होकर ईरान से ऊच्च स्तरीय यूरेनियम संवर्धन की प्रक्रिया रोकने की मांग करेगा।

परमाणु समझौत के यूरोपीय पक्षों की ओर से अपने वचनों पर अमल न करने की वजह से ईरान ने इस समझौते की धारा 26 और 36 के अंतर्गत अपने वादों पर अमल कम कर दिया है।

यूरोपीय पक्षों के बयान में आया है कि ईरान में विकसित सेन्ट्रीफ़्यूज में निरंतर बेहतरी, इस देश के यूरेनियम संवर्धन में निरंतर वृद्धि का कारण बन रही है। ईरान ने बड़े पैमाने पर विकसित सेन्ट्रीफ़्यूज़ लगाने की कार्यवाही की है, हम ईरान पर बल देते हैं कि वह इन कार्यवाहियों को रोके।

ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी के संयुक्त बयान में आया है कि हम तीन यूरोपीय पक्ष पूरी प्रकार से परमाणु समझौते के समर्थक हैं, वार्ता की उस प्रक्रिया पर प्रतिबद्ध हैं जो विएना में जेसीपीओए के सभी पक्षों और अमरीकी प्रतिनिधि की उपस्थिति में शुरू हुई है, हमारा प्रयास इस समझौते में अमरीका को वापस लाने, ईरान से इस समझौते को पूरी तरह से लागू कराने और इस समझौते से सभी के हितों को सुनिश्चित करने पर केन्द्रित है, हम ईरान पर बल देते हैं कि वह इस कूटनयिक अवसर से लाभ उठाए। (AK)

 

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