Sep १८, २०२१ ०९:२२ Asia/Kolkata
  • फ़्रांस ने अमरीका और ऑस्ट्रेलिया से अपने राजदूतों को वापस बुला लिया, चीन से लड़ने वाले आपस में ही लड़ने लगे

अमरीका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के बीच परमाणु पनडुब्बियों के अधिग्रहण को लेकर हुए समझौते से फ़्रांस ख़ुद को इतना ठगा सा महसूस कर रहा है कि उसने अमरीका और ऑस्ट्रेलिया से अपने राजदूतों को वापस बुला लिया है।

फ़्रांस की नाराज़गी की वजह दर असल 37 अरब डॉलर के पनडुब्बियां बनाने के समझौते पर पानी फिर जाना है, जो 2016 में उसने ऑस्ट्रेलिया के साथ किया था।  

फ़्रांस ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि अमरीका और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुआ यह समझौता पीठ में छुरा घोंपने जैसा है।

हाल ही में अमरीका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के बीच एक समझौता हुआ है जिसे ऑकस (AUKUS) कहा जा रहा है। इसमें ऑस्ट्रेलिया को परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी बनाने की तकनीक दी जाएगी।

दूसरी ओर चीन ने आरोप लगाया है कि तीनों देशों ने यह सौदा शीत युद्ध की मानसिकता से किया है।

इस समझौते को दक्षिण चीन सागर में बढ़ते चीन के दबदबे को कम करने की दिशा में एक क़दम बताया जा रहा है। बुधवार को अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने इसकी घोषणा की थी।

फ़्रांस के विदेश मंत्री ज़्यां ईवरे द्रियां ने गुरुवार को फ़्रांसइन्फ़ो के साथ बातचीत में कहा कि यह हमारी पीठ में छुरा घोंपने जैसा है।

द्रियां ने कहा कि वह इस डील के रद्द होने से बहुत ग़ुस्से में है और कड़वाहट से भरे हुए हैं।

उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया और अमरीका के इस क़दम की घोषणा हमें बाइडन के पूर्ववर्ती डोनल्ड ट्रंप की याद दिलाती है। उन्होंने कहाः जो बात मुझे चिंतित करती है, वह अमरीकी व्यवहार है। यह क्रूर, एकतरफ़ा, अप्रत्याशित निर्णय बहुत कुछ वैसा ही दिखता है जैसा मिस्टर ट्रंप करते थे। सहयोगी एक-दूसरे के साथ ऐसा नहीं करते हैं, यह बिल्कुल असहनीय है। msm

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