Sep २५, २०२१ १२:२३ Asia/Kolkata
  • भारतीय प्रधानमंत्री मोदी का अमरीका दौरा, चीन ने क्षेत्रीय विवादों पर भारत और जापान के स्टैंड को नाकारा कहा क्वाड संगठन की तक़दीर में नाकामी लिखी है

चीन ने दक्षिणी और पूर्वी चीन सागर के विवाद वाले इलाक़ों में समुद्री सिस्टम ज़बरदस्ती बदलने के आरोप को ख़ारिज करते हुए कहा कि झूठ और आरोपों के आधार पर डिप्लोमेसी हरगिज़ सार्थक नहीं है।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जाव लीजियान ने आर्थिक ज़बरदस्ती के आरोप को भी ख़ारिज करते हुए कहा कि आर्थिक ज़बरदस्ती का जन्म स्थल और मुख्यालय वाशिंग्टन में है। उन्होंने कहा कि पहली बात यह है कि चीन धमकियां नहीं देता और न ही व्यापारिक प्रतिबंध लगाता है। दूसरी बात यह है कि चीन अपनी सीमाओं से हरगिज़ आगे नहीं बढ़ता, तीसरी बात यह है कि चीन विभिन्न देशों में कंपनियों को अकारण दबाता नहीं। प्रवक्ता ने कहा कि किसी भी स्थिति में चीन पर आर्थिक ज़बरदस्ती का आरोप नहीं लगाया जा सकता।

ज्ञात रहे कि क्वाड गठबंधन जिसमें अमरीका, आस्ट्रेलिया, भारत और जापान शामिल हैं, उसकी बैठक वाशिंग्टन में हुई है। इस गठबंधन में एशिया पेसिफ़िक इलाक़े में चीन के बढ़ते प्रभाव पर बात हुई है और इस बैठक की मेज़बानी अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने की।

चीन के प्रवक्ता ने कहा कि चीन इलाक़ाई स्वाधीन देशों, समुद्री अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए डट कर खड़ा है और चाहता है कि विवाद होने की स्थिति में इन देशों से वार्ता जारी रहे और उचित हल खोजा जाए।

प्रवक्ता से भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री सोगा हूशीदे के बयानों पर प्रतिक्रिया मांगी गई जिनमें उन्होंने चीन पर आरोप लगाया है कि उसने दक्षिणी चीन सागर और पूर्वी चीन सागर में समुद्री सिस्टम को बदलने की दिशा में एकपक्षीय कोशिश की है। उन्होंने इस संदर्भ में चीन की आलोचना की थी और क्षेत्रीय समूद्री इलाक़ों में बीजिंग के प्रभाव की ओर इशारा भी किया था। दोनों नेता वाशिंग्टन में क्वाड की बैठक में मौजूद थे जहां अमरीका और आस्ट्रेलिया का नेतृत्व भी आया था।

चीनी विदेश मंत्रालय ने क्वाड से मांग की कि वह दूसरे देशों को निशाना न बनाए।

क्वाड की बैठक इन हालात में हुई कि जारी हफ़्ते के शुरू में एक नए अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा समझौते की वजह से विवाद खड़ा हो गया है। विवादित आक्स समझौते में अमरीका, ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया शामिल हैं। इस समझौते के तहत आस्ट्रेलिया को पहली बार अमरीका की परमाणु ईंधन से चलने वाली पनडुब्बी की तकनीक तक पहुंच मिल जाएगी।

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