Sep २७, २०२१ १७:४९ Asia/Kolkata

......हर साल दसियों हज़ार अफ़ग़ान नागरिक अरबईन के अवसर पर इराक़ में होने वाले पैदल मार्च में हिस्स् लेते थे लेकिन इस साल देश में हालिया महीनों के हालात की वजह से सीमाएं बंद होने के नतीजे में लोगों को इसका मौक़ा नहीं मिल सका।

.....अफ़गान युवा का कहना है कि मैं इस साल अरबईन पर पैदल मार्च में शामिल होना चाहता था क्योंकि इमाम हुसैन की ज़ियारत के लए उठने वाले हर क़दम के बदले एक नेकी इंसान के कर्मपत्र में लिखी जाती है। ....इस युवा का कहना है कि हर शीया की आरज़ू होती है कि इस दुनिया से रुख़सत होने से पहले इमाम हुसैन की पैदल ज़ियारत का कम से कम एक मौक़ा मिल जाए। आज चेहलुम के अवसर पर अफ़ग़ानिस्तान की मस्जिदों और इमाम बारगाहों में हुसैनी आशिकों का मजमा था।....अफ़ग़ान बुज़ुर्ग का कहना है कि इस साल हमारे अफ़ग़ान समाज को अनेक कठिनाइयों का सामना है लेकिन अगर मुहर्रम और सफ़र की शोक सभाओं और अज़ादारी की बात की जाए तो बहुत अच्छे ढंग से हुई। आज ख़ुद महसूस कर सकते हैं कि इस पवित्र स्थल पर बहुत अच्छे अंदाज़ में इमाम हुसैन की अज़ादारी का कार्यक्रम हुआ।.....इमाम हुसैन की अज़ादारी में नौहा और मातम का ख़ास स्थान होता है।....वक्ताओं ने अरबईन के अवसर पर कर्बला और आशूर के लक्ष्यों पर प्रकाश डाला और कर्बला और इमाम हुसैन की याद जीवित रखने के संघर्ष में हज़रत ज़ैनब और इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम की भूमिका को बयान किया।......अफ़गान जनता हर तरह के हालात में अरबईन का कार्यक्रम वैभवशाली रूप में आयोजित करती है। इस साल राजधानी काबुल में और दूसरे स्थानों पर इमाम बारगाहों और मस्जिदों में अरबईन का कार्यक्रम आयोजित हुआ। काबुल से आईआरआईबी के लिए बेहनाम यज़दानी की रिपोर्ट    

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