Sep २८, २०२१ ०९:०६ Asia/Kolkata
  • युद्ध अपराध की जांचः सारा ध्यान तालेबान और दाइश पर, अमरीका की हरकतों पर कोई तवज्जो नहीं

अंतर्राष्ट्रीय फ़ौजदारी अदालत ने कहा है कि सीमित संसाधनों की वजह से अफ़ग़ानिस्तान में युद्ध अपराधों के संदर्भ में उसकी जांच अमरीका के बजाए केवल दाइश और तालेबान पर केन्द्रित रहेगी।

अदालत के नए चीफ़ प्रासिक्यूटर ने कहा कि यह मांग अदालत के जजों के सामने अफ़ग़ानिस्तान के ताज़ा हालात के आधार पर रखी गई है।

अदालत पहले ही अफ़ग़ानिस्तान में युद्ध अपराधों के बारे में जांच में 15 साल लगा चुकी है जबकि पिछले साल उसने व्यापक जांच शुरू की थी लेकिन अफ़गान सरकार ने कह कहते हुए जांच रुकवा दी थी कि वह ख़ुद जांच कर रही है।

हेग में स्थित अंतर्राष्ट्रीय फ़ौजदारी अदालत केवल उसी स्थिति में हस्तक्षेप करती है जब कोई सदस्य देश युद्ध अपराध, मानवता के ख़िलाफ़ अपराध या नस्ली सफ़ाए के मामले में मुक़द्दमा चलाने में अक्षम हो या इस पर तैयार न हो रहा हो।

नए प्रासिक्यूटर करीम ख़ान ने एक बयान में कहा कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त अफ़ग़ान सरकार के ख़त्म हो जाने और उसकी जगह तालेबान के आ जाने से यह पता चलता है कि हालात काफ़ी बदल गए हैं।

अफ़ग़ानिस्तान में युद्ध अपराध की जांच के दायरे में अमरीका को भी लाने के मुद्दे ने अमरीकी सरकार को आक्रोश दिला दिया था। पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने पूर्व प्रासिक्यूटर पर प्रतिबंध लगा दिए थे। मगर अब नए प्रासीक्यूटर का कहना है कि संसाधन सीमित हैं इसलिए जांच केवल तालेबान और दाइश तक सीमित रहेगी।

करीम ख़ान का कहना था कि तालेबान और दाइश की ओर से किए गए कथित अपराधों की प्रवृत्ति और उनके स्तर को देखते हुए यह फ़ैसला किया गया है और हम विश्वसनीय मुक़द्दमे शुरू करना चाहते हैं जिनको हर प्रकार के संदेह से ऊपर होकर अदालत में साबित किया जा सके।

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