Oct १०, २०२१ १७:०३ Asia/Kolkata

देश की क्रांति की 110वीं सालगिरह पर राष्ट्र के नाम संबोधन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि ताइवान का एकीकरण ज़रूर पूरा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मातृभूमि के संपूर्ण एकीकरण का ऐतिहासिक कार्य पूरा किया जाना चाहिए और यह ज़रूर पूरा होगा, लेकिन ताइवान के अलगाववादी इस मिशन के मार्ग में सबसे बड़ी रुकावट हैं।

ताइवान का मुद्दा एक आंतरिक मामला है, और किसी विदेशी ताक़त को इसमें दख़ल नहीं देना चाहिए। किसी को भी चीन के लोगों के राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने की मज़बूत क्षमता और दृढ़ निश्चय को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। निश्चित रूप से देश का एकीकरण किया जाएगा।

दूसरी ओर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने वॉल स्ट्रीट जर्नल की उस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया जताते हुए कि जिसमें एक साल के लिए ताइवान में अमरीकी सैनिकों की तैनाती की बात कही गई थी, कहा कि अमरीका और चीन के राजनीतिक संबंधों की बुनियाद, एकल चीन है। इसके लिए ताइवान से कूटनीतिक संबंदों को ख़त्म करना, द्विपक्षीय सुरक्षा संबंधों की समाप्ति और ताइवान से सैनिकों का निष्कासन, चीन और संयुक्त राज्य के बीच कूटनीतिक संबंधों की स्थापना के लिए ज़रूरी है।

संयुक्त राज्य को ताइवान के मुद्दे की संवेदनशीलता को समझना चाहिए, उसे चीन के एकीकरण और चीन और अमरीका के बीच तीन संयुक्त बयानों का पालन करना चाहिए। ताइवान को हथियारों की बिक्री और उसके साथ हर प्रकार का सैन्य सहयोग बंद करना चाहिए।

अमरीका के अधिकारियों को यह बात समझनी चाहए कि ताइवान का मुद्दा चीन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

इसी प्रकार चीन के विदेश मंत्रालय ने फ़्रांसीसी सिनेटर की ताइवान यात्रा पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि इस यात्रा का बीजिंग और पेरिस के रिश्तों पर असर पड़ेगा।

बीजिंग ने बार-बार विदेशी शक्तियों को चेतावनी दी है कि ताइवान के मामले में फूंक-फूंक कर क़दम उठाएं और ताइवन की स्वाधीनता को लेकर किसी तरह का दख़ल न दें। मोहम्मद रज़ा ख़ालिक़ वेर्दी आईआरआईबी, बीजिं

टैग्स