Oct १९, २०२१ १९:२९ Asia/Kolkata
  • जार्ज बुश के नस्लवादी प्रशासन ने कोलिन पावेल की मदद से किस तरह सारी दुनिया को झांसा देने की कोशिश की? हमें साफ़ नज़र आ रहा है कि बहुत जल्द इस्लामी-अरब आंदोलन का सैलाब क़ुद्स से उठेगा!

अमरीका के पूर्व विदेश मंत्री कोलिन पावेल को इस बात के लिए हमेशा याद रखा जाएगा कि जार्ज बुश शासन ने बड़ी दुष्टता और धूर्तता के साथ उन्हें इराक़ के महाविनाश के हथियारों का ढिंढोरा पीटने के लिए इस्तेमाल किया ताकि इराक़ पर हमला करने का बहाना मिल जाए।

कोलिन पावेल ने सुरक्षा परिषद का मंच इस्तेमाल किया और इराक़ में केमिकल हथियारों के मोबाइल कारख़ानों की तसवीरें दिखा दीं और दावा ठोंक दिया कि यह तसवीरें इन्हीं कारख़ानों में काम करने वाले एक व्यक्ति से हासिल की गई हैं। इस ड्रामे की मदद से कई देशों को इराक़ युद्ध के लिए तैयार किया गया और विश्व जनमत को झांसा दिया गया।

यह सही है कि पावेल अफ़्रीक़ी मूल के अमरीकी थे और उन्होंने स्वीकार किया कि अमरीकी इंटैलीजेन्स एजेंसियों ने उन्हें बेवक़ूफ़ बनाया। पावेल ने अमरीकी जनता और दुनिया से माफ़ी भी मांगी थी लेकिन यह माफ़ी तब आई जब अंतर्राष्ट्रीय जांच कर्ताओं ने अपनी रिपोर्ट पेश कर दी कि इराक़ में महाविनाश के कोई हथियार नहीं थे। माफ़ी तब मांगी गई जब इराक़ में दस लाख से अधिक लोगों की जानें जा चुकी थीं।

हक़ीक़त यह है कि अमरीका ने यह जंग इस्राईल के उकसावे में आकर लड़ी। यह जंग बड़ी साज़िश का हिस्सा थी जिसके तहत सीरिया, लीबिया और यमन को तबाह किया गया।

सीरिया अब बहुत तेज़ी से अपनी ताक़त वापस हालिस कर रहा है। इराक़ भी बहुत तेज़ी से मज़बूत होने लगा है। फ़िलिस्तीनी जनता का प्रतिरोध भी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और लगातार सफलताएं हासिल कर रहा है।

कोलिन पावेल, उनके बास जार्ज बुश, उप राष्ट्रपति डिक चेनी, युद्ध मंत्री रम्सफ़ेल्ड और उनके साथ टोनी ब्लेयर इतिहास के कूड़ेदान में समा जाएंगे लेकिन इस्लामी और अरब ताक़तें साज़िशों और जंगों के बीच से अंगड़ाई लेकर खड़ी हो रही हैं। यही ज़मीनी सच्चाई है।

स्रोतः रायुल यौम

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