Nov १९, २०२१ ०३:१४ Asia/Kolkata
  • सच्चे और अच्छे दोस्त के बारे में मासूम ने क्या कहे हैं? सच्चे दोस्त की 19 अलामतें

दोस्त के बारे में हज़रत लुक़मान ने अपने बेटे को क्या नसीहत की है?

इंसान एक सामाजिक प्राणी है और सफ़ल सामाजिक जीवन गुज़ारने के लिए इंसान को जिन बहुत सी चीज़ों की ज़रूरत होती है उसमें से एक अच्छा और सच्चा दोस्त है। जिस इंसान को सच्चा दोस्त मिल जाये मानो उसे लोक- परलोक की नेकी मिल गयी। जब इंसान अकेला होता है तो बहुत सी समस्याओं का मुक़ाबला करना काफी कठिन होता है परंतु अगर इंसान का कोई सच्चा दोस्त होता है तो उसका टेंशन कम हो जाता है और वह अधिक हिम्मत व साहस के साथ मुश्किलों का सामना व मुक़ाबला करता है।

इसी तरह जिस इंसान के जितने अधिक सच्चे दोस्त होते हैं उसकी ज़िन्दगी उतना ही आसान होती है यानी ज़िन्दगी की कठिनाइयों का मुकाबला करना उतना ही सरल व सुगम होता है। दूसरे शब्दों में इंसान बहुत सी कठिनाइयों को कठिनाइ ही नहीं समझता है और उन्हें वह उसके बायें हाथ का खेल समझता है पर यह सब उस वक्त होता है जब इंसान के पास सच्चे दोस्त होते हैं। अच्छे दोस्तों का महत्व समझने के लिए हज़रत लुक़मान की वह नसीहत काफी है जिसमें वह अपने बेटे को नसीहत करते हुए कहते हैं कि बेटा हज़ार दोस्त कम हैं और एक दुश्मन भी ज़्यादा है।

अच्छा दोस्त बनाने पर जहां बल दिया गया है वहीं लोगों से दुश्मनी करने से बहुत सख्ती से मना किया है। इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम फरमाते हैं कि उस इंसान से भी दुश्मनी न करो जिससे पूरा यक़ीन है कि उससे तुम्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा।

जिस तरह अधिकांश या लगभग समस्त चीज़ों की कुछ न कुछ अलामतें होती हैं और उन्हीं अलामतों के ज़रिये वे पहचानी जाती हैं उसी तरह सच्चे दोस्त की भी कुछ अलामतें होती हैं।

इस बात को ध्यान में रखना चाहिये कि जिस व्यक्ति के साथ आपका उठना- बैठना है यह ज़रूरी नहीं है कि वह आपका दोस्त ही हो। हो सकता है कि वह दोस्त की शक्ल में दुश्मन हो और आप अपनी नासमझी की वजह से उसे दोस्त समझ रहे हैं।

सारांश यह है कि जिस तरह इंसान मोबाइल, बैग या घड़ी आदि की खरीदारी में ध्यान से काम लेता है उसी तरह दोस्त बनाने में उससे भी अधिक ध्यान से काम लेने की ज़रूरत है। इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम फरमाते हैं कि दोस्ती से पहले परखो फिर दोस्ती करो मगर अधिकांश लोग पहले दोस्ती करते हैं फिर परखते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि जब इंसान दो चार लोगों से धोखा जा जाता है तो जो वास्तव में दोस्ती के लाएक़ होते हैं लोग उनसे भी दोस्ती नहीं करते।

अब हम अच्छे दोस्त की कुछ अलामतों का उल्लेख कर रहे हैं।

  1. अच्छे दोस्त की एक अलामत यह है कि वह बुरे कार्यों से रोकता है। इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम फरमाते हैं कि जो तुमसे मोहब्बत व प्रेम करेगा वह तुम्हें बुरे कार्यों से रोकेगा और जो तुमसे बुग्ज़ व द्वेष रखेगा वह तुम्हें डूबा देगा।
  2.  जो इंसान का सच्चा दोस्त होगा वह अपने दोस्त की खुशी को अपनी खुशी और उसकी समस्या को अपनी समस्या समझेगा। जो इंसान आपकी खुशी में खुश न हो और आपकी समस्या को अपनी समस्या न समझे समझ जाइये कि वह आपका सच्चा दोस्त नहीं है यद्यपि आप उसे अपना दोस्त ही क्यों न समझ रहे हों।
  3. सच्चे दोस्त की एक अलामत यह है कि वह कभी भी पीठ पीछे आपकी बुराई नहीं करेगा।
  4.  सच्चे दोस्त की एक अलामत यह है कि वह अपने दोस्त के सकारात्मक बिन्दुओं की सराहना और उसकी क़द्र करता है।
  5.  सच्चे दोस्त को जब कभी अपने दोस्त से कोई शिकायत होती है तो वह मुनासिब समय का इंतेज़ार करता है और बात- चीत के ज़रिये उन शिकायतों को दूर करता है।
  6.  जब लोगों में होता है तो यथासंभव अपने दोस्त का सम्मान करता और उसका ध्यान रखता है।

7. सच्चे दोस्त की एक अलामत यह है कि जब उससे कोई ग़लती हो जाती है तो वह अपने दोस्त से फौरन माफ़ी मांगता है।

8. जो इंसान सच्चा दोस्त होता है वह कोई एसी बात करने से परहेज़ करता है जिससे उसके दोस्त को तकलीफ़ पहुंचती हो।

9. सच्चा दोस्त अपने दोस्त के राज़ को अपना राज़ समझ कर उसकी रक्षा करता है।

10. सच्चा दोस्त अपने दोस्त की बुराई सुनना पसंद नहीं करता है।

11. सच्चा दोस्त अपने दोस्त की कामयाबी के लिए प्रयास करता है।

12. सच्चा दोस्त क्रोध में भी अपने दोस्त के लिए अभद्र शब्दों का प्रयोग नहीं करता है।

13. सच्चा दोस्त अधिक पैसे और पोस्ट के लिए अपने दोस्त के साथ विश्वासघात नहीं करता।

14. सच्चा दोस्त अपने दोस्त को बुद्धि और होशियारी में अपने से कम नहीं समझता है।

15. सच्चे दोस्त एक दूसरे की ग़लतियों को जल्द माफ कर देते और भूल जाते हैं।

16. अच्छा दोस्त अपने दोस्त की माफी मांगने को जल्दी कबूल कर लेता है और उसे शर्मिन्दा होने से पहले उसकी ग़लतियों को नज़रअंदाज़ कर देता है।

17. अच्छा दोस्त अपने संबंध को मज़बूत से मज़बूत करने की कोशिश करता है। हर उस कार्य से बचता है जिससे उसकी दोस्ती को नुकसान पहुंचता है।

18. अच्छा दोस्त अपने दोस्त की इच्छाओं व आस्थाओं का सम्मान करता है।  

19. सच्चा दोस्त वफादार होता है। वह कभी भी अपने दोस्त का अपमान नहीं करता चाहे अकेले में हो या लोगों में।  

बहरहाल सच्चा दोस्त एक फरिश्ता होता है जो दुःख- सुख में अपने दोस्त का साथ देता है। मित्रता एकता का सूत और शत्रुता खंडता का बीज है। यहां हमें रहीम का वह दोहा याद आ रहा है जिसमें वह कहते हैं” कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीति। विपति कसौटी जे कसे तेई साँचे मीत।

नोटः यह लेखक के निजी विचार हैं। इनसे पार्सटूडे का सहमत होना ज़रूरी नहीं है। MM

 

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