Nov २५, २०२१ १८:५३ Asia/Kolkata

...लंदन और पेरिस के बीच पिछले महीनों में मछुआरों और पलायनकर्ताओं को लेकर होने वाला मतभेद आख़िर कर इस नतीजे पर पहुंचा कि एक दर्दनाक त्रास्दी हो गई और इस हृदय विदारक घटना में 27 पलायनकर्ताओं की जानें चली गईं।

यह घटना उस समय हुई जब बड़ी संख्या में शरणार्थी मान्श द्वीप से गुज़रना चाहते थे। फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रां ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा कि फ़्रांस मान्श को शरणार्थियों की जन्नत नहीं बनने देगा। फ़्रांस के प्रधानमंत्री जीन कास्टेक्स ने इस घटना को एक मानव त्रास्दी बताया।...वाक़ई यह तो नरसंहार जैसी घटना है।

मारे गए लोगों के बीच कुछ छोटे बच्चे अपनी माओं के साथ नज़र आए जो सर्दी से जम गए थे। यह बहुत दर्दनाक घटना थी। यह मांश द्वीप से गुज़रकर ब्रिटेन पहुंचने की कोशिश कर रहे शरणार्थियों के लिए पिछले कई महीनों की सबसे बड़ी दुर्घटना थी। फ़्रांस की पुलिस की लापरवाही की वजह से इस साल अब तक 26 हज़ार से अधिक शरणार्थी इस रास्ते से गुज़र कर ब्रिटेन पहुंचने की कोशिश कर चुके हैं। यह संख्या पिछले साल के पलायन की तुलना में तीन बराबर की वृद्ध को दर्शाती है।....फ़्रांस के अधिकारी का कहना है कि इस मामले की ज़िम्मेदारी फ़्रांस और ब्रिटेन दोनों की है कि मानव तस्करी की रोकथाम के लिए एक दूसरे से सहयोग करें। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि फ्रांस और ब्रिटेन के अधिकारी अगर आज मानव तस्करों को इस घटना के लिए ज़िम्मेदार बता रहे हैं तो यह दरअस्ल ब्रिटेन और फ़्रांस की अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश है।

इस मानव त्रास्दी के बाद लंदन और पेरिस ने सब एक दूसरे की आलोचना करके चुप्पी साध ली। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जानसन ने फ़्रांसीसी अधिकारियों की निंदा करते हुए कहा कि फ़्रांस को चाहिए कि शरणार्थियों को मान्श द्वीप से गुज़रने से रोकने के लिए अधिक प्रभावी क़दम उठाने की ज़रूरत है। फ़्रांस का कहना है कि इस साल उसने 7 हज़ार 700 शरणार्थियों को पानी में डूबने से बचाया है मगर उसने इस ओर इशारा नहीं किया कि इस देश की विनाशकारी नीतियों की वजह से किस तरह दसियों लाख लोग दूसरे देशों में बेघर और पलायन करने पर मजबूर हो गए। पेरिस से आईआरआईबी के लिए शहसवार हुसैनी की रिपोर्ट  

 

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