Nov २६, २०२१ १५:१८ Asia/Kolkata

...इस्लामी मानवाधिकार आयोग की समीक्षा की ताज़ातरीन रिपोर्ट से पता चलता है कि पश्चिमी देशों में इस्लामाफ़ोबिया में बड़ी तेज़ी से वृद्धि हो रही है।

....इस्लामी मानवाधिकार आयोग की समीक्षा के नतीजों से यह पता चला है कि 2010 में 50 प्रतिशत लोगों ने यह बात कही कि उन्होंने किसी मुसलमान पर इस्लामोफ़ोबिया के तहत होने वाले हमले की घटना देखी। मगर 5 साल बाद ब्रिटेन में 80 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्होंने मुसलमानों और इस्लामी स्थलों पर हमले होते देखे हैं।....इस्लामी मानवाधिकार आयोग के वरिष्ठ सदस्य का कहना है कि मुसलमानों पर योजनाबद्ध तरीक़े से हमले हो रहे हैं और इन हमलों को कुछ संगठनों, मीडिया और समूहों की ओर से प्रयोजित किया जाता है ताकि मुसलमानों पर शिकंजा कसा जा सके। वजह यह है कि मुसलमान अगर अक़ीदे का बहुत पक्का न भी हो तब भी अत्याचार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाता है। वह समाज को एसा बनाना चाहते हैं जिससे सबको फ़ायदा पहुंचे।

साम्राज्यवाद और विस्तारवाद पर अंकुश लगाना इस्लामी प्रवृत्ति में शामिल है। यह बात वह समझ चुके हैं और उनकी कोशिश यह है कि मुसलमानों को ग़ैर बताएं कि इनका हमारे समाज से संबंध नहीं है और फिर मुसलमानों के ख़िलाफ़ एकजुट हो जाएं। 2010 के सर्वे में साठ प्रतिशत लोगों ने कहा था कि मुसलमानों के ख़िलाफ़ माहौल बनाने और नफ़रत फैलाने में ब्रितानी राजनेताओं और अधिकारियों का हाथ है।

मगर अब 85 प्रतिशत ब्रितानी नागरिकों को सोच यही है।....ब्रितानी मुस्लिम युवा का कहना है कि अख़बारों के फ़्रंट पेज पर मुसलमानों से नफ़रत फैलाने वाली सामग्री भरी रहती है और मीडिया जब मुसलमानों के बारे में इस तरह की रिपोर्टें प्रकाशित करता है तो मीडिया के नियमों को नज़रअंदाज़ कर देता है। वह मुसलमानों को सारी दुनिया में फैली तबाही का ज़िम्मेदार बताते हैं। यह हमारे समय की एक त्रासदी है जिसका निशाना मुसलमान बन रहे हैं।

इस्लामी मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2010 में 30 प्रतिशत मुसलमानों ने यह बात कही थी कि उन्होंने इस देश के अख़बारों में इस्लामोफ़ोबिया की सामग्री नहीं देखी है लेकिन अब ब्रिटेन के 94 प्रतिशत मुसलमान कहते हैं कि इस देश के मीडिया में मुसलमानों से नफ़रत फैलाने वाली सामग्री की बाढ़ सी आ गई है।

ब्रिटेन की दूसरी संस्थाओं के ज़रिए किए गए अध्ययन की बात की जाए तो न्यू कैसल युनिवर्सिटी की रिपोर्ट बताती है कि ब्रिटेन में 68 प्रतिशत मुसलमान रोज़ाना ब्रिटेन में इस्लामोफ़ोबिया की मार झेलते हैं। लंदन से आईआरआईबी के लिए मुजतबा क़ासिम ज़ादे की रिपोर्ट।    

 

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